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झारखंड: खनन पट्टा मामले में फंसे सीएम सोरेन, चुनाव आयोग से मांगा चार हफ्ते का वक्त
Tue, 10 May 2022 09:00 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 10 May 2022 09:00 PM IST
सार
अगर आरोप साबित हो जाते हैं, तो हेमंत सोरेन को राज्य विधानसभा के सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
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सीएम हेमंत सोरेन
- फोटो : social media
विस्तार
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने अपने पक्ष में खनन पट्टा जारी करने के आरोपों पर चुनाव आयोग के नोटिस का जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा है। चुनाव आयोग ने 2 मई को सोरेन को नोटिस जारी कर 10 मई तक इसका जवाब देने को कहा था। सोरेन ने कहा, मैंने चुनाव आयोग से अपने नोटिस का विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के लिए कम से कम चार सप्ताह का समय मांगा है।
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सोरेन ने बताया कि नोटिस के साथ मुझे करीब 600 पन्नों के दस्तावेज दिए गए हैं, जिनमें से लगभग सभी हिंदी में हैं और मुझे अपने कानूनी वकील द्वारा उचित सलाह और समझ के लिए हिंदी से अंग्रेजी में उनके अनुवाद की व्यवस्था करनी है। चुनाव आयोग को इस मुद्दे पर राज्य के राज्यपाल का प्रतिनिधित्व मिला था। अगर आरोप साबित हो जाते हैं, तो हेमंत सोरेन को राज्य विधानसभा के सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
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सोरेन ने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग से अनुरोध किया था कि आयोग द्वारा मेरे कानूनी वकील के माध्यम से व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया जाएताकि वह संविधान के अनुच्छेद 192 (2) के तहत झारखंड के राज्यपाल के समक्ष इसे प्रस्तुत करने के लिए अपनी राय तैयार करे। चुनाव आयोग को झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस से मुख्यमंत्री द्वारा पद के दुरुपयोग के मुद्दे पर एक प्रतिनिधित्व मिला है और वह उन्हें अपनी राय भेजेगा। यदि आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो सोरेन राज्य विधानसभा के सदस्य के रूप में अयोग्य हो सकते हैं।
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सोरेन ने आयोग को लिखे पत्र में कहा, मैं जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 9ए के तहत मई 2021 में मेरे द्वारा प्राप्त खनन पट्टे के आधार पर झारखंड विधानसभा के सदस्य के रूप में मेरी कथित अयोग्यता के बारे में भाजपा के सभी आरोपों का खंडन करता हूं। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 9ए विधायक की अयोग्यता से संबंधित है। सोरेन ने चुनाव आयोग को लिखे पत्र में कहा कि उनकी 67 वर्षीय मां करीब आठ महीने से गंभीर रूप से बीमार हैं और उन्हें बेहतर इलाज के लिए 28 अप्रैल, 2022 को रांची से हैदराबाद ले जाया गया था। उन्होंने कहा कि 30 अप्रैल को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भारत के मुख्यमंत्रियों और मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन में भाग लेने के अलावा, वह हैदराबाद में होने के कारण एक उपयुक्त कानूनी वकील को नियुक्त नहीं कर सके।