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झारखंड के पूर्व मंत्री बंधु तिर्की और देव कुमार धान सबूतों के अभाव में 15 साल बाद बरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Updated Sat, 24 Feb 2018 07:35 PM IST
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झारखंड के भूतपूर्व मंत्री बंधु तिर्की और देव कुमार धान को बंद और प्रदर्शन से जुड़े केस में बरी कर दिया गया है। साल 2002 में बाबूलाल मरांडी की सरकार की स्थानी निवास (डोमिसाइल) नीति के खिलाफ प्रदर्शन और बंद से जुड़े मामले में दोनों को बरी किया गया है।
यह मामला 2002 में हटिया पुलिस थाना क्षेत्र में हुए प्रदर्शन को लेकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ था। आदिवासी छात्र संघ और झारखंड जनाधिकार मंच ने इस मामले में बंद का आह्वान किया था। पुलिस ने बंद बुलाने के सिलसिले में आईपीसी की विभिन्न धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया था।
बचाव पक्ष के वकील जितेंद्र कुमार ने कहा, '15 साल चले मुकदमे के बाद सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया गया है। अभियोजन पक्ष की तरफ से सिर्फ एक चश्मदीद को पेश किया गया था।'
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एडिशनल ज्यूडिशियल कमिश्नर (एजेसी) तौफिकुल हसन ने तिर्की और धान को केस नंबर 143/2002 में सबूतों के अभाव की वजह से बरी कर दिया। इस केस में दर्जन भर लोग नामजद आरोपी और करीब 500 अज्ञात लोगों पर आरोप लगाया गया था। इन सभी लोगों पर डोमिसाइल नीति के विरोध में उपद्रव फैलाकर शांति भंग करने के आरोप थे। एजेसी की अदालत ने पूर्व मंत्रियों को आरोपों से मुक्त कर बरी कर दिया।
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यह मामला 2002 में हटिया पुलिस थाना क्षेत्र में हुए प्रदर्शन को लेकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ था। आदिवासी छात्र संघ और झारखंड जनाधिकार मंच ने इस मामले में बंद का आह्वान किया था। पुलिस ने बंद बुलाने के सिलसिले में आईपीसी की विभिन्न धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया था।
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बचाव पक्ष के वकील जितेंद्र कुमार ने कहा, '15 साल चले मुकदमे के बाद सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया गया है। अभियोजन पक्ष की तरफ से सिर्फ एक चश्मदीद को पेश किया गया था।'
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एडिशनल ज्यूडिशियल कमिश्नर (एजेसी) तौफिकुल हसन ने तिर्की और धान को केस नंबर 143/2002 में सबूतों के अभाव की वजह से बरी कर दिया। इस केस में दर्जन भर लोग नामजद आरोपी और करीब 500 अज्ञात लोगों पर आरोप लगाया गया था। इन सभी लोगों पर डोमिसाइल नीति के विरोध में उपद्रव फैलाकर शांति भंग करने के आरोप थे। एजेसी की अदालत ने पूर्व मंत्रियों को आरोपों से मुक्त कर बरी कर दिया।