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झारखंड हाई कोर्ट: पहली पत्नी को 20 लाख रुपये गुजारा भत्ता देगा पति, 12 महीने में भुगतान का आदेश

Sat, 10 Oct 2026 09:14 PM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: प्रतीक पांडेय Updated Sat, 10 Oct 2026 09:14 PM IST
सार

झारखंड हाई कोर्ट ने पहली पत्नी के स्थायी गुजारा भत्ते को लेकर अहम आदेश दिया है। अदालत ने पति को 20 लाख रुपये देने का निर्देश दिया है। यह मामला जमशेदपुर फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील से जुड़ा है। कोर्ट ने पति की आय और महिला की आर्थिक स्थिति पर विचार करते हुए 12 महीने में चार समान किस्तों में भुगतान का आदेश दिया।

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Jharkhand High Court Orders Husband To Pay 20 Lakh Rupees Permanent Alimony To First Wife In Four Installments
झारखंड हाई कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झारखंड हाई कोर्ट ने तलाक से जुड़े 10 साल पुराने एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पति को अपनी पहली पत्नी को 20 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है। जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की अदालत ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने पति को निर्देश दिया कि वह 20 लाख रुपये की यह पूरी राशि 12 महीने के भीतर चार समान किस्तों में अपनी पहली पत्नी को भुगतान करे।
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तलाक और दूसरी शादी से जुड़ा है मामला
यह मामला जमशेदपुर फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में दाखिल की गई अपील से जुड़ा है। टाटा मोटर्स के कर्मचारी एन कुमार और उनकी पत्नी एस देवी (नाम परिवर्तित) का विवाह वर्ष 2003 में हुआ था। फैमिली कोर्ट से तलाक मिलने के बाद पति ने वर्ष 2018 में दूसरी शादी कर ली थी।
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हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान पहली पत्नी की ओर से केवल गुजारा भत्ते की मांग रखी गई। इसकी वजह यह थी कि पति की दूसरी शादी के बाद दोनों के फिर से एक साथ रहने की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो चुकी थी। ऐसे में विवाद का मुख्य मुद्दा पहली पत्नी को मिलने वाले स्थायी गुजारा भत्ते की राशि तय करना था।
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पति की आय और पत्नी की स्थिति पर गौर
सुनवाई के दौरान अदालत ने पति की वेतन पर्ची के आधार पर उसकी मासिक आय का आकलन किया। कोर्ट के सामने आए रिकॉर्ड के अनुसार, टाटा मोटर्स में कार्यरत पति का मासिक वेतन लगभग 47,000 रुपये है। अदालत ने इस आय के साथ पहली पत्नी की मौजूदा स्थिति को भी ध्यान में रखा।

कोर्ट ने पाया कि महिला की उम्र 47 वर्ष है और उसके पास अपने जीवनयापन के लिए कोई दूसरा साधन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में उसके भविष्य और आर्थिक जरूरतों को देखते हुए स्थायी गुजारा भत्ते की राशि तय करना जरूरी था। अदालत ने संबंधित तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद 20 लाख रुपये की राशि को उचित माना।

12 महीने में चार किस्तों में देना होगा पैसा
झारखंड हाई कोर्ट ने पति को निर्देश दिया कि वह पहली पत्नी को 20 लाख रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता 12 महीने के भीतर अदा करे। इस राशि का भुगतान चार समान किस्तों में करना होगा। इस तरह प्रत्येक किस्त पांच लाख रुपये की होगी।


अदालत के आदेश का उद्देश्य पहली पत्नी के लिए आर्थिक सहायता सुनिश्चित करना है। इस फैसले में पति की आय, महिला की उम्र और उसके पास जीवनयापन के अन्य साधन नहीं होने जैसे पहलुओं पर विचार किया गया। अब निर्धारित समयसीमा के भीतर राशि का भुगतान करना पति की जिम्मेदारी होगी।
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