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Jharkhand: डॉक्टरों के विरोध-प्रदर्शन से झारखंड में स्वास्थ्य सेवाएं ठप, रिम्स में ओपीडी पूरे दिन रही बंद

Wed, 01 Mar 2023 04:41 PM IST
Jeet Kumar पीटीआई, रांची/ धनवाद
पीटीआई, रांची/ धनवाद Published by: Jeet Kumar Updated Wed, 01 Mar 2023 04:41 PM IST
सार

सोमवार को अज्ञात बदमाशों ने रांची के प्रख्यात आर्थोपेडिक सर्जन आंचल कुमार के आवास पर हमला किया था, जिसके विरोध में बड़ी संख्या में डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन किया। 

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health services in private and government hospitals across Jharkhand was paralysed after doctors protest
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

झारखंड में निजी और सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों ने बुधवार को काम का बहिष्कार कर दिया जिसके बाद प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गईं। बड़ी संख्या में पंजीकृत डॉक्टरों ने राज्य में डॉक्टरों पर बार-बार हो रहे हमलों के विरोध में विरोध प्रदर्शन किया। हालांकि आपातकालीन सेवाओं को विरोध के दायरे से बाहर रखा गया है।

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डॉक्टरों की सरकार ने मांग...
झारखंड हेल्थ सर्विस एसोसिएशन और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से बहिष्कार का आह्वान किया है और एसोसिएशनों ने मांग की है कि राज्य में मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए और डॉक्टरों की अधिक सुरक्षा के लिए क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में जल्द से जल्द संशोधन किया जाए। 
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डॉक्टर पर हमले के बाद शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन
सोमवार को अज्ञात बदमाशों ने रांची के प्रख्यात आर्थोपेडिक सर्जन आंचल कुमार के आवास पर हमला किया था, जिसके विरोध में बड़ी संख्या में डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन किया। डॉक्टरों के विरोध करने से रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स) के सदर अस्पताल और आउट पेशेंट विभाग (ओपीडी) में दिन में सन्नाटा पसरा रहा।
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रांची के सदर अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सक अजीत कुमार ने कहा कि चिकित्सक ड्यूटी पर थे, लेकिन अस्पताल में ओपीडी, लैब और अल्ट्रासाउंड सेवाएं प्रभावित रहीं। हालांकि, सभी प्रकार की आपातकालीन सेवाएं अप्रभावित रहीं। वहीं रिपोर्ट के मुताबिक ओपीडी पूरे दिन बंद रही। हालांकि, अजीत कुमार ने दावा किया कि डॉक्टरों ने इनडोर और आपातकालीन ड्यूटी में भाग लिया ताकि किसी मरीज को परेशानी न हो।

जमशेदपुर में, महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज अस्पताल के शिक्षकों, सदर अस्पताल के डॉक्टरों और चिकित्सा अधिकारियों, निजी क्लीनिकों और नर्सिंग होम के डॉक्टरों ने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए उपायुक्त कार्यालय तक रैली निकाली। धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टरों ने ओपीडी ड्यूटी का बहिष्कार किया लेकिन इमरजेंसी विभाग में मरीजों को देखा।

डॉक्टरों को सुरक्षा प्रदान करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी
आईएमए के राज्य समन्वयक अजय कुमार सिंह ने दावा किया कि राज्य के छह मेडिकल कॉलेजों सहित निजी क्लीनिकों, नर्सिंग होम, सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों के लगभग 14,000 पंजीकृत डॉक्टरों ने बुधवार को विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया और काम का बहिष्कार किया। जेएचएसए के सचिव ठाकुर मृत्युंजय कुमार सिंह ने कहा कि डॉक्टरों को सुरक्षा प्रदान करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। विडंबना यह है कि न तो राज्यपाल और न ही किसी स्वास्थ्य अधिकारी ने इस मुद्दे पर डॉक्टरों के निकायों से संपर्क किया।


उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड के गढ़वा, हजारीबाग, लोहरदगा और रांची जैसे विभिन्न जिलों में पिछले दो महीनों में सात डॉक्टरों के साथ मारपीट या अपमान किया गया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। झारखंड के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री भानु प्रताप साही ने दिन के दौरान विधानसभा में डॉक्टरों के विरोध का मामला उठाया और कहा कि सरकार को उनके मुद्दों को हल करने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए।

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