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Planting: सीएम सोरेन का एलान, एक पेड़ लगाने और उसकी सुरक्षा के लिए पांच यूनिट बिजली मुफ्त
Fri, 22 Jul 2022 07:17 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 22 Jul 2022 07:17 PM IST
सार
भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई) के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि पिछले एक दशक में राज्य में वृक्षों के आवरण में 47 वर्ग किमी की गिरावट आई है।
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हेमंत सोरेन
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को घोषणा की कि सरकार एक व्यक्तिगत परिसर में एक पेड़ लगाने और उसकी सुरक्षा के लिए पांच यूनिट मुफ्त बिजली देगी। प्रस्ताव का उद्देश्य राज्य के शहरी क्षेत्रों में हरित क्षेत्र में सुधार करना और वृक्षारोपण मिशन में प्रत्येक व्यक्ति को शामिल करना है। वन महोत्सव कार्यक्रम में बोलते हुए सोरेन ने कहा कि शहरी क्षेत्रों के कंक्रीटीकरण को ध्यान में रखते हुए सरकार व्यक्तिगत परिसर में पेड़ लगाने और संरक्षित करने के लिए पांच यूनिट मुफ्त बिजली देगी। हालांकि यह ऑफर किसी प्लांट पर लागू नहीं होगा। यह एक पेड़ होना चाहिए, जो भविष्य में प्रकृति के संरक्षण में मदद करेगा।
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झारखंड में वृक्षों का आवरण घट रहा है। भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई) के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि पिछले एक दशक में राज्य में वृक्षों के आवरण में 47 वर्ग किमी की गिरावट आई है। ट्री कवर को छोटे पेड़ के पैच और रिकॉर्ड किए गए वन क्षेत्रों के बाहर अलग-अलग पेड़ों के रूप में परिभाषित किया गया है, जो कि एक हेक्टेयर से कम है। ये पेड़ आम तौर पर शहरी क्षेत्रों, गांव के जंगल, घरों, सड़क के किनारे, नहर के किनारे, रेलवे लाइनों के पास और बिखरे हुए पेड़ों के रूप में पाए जाते हैं। एफएसआई रिपोर्ट 2021 के अनुसार, झारखंड का वृक्ष आवरण 2,867 वर्ग किमी, कुल भौगोलिक क्षेत्र का 3.6% दर्ज किया गया था। 2011 में यह 2,914 वर्ग किमी दर्ज किया गया था।
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हालांकि, राज्य का वन क्षेत्र बढ़कर 23,721 वर्ग किमी हो गया है, जो कि एफएसआई 2021 में राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 29.76% है और एफएसआई 2011 में दर्ज 22,977 वर्ग किमी से अधिक है। बढ़ता शहरीकरण पर्यावरण के लिए एक बड़ा खतरा है क्योंकि यह शहरों से हरियाली गायब हो रही है। सोरेन ने कहा, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि झारखंड तुलनात्मक रूप से कोविड-19 महामारी से सुरक्षित रहा, जो केवल इसलिए संभव था क्योंकि राज्य में हरियाली है। विकास की होड़ है, लेकिन यह प्रकृति की कीमत पर नहीं होना चाहिए। मैं विकास के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन प्रकृति को नष्ट करने के खिलाफ हूं।
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