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राज्य में बढ़ जायेगी राजनीतिक हलचल
रांची/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 02 Jan 2013 05:09 PM IST
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राज्य में राजनीतिक हलचल अब तेज होने के आसार हैं। 10 जनवरी को झामुमो ने केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है। मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए भाजपा-झामुमो के बीच की तनातनी के नतीजे के लिए इस बैठक पर सबकी नजर है। इसी दिन भाजपा-झामुमो के 28-28 महिने के फार्मूले के तहत अर्जुन मुंडा सरकार के 28 माह पूरे हो रहे हैं।
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10 जनवरी की बैठक से पहले छह जनवरी को पार्टी ने सांसदों-विधायकों की बैठक बुलाई है। इसमें सर्वसम्मति से लिये गये फैसले पर 10 जनवारी को मुहर लगाई जायेगी। इसे झारखंड के बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
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मालूम हो कि लंबे समय से भाजपा-झामूमो के बीच मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर खींचतान चल रही है। मई 2010 में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को संसद में एटमी डील के समर्थन में वोट देने के चलते अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी। बाद में किसी तरह भाजपा और झामूमो के बीच मिलकर सत्ता चलाने पर सहमति बनी और 28-28 माह तक मुख्यमंत्री पद मिलने का फार्मूला अपनाया गया।
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सहमति के बाद भी झामुमो की नाराजगी बनी रही और उसने एनडीए से जुड़ने में कभी रूचि नहीं दिखाई। राष्ट्रीय मसलों पर कांग्रेस के साथ झामुमो की वैचारिक सहमति दिखी और उसने राष्ट्रपति चुनाव व एफडीआई पर कांग्रेस का साथ दिया। यही नहीं, राज्यसभा चुनाव में भी भाजपा के प्रत्याशी को झामुमो ने समर्थन नहीं दिया और सफल रणनीति के तहत अपने प्रत्याशी को राज्यसभा भेजने में सफल रहे।
झामुमो खेमे में इस बात को लेकर असंतोष रहा कि बराबर यानी 18-18 विधायकों की भागीदारी के बावजूद पार्टी को अपना एजेंडा लागू करवाने में मशक्कत करनी पड़ी। नीतिगत फैसले लेते वक्त भी झामुमो को विश्वास में नहीं लिया गया। इसी मनमुटाव के चलते 26 दिसंबर को जब हेमंत सोरेन से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने अपने स्तर से 29 को राज्य समन्वय समिति की बैठक में सारे मसलों का समाधान होने की घोषणा कि तो झामुमो ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
30 दिसंबर को जब मुंडा शिबू सोरेन से मिलने आये तो भी गर्मजोशी नहीं दिखी। सरकारी कार्यक्रमों से भी शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन खुद को दूर रखकर यह संदेश दे रहे हैं कि वे आसानी से मानने वाले नहीं हैं। ऐसे में आने वाले दिन राजनीतिक उथलपुथल से भरे होंगे। 10 जनवरी को होने वाली केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में झामुमो सख्ती दिखा सकती है।