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Jharkhand: धनबाद में अनशन पर बैठे करीब 22,000 रेलवे कर्मचारी, पुरानी पेंशन योजना को वापस लाने की मांग
Mon, 08 Jan 2024 12:38 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: श्वेता महतो
Updated Mon, 08 Jan 2024 12:38 PM IST
सार
पुरानी पेंशन योजना को वापस लाने की मांग पर झारखंड के धनबाद में रेलवे कर्मचारी अनशन पर बैठ गए।
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Dhanbad railway employees went on fast
- फोटो : Social Media
विस्तार
झारखंड के धनबाद जिले में रेलवे के कुछ कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को वापस लाने की मांग करते हुए सोमवार की सुबह अनशन पर बैठ गए। पूर्वी मध्य रेलवे कर्मचारी संघ (ईसीआरकेयू) के प्रवक्ता एनके खवास ने दावा किया कि धनवाद रेलवे डिवीजन के करीब 22,000 कर्मचारियी अनशन पर बैठे हैं।
पुरानी पेंशन योजना को वापस लाने की मांग
कर्मचारियों का एक समूह संभागीय रेलवे प्रबंधक के परिसर और अन्य स्थानों पर धरने पर बैठे हुए हैं। ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन (एआईआरएमएफ) जोनल सेक्रेटरी ओपी शर्मा ने कहा, केंद्र सरकार ने भले ही नई पेंशन योजना (एनपीएस) के तहत मिलने वाले लाभ को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देने के लिए एक समिति का गठन किया है। सभी कर्मचारियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि उन्हें ओपीएम से कम कुछ भी मंजूर नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि झारखंड समेत कई राज्य पहले ही अपने कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना पर लौट चुकी है। इसलिए हम भी केंद्रीय सरकार से ओपीएस की मांग कर रहे हैं। ओपीएस के तहत कर्मचारी को उनके अंतिम वेतम के 50 फीसदी के बराबर मासिक पेंशन मिलती है। यहां कर्मचारियों के योगदान की आवश्यकता नहीं है।
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वहीं एनपीएस के तहत कर्मचारी को अपने मूल वेतन और महंगाई भत्ते का 10 प्रतिशत योगदान देना होता है और सरकार भी उतना ही योगदान करती है। पैसे को पेंशन फंड विनियामक और विकास प्राधीकरण द्वारा स्वीकृत कई पेंशन फंडों में से एक में निवेश किया जाता है।
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पुरानी पेंशन योजना को वापस लाने की मांग
कर्मचारियों का एक समूह संभागीय रेलवे प्रबंधक के परिसर और अन्य स्थानों पर धरने पर बैठे हुए हैं। ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन (एआईआरएमएफ) जोनल सेक्रेटरी ओपी शर्मा ने कहा, केंद्र सरकार ने भले ही नई पेंशन योजना (एनपीएस) के तहत मिलने वाले लाभ को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देने के लिए एक समिति का गठन किया है। सभी कर्मचारियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि उन्हें ओपीएम से कम कुछ भी मंजूर नहीं है।
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उन्होंने आगे कहा कि झारखंड समेत कई राज्य पहले ही अपने कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना पर लौट चुकी है। इसलिए हम भी केंद्रीय सरकार से ओपीएस की मांग कर रहे हैं। ओपीएस के तहत कर्मचारी को उनके अंतिम वेतम के 50 फीसदी के बराबर मासिक पेंशन मिलती है। यहां कर्मचारियों के योगदान की आवश्यकता नहीं है।
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वहीं एनपीएस के तहत कर्मचारी को अपने मूल वेतन और महंगाई भत्ते का 10 प्रतिशत योगदान देना होता है और सरकार भी उतना ही योगदान करती है। पैसे को पेंशन फंड विनियामक और विकास प्राधीकरण द्वारा स्वीकृत कई पेंशन फंडों में से एक में निवेश किया जाता है।