झारखंड: 23 अक्तूबर तक रांची लौट सकते हैं सीएम हेमंत सोरेन, प्रशासनिक फैसलों से लेकर उपचुनाव तक बढ़ेगी हलचल
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 23 अक्टूबर तक रांची लौट सकते हैं। उनकी वापसी के बाद अधिकारियों के तबादले, पदोन्नति और अन्य लंबित प्रशासनिक मामलों पर फैसले की उम्मीद है। वहीं, गिरिडीह उपचुनाव में झामुमो की उम्मीदवार चयन प्रक्रिया और कैबिनेट बैठक पर भी नजर रहेगी।
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नवरात्र समाप्त होने के साथ ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के जल्द रांची लौटने की चर्चा तेज हो गई है। दिवंगत रूपी सोरेन के निधन के बाद से मुख्यमंत्री सपरिवार अपने पैतृक गांव नेमरा में हैं। अंतिम संस्कार और संस्कार भोज की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने रूपी सोरेन की अस्थियों का दामोदर नदी में विसर्जन भी कर दिया है। फिलहाल वह नेमरा में ही मौजूद हैं।
जानकारों के मुताबिक, मुख्यमंत्री 23 अक्टूबर तक रांची लौट सकते हैं। उनकी वापसी के बाद राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। सरकार के स्तर पर कई प्रशासनिक मामले लंबित बताए जा रहे हैं, जिन पर मुख्यमंत्री की मंजूरी का इंतजार है। इनमें अधिकारियों के तबादले, पदस्थापन और पदोन्नति से जुड़े मामले भी शामिल हैं।
गिरिडीह उपचुनाव को लेकर बढ़ेगी सक्रियता
मुख्यमंत्री की वापसी के साथ ही गिरिडीह विधानसभा उपचुनाव को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की गतिविधियां भी तेज हो सकती हैं। दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद यह सीट रिक्त हुई है। नियमानुसार, विधानसभा की रिक्त सीट पर छह महीने के भीतर उपचुनाव कराया जाना है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि झामुमो श्वेता शर्मा को गिरिडीह से उम्मीदवार बना सकता है। हालांकि, पार्टी की ओर से अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में मुख्यमंत्री की वापसी के बाद उम्मीदवार को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
कैबिनेट बैठक की भी चर्चा
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, आने वाले मंगलवार या बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक हो सकती है। बैठक में विभिन्न प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के साथ महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने की संभावना है।
इधर, मुख्यमंत्री के छोटे भाई और दुमका से झामुमो विधायक बसंत सोरेन की तबीयत पर भी नजर बनी हुई है। उनके स्वास्थ्य को लेकर अब तक विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पार्टी नेताओं के अनुसार, बसंत सोरेन का इलाज चल रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की रांची वापसी के बाद झारखंड में शासन-प्रशासन से जुड़े लंबित मामलों के साथ राजनीतिक गतिविधियों में भी तेजी आने की संभावना है।