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झारखंड एनकाउंटरः इन सवालों पर मुश्किल में फंसी पुलिस

Thu, 11 Jun 2015 03:55 PM IST
Updated Thu, 11 Jun 2015 03:55 PM IST
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Jharkhand encounter: Police involved in these tough questions

झारखंड में 12 माआवोदियों को मारने का दावा करने वाली झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ अब सवालों के घेरे में हैं। मारे गए 12 माआवोदियों में से अभी तक मात्र 7 की पहचान हो चुकी है जिनमें से छह के खिलाफ कोई पुलिस रिपोर्ट दर्ज नहीं है।

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एकमात्र 10 लाख के ईनामी आरकेजी ही पूर्व में आतंकी वारदातों में शामिल रहा है। वहीं मारे गए बाकी लोगों के परिजनों ने अब पुलिस और सुरक्षाबलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका आरोप है कि पुलिस ने उनके बच्चों की जानबूझकर हत्या की है।
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अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार मारे गए लोगों में अनुराग यादव उर्फ आरके जी उर्फ डॉक्टर ही वांछित माआवोदियों का जोनल कमांडर रहा है। उसे 2013 के लातेहर मामले में भी मुख्य आरोपी माना जाता है।
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जबकि बाकी छह की पहचान अनुराग के बेटे संतोष यादव, अनुराग के भतीजे भाई योगेश यादव, वाहन चालक मोहम्मद इजाज अहमद, एक संविदा शिक्षक उदय यादव, उदय के चचेरे भाई नीरज यादव और अमलेश यादव के रूप में हुई है।

मरने वालों में एक ड्राइवर तो एक शिक्षक

Jharkhand encounter: Police involved in these tough questions

इसके अलावा मारे गए चार बच्चों में से भी किसी की पहचान नहीं हो पाई है। मारे गए अनुराग, संतोष और योगेश छतरा के माझवा गांव के निवासी थे, जबकि इजाज नजदीक के नीमा गांव का रहने वाला था।

इजाज पिछले तीन चार महीने से मध्यप्रदेश में ड्राइवरी कर रहा था जहां से वह कुछ दिन पहले ही लौटा था और फिलहाल एक इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचने वाले की दुकान पर तीन हजार रुपए महीना पर काम कर रहा था।

जबकि संविदा शिक्षक उदय यादव लातेहर के मनिका में पढ़ाता था। बताया जाता है कि पिछले चार सालों से उदय को माआवोदियों की ओर से धमकियां दी जा रही थीं। अनुराग के बड़े भाई लखन यादव जिनका बेटा योगेश इस मुठभेड़ में मारा गया कहते हैं कि वे पिछले कई सालों से अनुराग के संपर्क में नहीं थे।

हम पिछले चार सालों से उससे नहीं बोलते थे। वो बताते हैं कि योगेश प्रतापपुर में एक मोबाइल शॉप चलाता था। वो संतोष के साथ अपने एक परिचित के यहां गया हुआ था। मुझे कोई अंदाजा नहीं है कि वो आरके के साथ कैसे पहुंच गया।

परिजनों का आरोप पुलिस ने बंद कमरे में मारी गोली

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गांव में खेती करने वाले लखन कहते हैं कि उनके बेटे योगेश को आरके का भतीजा होने की कीमत चुकानी पड़ी। जबकि अनुराग के बेटे संतोष यादव के ससुर सितेश्वर यादव कहते हैं कि संतोष ड्राइविंग का काम करके खुश था और उसका माआवोदियों से कोई संबंध नहीं था।

मैं पिछले सोमवार को ही उससे मिला था, उसने कहा था कि वो शाम तक लौट आएगा। सितेश्वर पूछते हैं कि क्या अनुराग का रिश्तेदार होना कोई अपराध है जिसकी सजा हमारे बच्चों को दी गई। वो आरोप लगाते हैं कि मारे गए सभी 12 लोगों को कमरे में बंद करके गोली मारी गई है।

वो सवाल उठाते हैं कि एक वाहन पर कई बार कैसे हमला किया जा सकता है और वहां खून का कोई निशान न हो। वहीं मारे गए इजाज के ससुर इस्लाम मियां जो एक छोटे से किसान हैं कहते हैं कि इजाज सोमवार को ही घर से गया था।

बोले एसपी मामले की हो रही जांच

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दोपहर बाद ही उसके मालिक के यहां से एनकाउंटर का फोन आ गया। यह मुठभेड़ उस वाहन में हुई जिसमें इजाज बिजली का सामान ले जाता था। वहीं मुठभेड़ में ही जान गंवाने वाले उदय के छोटे भाई हृदय आरोप लगाते हैं कि उनका भाई तो खुद पिछले चार सालों से माआवोदियों की धमकी से जूझ रहा था।

वह मनिका ब्लाक के एक स्कूल में आठ हजार रुपया महीना पर पढ़ाता था। उसने अपनी पत्‍नी को भी इस बारे में कुछ नहीं बताया। वहीं मारे गए अमलेश यादव के खिलाफ भी कोई मुकदमा किसी थाने में दर्ज नहीं था।

वहीं लातेहर के एसपी मयूर पटेल कहते हैं कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हैं, मामले में मानवाधिकार आयोग को भी सारी जानकारी भेज दी गई है।

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