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झारखंड: पर्यावरण बचाने को एकजुट हों समाज, वैज्ञानिक और आम लोग, राज्यपाल ने दिया संदेश
Sun, 20 Sep 2026 03:33 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Sun, 20 Sep 2026 03:33 PM IST
सार
झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए समाज, शैक्षणिक संस्थानों, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, उद्योगों और आम लोगों को मिलकर प्रयास करना होगा।
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धनवाद। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार का स्वागत करते हुए जिला प्रशासन के अधिकारी।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज, शैक्षणिक संस्थानों, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, उद्योगों और आम लोगों को एकजुट होकर साझा प्रयास करने होंगे। यह बात राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आइआइटी-आइएसएम के गोल्डन जुबली हॉल में आयोजित राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यशाला के दौरान कही।
आरोग्य भारती और आइआइटी-आइएसएम की ओर से रविवार को आयोजित इस कार्यशाला में उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यावरण और स्वास्थ्य का आपस में सीधा संबंध है। स्वच्छ जल, पौष्टिक भोजन, संतुलित जीवनशैली और स्वच्छ वातावरण ही एक स्वस्थ जीवन के आधार हैं।
विकास और प्राकृतिक संपदा संतुलन
कार्यशाला मे राज्यपाल ने कहा कि झारखंड के जंगल, जलस्रोत, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधन इस राज्य की अनमोल संपदा हैं। आज जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और जैव विविधता का संरक्षण सबसे बड़ी चुनौतियां बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि विकास की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे वर्तमान आवश्यकताएं पूरी होने के साथ ही आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी पूरी तरह सुरक्षित रहे।
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राज्यपाल ने 'मिशन लाइफ' का उल्लेख करते हुए आम लोगों से पानी और ऊर्जा बचाने, प्लास्टिक का उपयोग घटाने तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भरा आचरण अपनाने का आग्रह किया। इसके साथ ही उन्होंने शैक्षणिक व तकनीकी संस्थानों से जल संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, कचरा प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान तथा नवाचार बढ़ाने का आह्वान किया।
तकनीक से टिकाऊ विकास को बढ़ावा
आइआइटी-आइएसएम के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को विकास से अलग करके नहीं देखा जा सकता। इसका सीधा संबंध हमारी अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार और जीवन की गुणवत्ता से है। चुनौती विकास और पर्यावरण में से किसी एक को चुनने की नहीं, बल्कि वैज्ञानिक एवं तकनीकी समाधानों के माध्यम से विकास को टिकाऊ बनाने की है। उन्होंने सर्कुलर इकॉनमी, क्लीन टेक्नोलॉजी, रिन्यूएबल एनर्जी, जिम्मेदार माइनिंग, खदानों के पुनरुद्धार और वेस्ट-टू-रिसोर्स जैसे तकनीकी उपायों पर विशेष जोर दिया।
ये भी पढ़ें- बिहार एमएलसी चुनाव: जन सुराज ने पांच उम्मीदवारों का एलान किया, जानिए किसे-कहां से मिला टिकट?
पर्यावरण संरक्षण के मुख्य स्तंभ
आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव अशोक कुमार वर्षने ने स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए बीमारियों के इलाज के बजाय उनसे बचाव और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर बल दिया। उन्होंने पेड़, पानी, प्लास्टिक और स्वच्छता को पर्यावरण संरक्षण के मुख्य विषय बताया। उन्होंने कहा कि पौधारोपण के साथ-साथ पौधों के संरक्षण, जल पुनर्चक्रण और रिचार्ज वेल निर्माण पर ध्यान देना आवश्यक है। कार्यशाला के दौरान सामने आए सुझावों को व्यावहारिक कार्ययोजनाओं में बदलने पर चर्चा हुई।
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आरोग्य भारती और आइआइटी-आइएसएम की ओर से रविवार को आयोजित इस कार्यशाला में उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यावरण और स्वास्थ्य का आपस में सीधा संबंध है। स्वच्छ जल, पौष्टिक भोजन, संतुलित जीवनशैली और स्वच्छ वातावरण ही एक स्वस्थ जीवन के आधार हैं।
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विकास और प्राकृतिक संपदा संतुलन
कार्यशाला मे राज्यपाल ने कहा कि झारखंड के जंगल, जलस्रोत, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधन इस राज्य की अनमोल संपदा हैं। आज जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और जैव विविधता का संरक्षण सबसे बड़ी चुनौतियां बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि विकास की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे वर्तमान आवश्यकताएं पूरी होने के साथ ही आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी पूरी तरह सुरक्षित रहे।
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राज्यपाल ने 'मिशन लाइफ' का उल्लेख करते हुए आम लोगों से पानी और ऊर्जा बचाने, प्लास्टिक का उपयोग घटाने तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भरा आचरण अपनाने का आग्रह किया। इसके साथ ही उन्होंने शैक्षणिक व तकनीकी संस्थानों से जल संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, कचरा प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान तथा नवाचार बढ़ाने का आह्वान किया।
तकनीक से टिकाऊ विकास को बढ़ावा
आइआइटी-आइएसएम के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को विकास से अलग करके नहीं देखा जा सकता। इसका सीधा संबंध हमारी अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार और जीवन की गुणवत्ता से है। चुनौती विकास और पर्यावरण में से किसी एक को चुनने की नहीं, बल्कि वैज्ञानिक एवं तकनीकी समाधानों के माध्यम से विकास को टिकाऊ बनाने की है। उन्होंने सर्कुलर इकॉनमी, क्लीन टेक्नोलॉजी, रिन्यूएबल एनर्जी, जिम्मेदार माइनिंग, खदानों के पुनरुद्धार और वेस्ट-टू-रिसोर्स जैसे तकनीकी उपायों पर विशेष जोर दिया।
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पर्यावरण संरक्षण के मुख्य स्तंभ
आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव अशोक कुमार वर्षने ने स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए बीमारियों के इलाज के बजाय उनसे बचाव और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर बल दिया। उन्होंने पेड़, पानी, प्लास्टिक और स्वच्छता को पर्यावरण संरक्षण के मुख्य विषय बताया। उन्होंने कहा कि पौधारोपण के साथ-साथ पौधों के संरक्षण, जल पुनर्चक्रण और रिचार्ज वेल निर्माण पर ध्यान देना आवश्यक है। कार्यशाला के दौरान सामने आए सुझावों को व्यावहारिक कार्ययोजनाओं में बदलने पर चर्चा हुई।