शहीद की पत्नी से अधिकारी ने कहा- साबित करो ड्यूटी के दौरान हुई है पति की मौत, तभी मिलेगी नौकरी
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जब भी कोई जवान देश के लिए कुर्बानी देते हुए शहीद हो जाता है तो सरकार उसके परिवार को मदद करने के ना जाने कितने वादे करती है। लेकिन क्या शहीद के परिवार के लिए वह मदद पाना वाकई इतना आसान होता है? झारखंड के गिरिडीह से ऐसा ही एक मामला सामने आया है जिससे सरकारी अफसरों के शहीद के परिवार के प्रति रवैया का पता चलता है।
मामला शुक्रवार का है जब बीएसएफ के शहीद जवान की पत्नी रश्मि उपाध्याय नौकरी मांगने के लिए डिप्टी कमिश्नर के ऑफिस पहुंची। रश्मि के पति सीताराम उपाध्याय की ड्यूटी के दौरान मौत हो गई थी। डिप्टी कमिश्नर (डीसी) ने रश्मी से कहा कि यदि वह जिला प्रशासन से नौकरी और अन्य लाभ चाहती है तो वह ये साबित करे कि उसके पति की मौत ड्यूटी के दौरान सीमा पर हुई थी।
उन्होंने कहा कि रश्मि को बीएसएफ का प्रमाणपत्र भी दिखाना होगा जिसमें लिखा हो कि उसके पति की मौत 18 मई को ड्यूटी के दौरान जम्मू कश्मीर में हुई थी। बता दें कि जब पालगढ़ के सीताराम के शहीद होने की खबर आई थी तो ना केवल गिरिडीह बल्कि पूरे राज्य से लोग उसे श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। सीताराम की आखिरी यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया था।
शहीद की पत्नी का डीसी को पत्र
रश्मि ने डीसी को लिखे पत्र में कहा है कि उसके पति सीताराम उपाध्याय (कॉन्सटेबल नंबर 113767342) जम्मू कश्मीर बॉर्डर पर शहीद हुए थे। उसने लिखा कि पति की मौत के बाद वह खुद को असहाय, असुरक्षित और आर्थिक रूप से कमजोर महसूस कर रही है।
उसने लिखा कि उसके दो छोटे बच्चे हैं, साथ ही उसके ऊपर उसके माता-पिता और ससुराल वालों की जिम्मेदारी भी आ गई है। उसने लिखा कि नियमों के मुताबिक उसे नौकरी और परिवार के लिए अन्य लाभ मिलने चाहिए। जिसके बाद डीसी ने कहा कि प्रावधान के मुताबिक उन्हें 2 लाख रुपये की सहायता राशि मिलेगी जबकि रश्मि का दावा है कि उन्हें 10 लाख रुपये देने की बात कही गई थी।
अभी तक नहीं मिले कपड़े और प्रमाणपत्र
शहीद सीताराम के बड़े भाई सोनू उपाध्याय का कहना है कि उन्हें बीएसएफ और सरकार की तरफ अभी तक कोई आर्थिक सहायता प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि उन्हें उनके शहीद भाई के कपड़े, वर्दी और मोबाइल फोन भी नहीं मिले हैं।
उन्होंने कहा कि एक बीएसएफ का अधिकारी उनके घर आये थे और उन्हें एक फोन नंबर देकर चले गए। करीब 5 दिन पहले उन्होंने उस नंबर पर फोन किया था। उन्हें फोन पर बताया गया कि सीताराम के कपड़े, वर्दी, यूनिफॉर्म और बाकी चीजें 8-10 दिनों के भीतर उनके घर पहुंचा दी जाएंगी। इसके बाद बीएसएफ अफसर ने कहा कि नौकरी के मामले में बीएसएफ के कमांडिंग अफसर गिरिडीह के डीसी से बातचीत करेंगे।
प्रमाणपत्र दिखाना आवश्यक
डीसी मनोज कुमार का कहना है कि नियमों के मुताबिक रश्मि को बीएसएफ का प्रमाण पत्र दिखाना होगा जिसमें यह लिखा हो कि उसके पति की मौत ड्यूटी के दौरान हुई थी। उन्होंने कहा कि सीताराम के परिवार को 2 लाख रुपये की सहायता राशि का प्रावधान है लेकिन उनकी पत्नी का दावा है कि सरकार द्वारा उन्हें 10 लाख रुपये देने की घोषणा की गई थी।
उन्होंने कहा कि सहायता राशि के लिए एक समाचारपत्र की कटिंग के साथ आवेदन सरकार को भेज दिया गया है। उन्होंने कहा सभी प्रासंगिक दस्तावेज और प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद ही वह उन्हें तीन या चार श्रेणी के कर्मचारी की नौकरी दे सकते हैं।