सपा कार्यकर्ताओं को नक्सलियों ने जमकर पीटा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झारखंड के नक्सल-प्रभावित लातेहार जिले में समाजवादी पार्टी के एक प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करने गए पार्टी के तीन कार्यकर्ताओं की एक हथियार बंद दस्ते ने बेरहमी से पिटाई की है।
यह घटना चंदवा थाना क्षेत्र की है। यह कार्यकर्ता यहाँ सोंस गांव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी केश्वर यादव ऊर्फ रंजन यादव के पक्ष में प्रचार करने गए थे।
'कपड़े भी उतरवा लिए'
इसी बीच हथियारबंद दस्ते ने वहाँ पहुँच उनकी पिटाई कर दी। इससे पहले दस्ते ने सपा कार्यकर्ताओं के कपड़े भी उतरवा दिए थे। कार्यकर्ताओं को चुनाव प्रचार के लिए दोबारा गावों में नहीं आने की धमकी भी दी गई है।
चंदवा थाना के प्रभारी मिथिलेश सिंह ने बीबीसी को बताया है कि घायल सपा कार्यकर्ता दीपू सिन्हा के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने दावा किया है कि हथियारबंद लोग कथित जनमुक्ति परिषद से जुड़े हैं।
पुलिस उस इलाके में तलाशी अभियान चला रही है। पुलिस के मुताबिक घायल सपा कार्यकर्ताओं को बेहतर इलाज के लिए राजधानी रांची के रिम्स अस्पताल में भेजा गया है।
'गोली मारने की धमकी'
पुलिस के मुताबिक समाजवादी पार्टी के चुनाव प्रभारी दीपू कुमार सिन्हा, पार्टी से जुड़े चंदवा के प्रखंड अध्यक्ष मोहम्मद सरफराज और विनोद यादव चुनाव प्रचार करने सोस गांव गए थे।
घटना से पहले वे पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों के साथ बैठक कर रहे थे। इस बीच बाइक पर सवार तीन हथियारबंद लोग वहां पहंचे। उनमें से एक ने पुलिस की वर्दी पहनी हुई थी।
हथियारबंद लोगों ने आते ही कहा कि जो लोग सपा के कार्यकर्ता हैं वो कुर्सी पर खड़े हो जाएं। जब कोई कुर्सी पर खड़ा नहीं हुआ तो उन्होंने गोली मारने की धमकी दी।
फिर ना आने की हिदायत दी गई
कुर्सी पर खड़े होने के बाद कार्यकर्ताओं के पैंट-शर्ट खुलवा दिए गए। इसके बाद तीनों कार्यकर्ताओं की पिटाई कई गई। हथियारबंद दस्ते के खौफ से पार्टी के कार्यकर्ता खुले बदन में ही बेतहाशा इधर-उधर भागने लगे।
बाद में हथियारबंद दस्ते के लोगों ने उन्हें वापस बुलाकर कपड़े पहनने को कहा और दोबारा चुनाव प्रचार नहीं करने के लिए गांवों का दौरा न करने की हिदायत दी। इस घटना के बाद से चुनाव प्रचार में जुटे राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं में खौफ है।