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झारखंड के इस इंजीनियर ने बनाया ऐसा झूला, झूलने से भरती है पानी की टंकी और घर में आती है बिजली
Thu, 03 Sep 2020 04:29 PM IST
Rajeev Rai
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुरकुंडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुरकुंडा
Published by: Rajeev Rai
Updated Thu, 03 Sep 2020 04:29 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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देश में इस वक्त मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की चर्चा जोरों पर है। इस दिशा में लगातार स्वदेशी चीजों के इस्तेमाल और देश में ही अविष्कार करने पर जोर दिया जा रहा है। ये सिर्फ चर्चाओं में ही नहीं है, बल्कि अपने देश में रोजाना इस दिशा में काम होते रहते हैं। फिलहाल ऐसा ही एक स्वदेशी अविष्कार झारखंड में हुआ है। यहां के एक इंजीनियर ने एक ऐसे झूले का निर्माण किया है, जिसपर झूलने से पानी की टंकी भर जाती है, इतना ही नहीं हजारों वॉट के बिजली उत्पादन से घर की बत्तियां भी जलने लगती हैं।
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इस अनोखे अविष्कार के पीछे दिमाग लगा है झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू के इंजीनियर एसएन सिंह का। एसएन सिंह ने एक ऐसा झूला बनाया है जो बिजली-मोटर के बगैर ही छत पर रखी पानी की टंकी को भर देता है। इतना ही नहीं, इसकी मदद से घर पर लगे बल्ब और पंखे भी चलने लगते हैं। इस झूले का पिछले एक वर्ष से सफल प्रयोग भी चल रहा है।
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आरएसएस के उत्तर-पूर्व संचालक सिद्धिनाथ सिंह ने धनबाद स्थित बीआईटी सिंदरी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की है और अभी आईटीआई कल्पतरु के संचालक हैं। सिंह ने इस अविष्कार के लिए चापानल से पानी निकलने की विधि का अध्ययन किया। इसके बाद दो पिस्टनों की मदद से एक झूला बनाया। झूला झूलने से एक पिस्टन ऊपर जाता है और दूसरा नीचे। दोनों पिस्टन का आउटपुट एक ही जगह है। इससे चापानल वाली विधि से लगातार धारा प्रवाह पानी निकलता रहता है। यहां पानी सात-आठ मंजिला आवास में करीब 60 फीट की ऊंचाई तक बगैर बिजली-मोटर के चढ़ जाता है।
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इंजीनियर सिंह बताते हैं कि इस झूले का उद्देश्य खेल-खेल में पानी का उपयोग करना है। उनकी कहना है कि सभी विद्यालयों, कॉलेजों व हॉस्टलों में इस झूले के प्रयोग से वहां हो रहे जल की बर्बादी को रोका जा सकता है। वे कहते हैं कि इस झूले में डाइनेमो या टरबाइन को लगातार गति ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलकर बल्ब जलाया जाता है। साथ ही पंखा भी चलाया जाता है। इसके अलावा झूले को उठाकर आसानी से किसी खेत में रखा जा सकता है।
सिंह का दावा है कि इस विशेष झूले से 1 किलोवाट ( 1000 वाट) बिजली पैदा की जा सकती है। इससे दर्जनों बल्ब व पंखे चलाए जा सकते हैं। सिंह इसे गांवों में बिजली पानी की समस्या के समाधान के रूप में देखते हैं। उन्होंने ऊंचाई पर मौजूद खेत में पानी पहुंचाने के उद्देश्य से भी इस तकनीक की खोज की।