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Jharkhand: हूल दिवस पर आदिवासियों और पुलिस में हिंसक झड़प, बिना अनुमति कार्यक्रम करने पर चलीं लाठियां
Mon, 30 Jun 2025 02:45 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: बशु जैन
Updated Mon, 30 Jun 2025 02:45 PM IST
सार
झारखंड के साहिबगंज जिले में आदिवासी समुदाय के लोग हूल दिवस पर कार्यक्रम कर रहे थे। बताया गया कि पुलिस ने बिना अनुमति कार्यक्रम करने पर आदिवासियों पर लाठी चार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। भाजपा ने मामले को लेकर हेमंत सोरेन सरकार पर हमला बोला है।
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पुलिस (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
झारखंड के साहिबगंज जिले के भोगनाडीह में हूल क्रांति दिवस कार्यक्रम में आदिवासियों और पुलिस में हिंसक झड़प हो गई। इसमें कई लोग घायल हो गए। बिना अनुमति कार्यक्रम कर रहे आदिवासियों को हटाने पर आक्रोश फैल गया। आदिवासियों ने पुलिस पर पथराव किया। पुलिस ने स्थिति को काबू में करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। घटना को लेकर भाजपा ने हेमंत सोरेन सरकार को घेरा है।
भोगनाडीह में सिदो-कान्हू मुर्मू हूल फाउंडेशन ने भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की मुख्य आतिथ्य में आयोजित हूल क्रांति दिवस कार्यक्रम की अनुमति मांगी थी। प्रशासन ने कार्यक्रम की अनुमति देने से इनकार दिया था। सोमवार को कार्यक्रम चल रहा था तो पुलिस ने सिदो-कान्हू मुर्मू हूल फाउंडेशन द्वारा लगाए गए टेंट को हटाने का प्रयास किया। इसके बाद आदिवासियों का गुस्सा भड़क गया। उन्होंने पुलिस पर पथराव किया। फाउंडेशन समर्थकों ने तीर चलाए।
इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का भी इस्तेमाल किया। झड़प में कई ग्रामीण और पुलिसकर्मी घायल हो गए। अधिकारियों के अनुसार तीन पुलिसकर्मियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। साहिबगंज के डिप्टी कमिश्नर हेमंत सती समेत वरिष्ठ अधिकारी स्थिति पर नज़र रखने के लिए मौके पर मौजूद हैं।
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पूर्व सीएम ने सरकार को घेरा
झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता, पूर्व सीएम और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर घटना का वीडियो साझा किया। उन्होंने लिखा कि हूल दिवस पर भोगनाडीह में पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और आंसू गैस के प्रयोग की घटना अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। इस बर्बर कार्रवाई में कई ग्रामीणों के घायल होने की सूचना मिली है। मैंने साहिबगंज एसपी से बात कर पूरी घटना की जानकारी ली है।
ये भी पढ़ें: बंगलूरू में कचरे के ट्रक में मिला महिला का शव; हत्या के आरोप में लिव-इन में रह रहा साथी गिरफ्तार
उन्होंने कहा कि इस बर्बरता ने अंग्रेजी हुकूमत के दौर की यादें ताजा कर दी हैं। हूल क्रांति की भूमि पर छह पीढ़ियों के बाद एक बार फिर सिद्धो-कान्हू के वंशजों को अत्याचार और अन्याय के विरुद्ध सड़क पर उतरना पड़ा है। दरअसल, घुसपैठियों की गोद में बैठी राज्य सरकार नहीं चाहती कि झारखंड का आदिवासी समाज अपने पुरखों की वीरगाथाओं और बलिदानों से प्रेरित होकर अपनी अस्मिता और अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित हो।
ये भी पढ़ें: पहले भी छात्रा को परेशान कर चुके थे आरोपी, पुलिस बोली- कई दिन से दुष्कर्म की रच रहे थे साजिश
उन्होंने कहा कि सरकार की यह साजिश कभी सफल नहीं होगी। जिस तरह वीर सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो ने हूल क्रांति के माध्यम से अंग्रेजी सत्ता की नींव हिला दी थी, उसी तरह साहिबगंज के भोगनाडीह में लाठीचार्ज की दमनकारी घटना हेमंत सरकार के पतन का कारण बनेगी।
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भोगनाडीह में सिदो-कान्हू मुर्मू हूल फाउंडेशन ने भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की मुख्य आतिथ्य में आयोजित हूल क्रांति दिवस कार्यक्रम की अनुमति मांगी थी। प्रशासन ने कार्यक्रम की अनुमति देने से इनकार दिया था। सोमवार को कार्यक्रम चल रहा था तो पुलिस ने सिदो-कान्हू मुर्मू हूल फाउंडेशन द्वारा लगाए गए टेंट को हटाने का प्रयास किया। इसके बाद आदिवासियों का गुस्सा भड़क गया। उन्होंने पुलिस पर पथराव किया। फाउंडेशन समर्थकों ने तीर चलाए।
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इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का भी इस्तेमाल किया। झड़प में कई ग्रामीण और पुलिसकर्मी घायल हो गए। अधिकारियों के अनुसार तीन पुलिसकर्मियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। साहिबगंज के डिप्टी कमिश्नर हेमंत सती समेत वरिष्ठ अधिकारी स्थिति पर नज़र रखने के लिए मौके पर मौजूद हैं।
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पूर्व सीएम ने सरकार को घेरा
झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता, पूर्व सीएम और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर घटना का वीडियो साझा किया। उन्होंने लिखा कि हूल दिवस पर भोगनाडीह में पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और आंसू गैस के प्रयोग की घटना अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। इस बर्बर कार्रवाई में कई ग्रामीणों के घायल होने की सूचना मिली है। मैंने साहिबगंज एसपी से बात कर पूरी घटना की जानकारी ली है।
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उन्होंने कहा कि इस बर्बरता ने अंग्रेजी हुकूमत के दौर की यादें ताजा कर दी हैं। हूल क्रांति की भूमि पर छह पीढ़ियों के बाद एक बार फिर सिद्धो-कान्हू के वंशजों को अत्याचार और अन्याय के विरुद्ध सड़क पर उतरना पड़ा है। दरअसल, घुसपैठियों की गोद में बैठी राज्य सरकार नहीं चाहती कि झारखंड का आदिवासी समाज अपने पुरखों की वीरगाथाओं और बलिदानों से प्रेरित होकर अपनी अस्मिता और अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित हो।
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उन्होंने कहा कि सरकार की यह साजिश कभी सफल नहीं होगी। जिस तरह वीर सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो ने हूल क्रांति के माध्यम से अंग्रेजी सत्ता की नींव हिला दी थी, उसी तरह साहिबगंज के भोगनाडीह में लाठीचार्ज की दमनकारी घटना हेमंत सरकार के पतन का कारण बनेगी।
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