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झारखंड: सचिवालय सेवा की नई नियमावली का विरोध, प्रमोशन में देरी की आशंका; समीक्षा की मांग की

Fri, 23 Oct 2026 02:54 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: शबाहत हुसैन Updated Fri, 23 Oct 2026 02:54 PM IST
सार

झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने प्रस्तावित सचिवालय सेवा नियमावली का विरोध किया है। संघ के अनुसार, पदोन्नति के लिए न्यूनतम सेवा अवधि बढ़ने से अधिकारियों का कॅरिअर प्रभावित होगा। संघ ने नियमावली की समीक्षा और आवश्यक संशोधन की मांग की है।

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Jharkhand: Opposition to new Secretariat Service rules; concerns raised over potential delays in promotions
झारखंड मंत्रालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने राज्य सरकार की प्रस्तावित ‘झारखंड सचिवालय सेवा नियमावली’ का विरोध करते हुए इसमें संशोधन की मांग की है। संघ का कहना है कि नियमावली के कई प्रावधान सचिवालय संवर्ग के पदाधिकारियों और कर्मियों के कॅरिअर तथा भविष्य पर प्रतिकूल असर डालेंगे। संघ के अनुसार, नए नियम लागू होने से पदोन्नति की प्रक्रिया धीमी हो जाएगी और अधिकारियों के लिए पूरे सेवाकाल में संयुक्त सचिव के पद तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

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पदोन्नति की न्यूनतम सेवा अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव
प्रस्तावित नियमावली में विभिन्न पदों पर पदोन्नति के लिए निर्धारित न्यूनतम सेवा अवधि बढ़ाई गई है। मसौदे के अनुसार, सहायक प्रशाखा पदाधिकारी से प्रशाखा पदाधिकारी बनने के लिए पहले दो साल की सेवा आवश्यक थी, जिसे बढ़ाकर आठ साल करने का प्रस्ताव है। वहीं, प्रशाखा पदाधिकारी से अवर सचिव के पद पर पदोन्नति के लिए न्यूनतम सेवा अवधि छह साल से बढ़ाकर आठ साल करने का प्रावधान किया गया है।
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उच्च पदों पर पदोन्नति के लिए भी लंबा इंतजार
नियमावली के प्रस्तावित मसौदे में अवर सचिव से उप सचिव के पद पर पदोन्नति के लिए कम से कम पांच साल की सेवा अनिवार्य करने का प्रावधान है। इसी तरह, उप सचिव से संयुक्त सचिव के पद पर पदोन्नति के लिए भी पांच साल की सेवा निर्धारित की गई है। संघ का कहना है कि पदोन्नति की अवधि बढ़ने से सचिवालय संवर्ग के अधिकारियों और कर्मचारियों में असंतोष है।


समकक्ष सेवाओं के अधिकारियों से भेदभाव का आरोप
सचिवालय सेवा संघ का तर्क है कि राज्य सरकार की अन्य समकक्ष प्रशासनिक सेवाओं में कार्यरत अधिकारियों को अपेक्षाकृत कम अवधि में पदोन्नति मिल जाती है। ऐसे में सचिवालय सेवा के अधिकारियों के लिए पदोन्नति की अवधि बढ़ाना भेदभावपूर्ण है। संघ के अनुसार, इससे अधिकारियों का मनोबल प्रभावित होगा और उनके लिए संयुक्त सचिव के पद तक पहुंचना कठिन हो जाएगा।

नियमावली की समीक्षा और संशोधन की मांग
सचिवालय सेवा संघ ने राज्य सरकार से प्रस्तावित नियमावली को अंतिम रूप देने से पहले इसकी समीक्षा करने की मांग की है। संघ का आग्रह है कि पदोन्नति से जुड़े प्रावधानों में आवश्यक संशोधन किए जाएं, ताकि सचिवालय संवर्ग के पदाधिकारियों और कर्मियों के कॅरिअर पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

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