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Jharkhand By-Eection: मांडर उपचुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला, मैदान में 14 उम्मीदवार
Mon, 13 Jun 2022 06:11 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 13 Jun 2022 06:11 PM IST
सार
मांडर उपचुनाव को दो दिन पहले तक दो राष्ट्रीय दलों के बीच सीधी लड़ाई के रूप में देखा जा रहा था, देव कुमार धान के आने से भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच कड़ी टक्कर होने की संभावना है।
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मांदर उपचुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
झारखंड के रांची जिले में मांडर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। इस चुनाव में भाजपा के बागी देव कुमार धान निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर रहे हैं। रविवार को भाजपा ने देव कुमार को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है।
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल (एआईएमआईएम) के कथित समर्थन वाले देव कुमार धान को भगवा पार्टी और झामुमो के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन दोनों के लिए एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और राजद राज्य में सत्तारूढ दल का हिस्सा हैं। मांडर राज्य के 28 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। यहां 23 जून को उपचुनाव होना है। वोटों की गिनती 26 जून को होगी।
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भ्रष्टाचार के एक मामले में दोषी ठहराए जाने के मद्देनजर एक विदायक बंधु तिर्की को अयोग्य करार दिया गया जिसके बाद उनकी सीट पर चुनाव की आवश्यकता थी। कांग्रेस ने उनकी बेटी शिल्पा नेहा तिर्की को झामुमो के नेतृत्व वाले गठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा है जबकि भाजपा ने पूर्व विधायक गंगोत्री कुजूर को इस सीट पर उम्मीदवार बनाया है। कुल 14 प्रत्याशी उम्मीदवार मैदान में हैं।
मांडर उपचुनाव को दो दिन पहले तक दो राष्ट्रीय दलों के बीच सीधी लड़ाई के रूप में देखा जा रहा था, देव कुमार धान के आने से भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच कड़ी टक्कर होने की संभावना है।
2019 में भाजपा ने अपनी मौजूदा विधायक गंगोत्री कुजूर को टिकट देन से इनकार कर दिया था। उनकी जगह मांडर विधानसभा सीट पर देव कुमार धान को मैदान में उतारा था। लेकिन देव कुमार धान जेवीएम-पी के बंधु तिर्की से हार गए, जो बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए थे।
देव कुमार धान ने कहा, वे मुझे टिकट से वंचित कर सकते हैं लेकिन वे मुझे क्षेत्र के लोगों के वोटों से वंचित नहीं कर सकते। मुझे इस उपचुनाव में दोनों राष्ट्रीय दलों के उम्मीदवारों को हराने का भरोसा है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें एआईएमआईएम का समर्थन हासिल है। देव कुमार धान ने कहा, "मेरे समर्थन में एआईएमआईएम उम्मीदवार शिशिर लकड़ा ने अपना नाम वापस ले लिया। 19 जून को एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी मेरे पक्ष में वोट मांगने के लिए मांडर आ रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "निर्वाचन क्षेत्र के 3.54 लाख मतदाताओं में से लगभग 1.75 लाख सरना (आदिवासी) मतदाता, 74,000 हिंदू, 70,000 मुस्लिम और 30,000 ईसाई मतदाता हैं। मुझे उम्मीद है कि बड़ी संख्या में आदिवासी, मुसलमान और हिंदुओं का एक वर्ग मुझे वोट देगा।"
हालांकि भाजपा ने देव कुमार धान को पार्टी के लिए खतरा मानने से इनकार किया और कहा कि लोग अपनी जाति, पंथ और धर्म के बावजूद भाजपा को वोट देंगे क्योंकि राज्य सरकार सभी मोर्चों पर विफल रही है। भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि हम प्रचंड बहुमत से सीट जीतेंगे।
इस बीच, कांग्रेस प्रवक्ता राजीव राजन ने कहा, देव कुमार धान भाजपा के छिपे एजेंडे के तहत चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन यह एजेंडा काम नहीं करेगा। यदि कांग्रेस उपचुनाव जीतती है, तो नवंबर 2019 में हेमंत सोरेन सरकार के सत्ता में आने के बाद सभी उपचुनावों में सत्तारूढ गठबंधन की जीत होगी।
पर्यवेक्षकों ने कहा कि अगर भाजपा चुनाव जीत जाती है तो यह भगवा पार्टी के रुख को मजबूत करेगी कि सोरेन सरकार सभी मोर्चों पर विफल रही है।
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असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल (एआईएमआईएम) के कथित समर्थन वाले देव कुमार धान को भगवा पार्टी और झामुमो के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन दोनों के लिए एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
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झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और राजद राज्य में सत्तारूढ दल का हिस्सा हैं। मांडर राज्य के 28 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। यहां 23 जून को उपचुनाव होना है। वोटों की गिनती 26 जून को होगी।
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भ्रष्टाचार के एक मामले में दोषी ठहराए जाने के मद्देनजर एक विदायक बंधु तिर्की को अयोग्य करार दिया गया जिसके बाद उनकी सीट पर चुनाव की आवश्यकता थी। कांग्रेस ने उनकी बेटी शिल्पा नेहा तिर्की को झामुमो के नेतृत्व वाले गठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा है जबकि भाजपा ने पूर्व विधायक गंगोत्री कुजूर को इस सीट पर उम्मीदवार बनाया है। कुल 14 प्रत्याशी उम्मीदवार मैदान में हैं।
मांडर उपचुनाव को दो दिन पहले तक दो राष्ट्रीय दलों के बीच सीधी लड़ाई के रूप में देखा जा रहा था, देव कुमार धान के आने से भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच कड़ी टक्कर होने की संभावना है।
2019 में भाजपा ने अपनी मौजूदा विधायक गंगोत्री कुजूर को टिकट देन से इनकार कर दिया था। उनकी जगह मांडर विधानसभा सीट पर देव कुमार धान को मैदान में उतारा था। लेकिन देव कुमार धान जेवीएम-पी के बंधु तिर्की से हार गए, जो बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए थे।
देव कुमार धान ने कहा, वे मुझे टिकट से वंचित कर सकते हैं लेकिन वे मुझे क्षेत्र के लोगों के वोटों से वंचित नहीं कर सकते। मुझे इस उपचुनाव में दोनों राष्ट्रीय दलों के उम्मीदवारों को हराने का भरोसा है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें एआईएमआईएम का समर्थन हासिल है। देव कुमार धान ने कहा, "मेरे समर्थन में एआईएमआईएम उम्मीदवार शिशिर लकड़ा ने अपना नाम वापस ले लिया। 19 जून को एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी मेरे पक्ष में वोट मांगने के लिए मांडर आ रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "निर्वाचन क्षेत्र के 3.54 लाख मतदाताओं में से लगभग 1.75 लाख सरना (आदिवासी) मतदाता, 74,000 हिंदू, 70,000 मुस्लिम और 30,000 ईसाई मतदाता हैं। मुझे उम्मीद है कि बड़ी संख्या में आदिवासी, मुसलमान और हिंदुओं का एक वर्ग मुझे वोट देगा।"
हालांकि भाजपा ने देव कुमार धान को पार्टी के लिए खतरा मानने से इनकार किया और कहा कि लोग अपनी जाति, पंथ और धर्म के बावजूद भाजपा को वोट देंगे क्योंकि राज्य सरकार सभी मोर्चों पर विफल रही है। भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि हम प्रचंड बहुमत से सीट जीतेंगे।
इस बीच, कांग्रेस प्रवक्ता राजीव राजन ने कहा, देव कुमार धान भाजपा के छिपे एजेंडे के तहत चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन यह एजेंडा काम नहीं करेगा। यदि कांग्रेस उपचुनाव जीतती है, तो नवंबर 2019 में हेमंत सोरेन सरकार के सत्ता में आने के बाद सभी उपचुनावों में सत्तारूढ गठबंधन की जीत होगी।
पर्यवेक्षकों ने कहा कि अगर भाजपा चुनाव जीत जाती है तो यह भगवा पार्टी के रुख को मजबूत करेगी कि सोरेन सरकार सभी मोर्चों पर विफल रही है।