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महाशिवरात्रि 2018: कामनालिंग बैद्यनाथधाम समेत झारखंड के प्रसिद्ध शिव मंदिर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Updated Tue, 13 Feb 2018 10:06 AM IST
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बैद्यनाथधाम, देवघर
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बैद्यनाथधाम
भारत के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा बैद्यनाथ शिवलिंग झारखंड के देवघर में मौजूद है। देवघर यानि जहां देवता निवास करते हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार ज्योतिर्लिंग वह स्थान कहलाते हैं जहां भगवान शिव प्रकट हुए और ज्योति रूप में स्थापित हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार जब शिव सती के शरीर को लेकर घूम रहे थे तो सती का हृद्य यहां गिरा था। इसलिए मान्यता है कि यहां पूजा करने वाले श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसलिए इस शिवलिंग को कामना लिंग भी कहा जाता है। कथाओं के अनुसार सती के शरीर के 51 खंड हुए थे। यह अंग जहां गिरे, वहां शक्तिपीठ की स्थापना हुई।
सावन के महीने में श्रद्धालु यहां गंगाजल से बाबा का अभिषेक करते हैं। श्रद्धालु 105 किमी दूर सुल्तानगंज में पवित्र गंगा नदी से गंगाजल भरकर कांवर उठाते हैं पैदल यात्रा पूरी कर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं।
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सावन के महीने में देवघर में श्रावणी मेला लगता है और यहां का नजारा देखने लायक होता है। पूरा इलाका 'बम-बम' के नारों से गूंजता रहता है। बैद्यनाथधाम को बैजनाथ धाम भी कहा जाता है।
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भारत के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा बैद्यनाथ शिवलिंग झारखंड के देवघर में मौजूद है। देवघर यानि जहां देवता निवास करते हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार ज्योतिर्लिंग वह स्थान कहलाते हैं जहां भगवान शिव प्रकट हुए और ज्योति रूप में स्थापित हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार जब शिव सती के शरीर को लेकर घूम रहे थे तो सती का हृद्य यहां गिरा था। इसलिए मान्यता है कि यहां पूजा करने वाले श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसलिए इस शिवलिंग को कामना लिंग भी कहा जाता है। कथाओं के अनुसार सती के शरीर के 51 खंड हुए थे। यह अंग जहां गिरे, वहां शक्तिपीठ की स्थापना हुई।
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सावन के महीने में श्रद्धालु यहां गंगाजल से बाबा का अभिषेक करते हैं। श्रद्धालु 105 किमी दूर सुल्तानगंज में पवित्र गंगा नदी से गंगाजल भरकर कांवर उठाते हैं पैदल यात्रा पूरी कर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं।
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सावन के महीने में देवघर में श्रावणी मेला लगता है और यहां का नजारा देखने लायक होता है। पूरा इलाका 'बम-बम' के नारों से गूंजता रहता है। बैद्यनाथधाम को बैजनाथ धाम भी कहा जाता है।
रहस्यमयी टूटी झरना महादेव मंदिर
टूटी झरना महादेव शिवलिंग
टूटी झरना मंदिर
भगवान शिव का यह मंदिर रहस्य और कौतुहल से भरा है क्योंकि यहां शिवलिंग का जलाभिषेक स्वयं मां गंगा के करकमलों द्वारा होता है। झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित टूटी झरना मंदिर में स्थापित शिवलिंग का जलाभिषेक साल के बारह महीने और चौबीसों घंटे होता है।
भक्त बताते हैं कि इस मंदिर में पहुंचनेवाले फरियादियों की पुकार भगवान भोलेनाथ अवश्य सुनते हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि साल 1925 में अंग्रेजों ने यहां रेल लाइन बिछाने के लिए खुदाई शुरू की तो उन्हें जमीन के अंदर गुंबद जैसी चीज दिखी।
गहराई पर पहुंचने के बाद उन्हें पूरा शिवलिंग और शिवलिंग के ठीक ऊपर मां गंगा की मूर्ति मिली। गंगा मईया की इसी मूर्ति की हथेली पर से गुजरते हुए जल आज भी शिवलिंग का अभिषेक करता है।
भगवान शिव का यह मंदिर रहस्य और कौतुहल से भरा है क्योंकि यहां शिवलिंग का जलाभिषेक स्वयं मां गंगा के करकमलों द्वारा होता है। झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित टूटी झरना मंदिर में स्थापित शिवलिंग का जलाभिषेक साल के बारह महीने और चौबीसों घंटे होता है।
भक्त बताते हैं कि इस मंदिर में पहुंचनेवाले फरियादियों की पुकार भगवान भोलेनाथ अवश्य सुनते हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि साल 1925 में अंग्रेजों ने यहां रेल लाइन बिछाने के लिए खुदाई शुरू की तो उन्हें जमीन के अंदर गुंबद जैसी चीज दिखी।
गहराई पर पहुंचने के बाद उन्हें पूरा शिवलिंग और शिवलिंग के ठीक ऊपर मां गंगा की मूर्ति मिली। गंगा मईया की इसी मूर्ति की हथेली पर से गुजरते हुए जल आज भी शिवलिंग का अभिषेक करता है।
गरीब नाथ मंदिर
गरीब नाथ मंदिर
गरीब नाथ मंदिर
मुजफ्फरपुर में गरीब नाथ महादेव का मंदिर है। शिवलिंग जहां प्रकट हुए वह पहले जंगल था। सावन के महीने में श्रद्धालु यहां कांवड़ लेकर आते हैं। खास बात है कि यह बिहार की सबसे लंबी दूरी की कावड़ यात्रा है।
भोलेनाथ के भक्त सोनपुर के पास पहलेजा घाट से पवित्र गंगा जल कांवड़ में लेकर सोनपुर और हाजीपुर के रास्ते होते हुए पटना पहुंचते हैं। 65 किलोमीटर की यात्रा पैदल पूरी कर भक्त गंगाजल से महादेव का अभिषेक करते हैं।
बाबा गरीबनाथ शिवलिंग कब प्रकट हुआ इसके बारे में जानकारी मौजूद नहीं है। साल 2006 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पार्षद ने मंदिर का अधिग्रहण कर मंदिर की व्यवस्था के लिए 11 सदस्यों का एक ट्रस्ट बनवाया। मंदिर में मौजूद कल्पवृक्ष की पूजा शिवलिंग के प्राकट्य से भी पहले से होती है।
मुजफ्फरपुर में गरीब नाथ महादेव का मंदिर है। शिवलिंग जहां प्रकट हुए वह पहले जंगल था। सावन के महीने में श्रद्धालु यहां कांवड़ लेकर आते हैं। खास बात है कि यह बिहार की सबसे लंबी दूरी की कावड़ यात्रा है।
भोलेनाथ के भक्त सोनपुर के पास पहलेजा घाट से पवित्र गंगा जल कांवड़ में लेकर सोनपुर और हाजीपुर के रास्ते होते हुए पटना पहुंचते हैं। 65 किलोमीटर की यात्रा पैदल पूरी कर भक्त गंगाजल से महादेव का अभिषेक करते हैं।
बाबा गरीबनाथ शिवलिंग कब प्रकट हुआ इसके बारे में जानकारी मौजूद नहीं है। साल 2006 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पार्षद ने मंदिर का अधिग्रहण कर मंदिर की व्यवस्था के लिए 11 सदस्यों का एक ट्रस्ट बनवाया। मंदिर में मौजूद कल्पवृक्ष की पूजा शिवलिंग के प्राकट्य से भी पहले से होती है।
हरिहर नाथ, सोनपुर
हरिहर नाथ मंदिर
हरिहर नाथ, सोनपुर
बिहार में पावन नारायणी नदी के तट पर भगवान हरी और हर का एक पौराणिक मंदिर है जो हरिहर नाथ के नाम से मशहूर है। पौराणिक कथाओं के अनुसार गज और ग्राह की लड़ाई में भगवान विष्णु ने स्वयं प्रकट होकर गज की सहायता की थी। बाबा गरीब नाथ जाने वाले कांवड़ियां हरिहर नाथ पर भी जल चढ़ाते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर यहां मेला लगता है जो करीब एक महीने तक चलता है, जो सोनपुर मेला के नाम से विख्यात है।
बिहार में पावन नारायणी नदी के तट पर भगवान हरी और हर का एक पौराणिक मंदिर है जो हरिहर नाथ के नाम से मशहूर है। पौराणिक कथाओं के अनुसार गज और ग्राह की लड़ाई में भगवान विष्णु ने स्वयं प्रकट होकर गज की सहायता की थी। बाबा गरीब नाथ जाने वाले कांवड़ियां हरिहर नाथ पर भी जल चढ़ाते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर यहां मेला लगता है जो करीब एक महीने तक चलता है, जो सोनपुर मेला के नाम से विख्यात है।