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Jharkhand: आईएमए की झारखंड इकाई ने की 'मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट' लागू करने की मांग; आंदोलन की दी चेतावनी

Sun, 27 Aug 2023 04:54 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 27 Aug 2023 04:54 PM IST
सार

Jharkhand: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की झारखंड इकाई ने रविवार को मांग की कि राज्य सरकार डॉक्टरों और मरीजों के लाभ के लिए राज्य में जल्द से जल्द मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट (एमपीए) और क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट (सीईए) में संशोधन लागू करे।

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Jharkhand IMA demands implementation of Medical Protection Act
आईएमए की झारखंड इकाई ने दी आंदोलन की चेतावनी - फोटो : अमर उजाला डिजिटल (सांकेतिक)

विस्तार

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की झारखंड इकाई ने रविवार को मांग की कि राज्य सरकार डॉक्टरों और मरीजों के लाभ के लिए राज्य में जल्द से जल्द मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट (एमपीए) और क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट (सीईए) में संशोधन लागू करे। आईएमए ने यहां अपनी कार्यकारी निकाय की बैठक के दौरान इस संबंध में सरकार से अनुरोध करने का फैसला किया। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ऐसा न होने पर वे फिर से आंदोलन शुरू कर सकते हैं।

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मीडिया को संबोधित करते हुए आईएमए की झारखंड इकाई के अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने कहा कि उनकी मांगें अभी भी राज्य सरकार के पास लंबित हैं। उन्होंने कहा, 'हमें सिर्फ आश्वासन दिया गया है लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। सरकार ने लंबे समय से लंबित हमारी मांगों के प्रति उदासीन रवैया अपनाया है, जो स्वीकार्य नहीं है।'

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अरुण कुमार सिंह ने कहा कि जब उन्होंने कई दौर के आंदोलनों के साथ दबाव बनाया, तो राज्य सरकार बजट सत्र के दौरान राज्य विधानसभा में एमपीए विधेयक लाई। उन्होंने कहा, 'कुछ विधायकों की आपत्ति के बाद इसे प्रवर समिति के पास भेजा गया और यह करीब पांच महीने से लंबित है।' 
 

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आईएमए की झारखंड इकाई के सचिव प्रदीप कुमार ने कहा, 'हमने क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के एक नियम में संशोधन की मांग की है। इसे विधानसभा से पारित किए बिना संशोधित किया जा सकता है लेकिन सरकार अनजान है।' 

कुमार ने कहा कि उन्होंने एकल डॉक्टरों के क्लीनिक, दंपति डॉक्टरों के क्लीनिक और 50 बेड से कम के अस्पतालों को सीईए के दायरे से बाहर रखने की मांग की है। उन्होंने कहा,'अगर संशोधन तुरंत नहीं किया जाता है, तो एकल डॉक्टर क्लीनिक, दंपति डॉक्टरों के क्लीनिक और 50 बेड से नीचे के अस्पताल अपने प्रतिष्ठान बंद करने के लिए मजबूर होंगे।

झारखंड आईएमए के अध्यक्ष ने कहा, 'अगर सरकार कोई कदम नहीं उठाती है, तो हमारे पास फिर से अपना आंदोलन शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा, जो मरीजों को परेशानी में डाल सकता है जो हम नहीं चाहते हैं।' 

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