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झारखंड का रोटी बैंक, पढ़कर आप भी करेंगे इस पर नाज

Fri, 16 Oct 2015 04:28 PM IST
Updated Fri, 16 Oct 2015 04:28 PM IST
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jharkhand: A bank who provide roti to needed people

झारखंड के हजारीबाग में अनूठा बैंक खुला है, यहां से उधार लेने पर लौटाने की बाध्यता नहीं। जमा करने पर ब्याज भी नहीं मिलता। नाम है, रोटी बैंक। बैंक चला रहे हैं तापस चक्रवर्ती और मोहमम्द खालिद।

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उद्देश्य है भूखे लोगों को रोटी खिलाना। इनका टर्नओवर रोज़ के हिसाब से करीब 3,000 रोटियों का है। हजारीबाग ही नहीं पूरे झारखंड में इस अनूठे बैंक की चर्चा है। दूसरे शहरों को लोग भी इस तरह के बैंक को खोलने पर विचार कर रहे हैं।
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मोहम्मद खालिद के अनुसार सितंबर के पहले पखवाड़े में इस बैंक को शुरु किया गया, जिसमें 14 लोग शामिल हैं। यहां जमा रोटियों के तीन हिस्से किए जाते हैं। इनमें से एक हिस्सा बिरहोर आदिवासियों की बस्ती डेमोटांड भेजा जाता है, इस बस्ती में करीब 100 लोग रहते हैं।

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आर्ट ऑफ गिविंग

jharkhand: A bank who provide roti to needed people

रोटियों का दूसरा हिस्सा चौक-चौराहों पर घूमने वाले विक्षिप्तों मे बांटा जाता है। अंतिम हिस्सा गरीब मरीजों के तीमारदारों के लिए है। पिछले एक महीने से इस बैंक में न तो रोटी देने वाले घटे और न ही मांगने वाले। झारखंड में सामूहिकता का यह सशक्त उदाहरण बना है।

हुरहुरु के ईस्ट प्वाइंट स्कूल और हज़ारीबाग़ स्थित सेंट जेवियर्स स्कूल के बच्चे रोटियों के मुख्य कंट्रीब्यूटर हैं। ईस्ट प्वाइंट स्कूल की आशा कुमारी ने बताया कि वे टिफ़िन में भूख से अधिक रोटियां लाती हैं। असेंबली के वक्त सभी बच्चों की रोटियां एक बड़ी टोकरी में जमा की जाती हैं। वहां से इन्हें रोटी बैंक भेज दिया जाता है।

स्कूल की शिक्षक रेशमा रॉबर्ट ने बताया कि यह आर्ट आफ गिविंग है, बच्चों में इससे दान देने की प्रवृति बनने लगी है।

अपील करता है नाम

jharkhand: A bank who provide roti to needed people

रोटी बैंक की टैग लाइन है- कोई भूखा नहीं रहे। ख़ालिद ने बताया कि शहर के चार स्कूलों के बच्चे इसमें मदद कर रहे हैं। सप्ताह में एक स्कूल के बच्चों को एक बार ही रोटियां लानी पड़ती हैं, सब्जी का प्रबंध भी एक व्यवसायी कर देते हैं।

वह कहते हैं, "बच्चों के अलावा भी कई ऐसे लोग हैं, जो रोटियां दान करना चाहते हैं। लेकिन हमने उन्हें मना किया है क्योंकि हमारा काम चल जा रहा है। हम बनी रोटियां लेते हैं। ज्यादा लेने पर इनके ख़राब होने का खतरा रहेगा।"

रोटी बैंक के दूसरे संचालक तापस चक्रवर्ती कहते हैं कि लोग बैंक में अपनी गाढ़ी कमाई रखते हैं। "सारी कमाई रोटी के लिए है, लिहाजा, रोटियों को जमा करने के लिए हमने रोटी बैंक नाम रख दिया। यह अपील करता है।"

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