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चारा घोटाला: लालू यादव को साढ़े तीन साल की सजा और 10 लाख का जुर्माना
एजेंसी, रांची
Updated Sat, 06 Jan 2018 07:04 PM IST
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आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव
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राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को बहुचर्चित चारा घोटाले में 21 साल पहले देवघर ट्रेजरी से 89.27 लाख रुपये की अवैध निकासी के मामले में शनिवार को साढ़े तीन साल की सजा सुनाई गई है। उन पर दस लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यहां बिरसा मुंडा जेल में बंद लालू को सजा का ऐलान वीडियो कांफ्रेंस के जरिए किया गया। चार साल में यह दूसरी बार है जब उन्हें चारा घोटाले में सजा हुई है।
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रांची की विशेष सीबीआई अदालत ने उन्हें आईपीसी के तहत धोखाधड़ी एवं आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण कानून के दो मामलों में 23 दिसंबर को दोषी ठहराया था। इन दोनों मामलों में उन्हें साढ़े तीन-तीन साल की सजा सुनाई गई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इन दोनों मामलों में उन पर पांच-पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं भरने पर और छह महीने की सजा काटनी होगी। मालूम हो कि 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले में चाईबासा ट्रेजरी से 37.5 करोड़ रुपये की अवैध निकासी में लालू को 30 सितंबर, 2013 को पांच साल की सजा सुनाई गई थी। लगभग ढाई महीने जेल में रहने के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी।
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विशेष अदालत ने शुक्रवार को लालू समेत 11 दोषियों की सजा पर दोनों पक्षों की दलील सुनी थी, जबकि बाकी पांच दोषियों की सजा को लेकर शनिवार को बहस पूरी हुई। उसके बाद सभी को सजा सुनाई गई। इस मामले में बिहार के पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र समेत छह लोगों को कोर्ट ने 23 दिसंबर को बरी कर दिया था। इस बीच, पटना में लालू के बेटे तेजस्वी प्रसाद ने कहा कि फैसले का अध्ययन करने के बाद सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की जाएगी और जमानत की भी अर्जी दाखिल की जाएगी।
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लालू पर आरोप
चारा घोटाले की जांच के लिए उनके पास भेजी गई फाइल को पद का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने 5 जुलाई 1994 से 1 फरवरी 1996 तक अपने पास रोके रखा और जब यह घोटाला उजागर हो गया तो 2 फरवरी को जांच का आदेश दिया।
इन्हें भी हुई साढ़े तीन-तीन साल की सजा
पूर्व सांसद आरके राणा, पूर्व आईएएस अधिकारी बेक जुलियस, महेश प्रसाद और फूलचंद सिंह, राज्य सरकार के अधिकारी कृष्ण कुमार और सुबीर भट्टाचार्य एवं सप्लायर/ट्रांसपोर्टर सुशील कुमार सिन्हा, सुनील कुमार सिन्हा, राजाराम जोशी
इन्हें मिली सात साल की सजा
पूर्व सांसद जगदीश शर्मा, सप्लायर/ट्रांसपोर्टर त्रिपुरारी मोहन प्रसाद, सुनील गांधी, गोपीनाथ दास, संजय अग्रवाल और ज्याति कुमार झा
भाजपा के आगे नहीं झुकूंगा
सजा के ऐलान के बाद लालू ने ट्विट किया, ‘सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष में जान दे दूंगा लेकिन भाजपा के आगे नहीं झुकूंगा।’
तेजस्वी के बोल
लालू को झूठे केस में फंसाया गया है। उन्हें भाजपा परेशान कर रही है, लेकिन हम उसकी साजिश से डरने और झुकने वाले नहीं हैं। हमें कोर्ट पर पूरा भरोसा है।
जानें क्या है 'चारा घोटाला' जिसमें फंसे लालू
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यह मामला (आरसी64ए/96) देवघर ट्रेजरी से 1990 से 1994 के बीच 89.27 लाख रुपये की अवैध निकासी से संबंधित है। इस मामले में शुरू में सीबीआई ने 38 लोगों को आरोपी बनाया था। इसमें 11 की मौत हो चुकी है। तीन आरोपी सरकारी गवाह बन गए, जबकि दो ने फैसले से पहले ही अपना गुनाह स्वीकार कर लिया। इस मामले में लालू प्रसाद के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा समेत 22 अन्य लोग भी आरोपी थे।
अभी चार केस लंबित
लालू पर झारखंड में दुमका ट्रेजरी से 3.97 करोड़, चाईबासा ट्रेजरी से 36 करोड़, डोरंडा ट्रेजरी से 184 करोड़ रुपये और बिहार में भागलपुर ट्रेजरी से 45 लाख रुपये की अवैध निकासी के मामले लंबित हैं।
डिप्टी कमिश्नर ने उठाया था पर्दा
पश्चिमी सिंहभूम जिले के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर अमित खरे ने 27 जनवरी, 1996 को चाईबासा में पशुपालन विभाग में छापा मारकर इस मामले का खुलासा किया था। कोलकाता में एशियन एज अखबार के प्रतिनिधि रवि एस झा ने चारा घोटाले की खबर सबसे पहले ब्रेक की थी और इसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री के शामिल होने की ओर इशारा किया था।
500 से ज्यादा दोषियों को मिल चुकी है सजा
चारा घोटाले के 53 में से 44 मामलों में सुनवाई पूरी हो चुकी है। अब तक 500 से ज्यादा आरोपियों को दोषी करार दिया जा चुका है और उन्हें विभिन्न अदालतों द्वारा सजा भी सुनाई जा चुकी है।
अभी चार केस लंबित
लालू पर झारखंड में दुमका ट्रेजरी से 3.97 करोड़, चाईबासा ट्रेजरी से 36 करोड़, डोरंडा ट्रेजरी से 184 करोड़ रुपये और बिहार में भागलपुर ट्रेजरी से 45 लाख रुपये की अवैध निकासी के मामले लंबित हैं।
डिप्टी कमिश्नर ने उठाया था पर्दा
पश्चिमी सिंहभूम जिले के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर अमित खरे ने 27 जनवरी, 1996 को चाईबासा में पशुपालन विभाग में छापा मारकर इस मामले का खुलासा किया था। कोलकाता में एशियन एज अखबार के प्रतिनिधि रवि एस झा ने चारा घोटाले की खबर सबसे पहले ब्रेक की थी और इसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री के शामिल होने की ओर इशारा किया था।
500 से ज्यादा दोषियों को मिल चुकी है सजा
चारा घोटाले के 53 में से 44 मामलों में सुनवाई पूरी हो चुकी है। अब तक 500 से ज्यादा आरोपियों को दोषी करार दिया जा चुका है और उन्हें विभिन्न अदालतों द्वारा सजा भी सुनाई जा चुकी है।
'चारा घोटाला' से जुड़े प्रमुख बिंदु-
लालू प्रसाद यादव
- मामले में पशुपालन विभाग के दफ्तरों से चारा आपूर्ति के नाम पर धन की हेराफेरी की गई।
- घोटाले से जड़े 53 मामलों में से 44 पर स्पेशल कोर्ट अपना फैसला दे चुकी है
- सीबीआई ने 5 अप्रैल 2000 को सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए।
- दिसंबर 2000 तक 47 गवाहों के बयान दर्ज हुए।
- 11 मार्च, 1996 को पटना उच्च न्यायालय ने सीबीआई को इस घोटाले की जांच का आदेश दिया।
- 23 जून, 1997 को सीबीआई ने आरोप पत्र दायर किया और लालू प्रसाद को आरोपी बनाया।
- मामले में 30 जुलाई, 1997 को लालू प्रसाद ने सीबीआई अदालत में आत्मसमर्पण किया।
- फरवरी, 2002 को रांची की विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई शुरू हुई।
- 2 जनवरी 2012 तक प्रॉसीक्यूशन की ओर से 350 गवाह पेश हुए।
- लालू प्रसाद इस मामले से जुड़े जज को बदलने की मांग को लेकर हाई कोर्ट भी जा चुके हैं।
- कोर्ट जज को बदलने की लालू यादव की अर्जी ठुकरा भी चुका है।
- मामले में 30 सितंबर 2013 को लालू प्रसाद को 5 मामलों का दोषी पाया गया, जिसके लिए उन पर 11 साल तक कोई चुनाव लड़ने पर प्रतिबन्ध और साथ ही 25 लाख का जुर्माना लगाया।