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झारखंड: संविदा पुलिसकर्मियों का फिर रांची में डेरा, धरी रह गई नहीं घुसने देने की योजना

Mon, 27 Sep 2021 11:06 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Mon, 27 Sep 2021 11:06 PM IST
सार

पिछले साल इन संविदा पुलिसकर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर उग्र प्रदर्शन किया था। इस बार फिर आंदोलन की घोषणा की है। सीएम हाउस के घेराव की भी योजना है।
 

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Jharkhand: Contract policemen again entered in Ranchi, even barricading could not stop them
वर्दी-ए-इंसाफ आंदोलन के लिए डटे संविदा पुलिसकर्मी - फोटो : social media

विस्तार

झारखंड की राजधानी रांची में एक बार फिर संविदा पर नियुक्त सहायक पुलिसकर्मियों के उग्र आंदोलन का अंदेशा है। इस बार इन्हें रांची में नहीं घुसने देने की पुलिस की योजना धरी रह गई। ये संविदाकर्मी तय कार्यक्रम के अनुसार सोमवार से मोरहाबादी पहुंचने लगे हैं।

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इन संविदा पुलिसकर्मियों ने अपनी मांगें पूरी नहीं होने के कारण रांची में आंदोलन की घोषणा की है। ये मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निवास सीएम हाउस का भी घेराव करने वाले हैं। इसे ध्यान में रखते हुए 1000 से ज्यादा जवान तैनात किए गए हैं।
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नहीं रोक पाए पुलिस के बंदोबस्त
बहाल किए गए दो हजार से ज्यादा संविदा सहायक पुलिसकर्मियों को फिर रांची में आंदोलन से रोकने के लिए यहां के रास्तों पर बैरिकेडिंग की थी। पुलिस जवान भी तैनात किए थे, लेकिन ये सारे उपाय विफल रहे और रविवार रात से ही इनके रांची पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। राज्य के 12 जिलों के संविदा पुलिसकर्मी स्थायीकरण और वेतनमान देने की मांग पर अड़े हैं। इसे लेकर ये अब रांची में आंदोलन करने पहुंचे हैं। इन सहायक पुलिसकर्मियों ने आंदोलन का नाम 'वर्दी-ए-इंसाफ' रखा है।
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सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
बता दें, झारखंड के पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार, खूंटी सिमडेगा, गिरिडीह, पश्चिमी सिंहभूम, गुमला, लोहरदगा समेत 12 जिलों में 2017 में 2269 संविदा सहायक पुलिसकर्मियों की नियुक्ति हुई थी।  लिखित परीक्षा व फिजिकल-मेडिकल परीक्षण के बाद वे चुने गए थे। तब कहा गया था कि तीन साल बाद जिला पुलिस में उन्हें नियुक्त किया जाएगा, लेकिन राज्य सरकार बदलते ही इनका संविदा अनुबंध रद्द कर दिया गया। पिछले आंदोलन के बाद इन्हें बहाल तो कर दिया गया है लेकिन ये अब स्थाई सेवा व वेतनमान देने की मांग कर रहे हैं।

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