एक एसएमएस, जिसने बचाई 107 लोगों की जान
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कई बार छोटी सी समझदारी बड़ी-बड़ी मुश्किलों को हल आसानी से ढूंढ निकालती है। रांची के दुर्गा स्वांसी की एक ऐसी ही समझदारी उसके और उसके 107 साथियों के लिए वरदान बन गई।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार रांची निवासी दुर्गा स्वांसी ने बताया कि कैसे उन लोगों से बंगलुरू की बालाजी अगरबत्ती फैक्ट्री में जानवरों की तहर काम कराया जाता था। 20 साल के दुर्गा ने जो कहानी बताई उसे सुनकर अच्छे-अच्छों के होश फाख्ता हो सकते हैं।
रांची निवासी दुर्गा ने बताया कि इंटर की पढ़ाई पास करने के बाद घर की खस्ता हालत और गरीबी के कारण उसे रोजगार की तलाश थी। उसके दोस्तों ने उसे कोई नौकरी करने की सलाह दी। दोस्तों ने दुर्गा को एक एजेंट से मिलवाया जिसने उसे बंगलुरू में एक फैक्ट्री के बारे में बताया।
बालाजी अगरबत्ती फैक्ट्री में लिया जाता था मजदूरों की तरह काम
उसने वादा किया कि उसे वहां काम करने पर 7 हजार रुपए तनख्वाह के अलावा भोजन, कपड़े और रहने की व्यवस्था मिलेगी। दिनभर में उसे आठ घंटे काम करना होगा और रविवार को छुट्टी भी मिलेगी। उस पर विश्वास कर दुर्गा गत 21 अप्रैल को बंगलुरू की उस फैक्ट्री में पहुंच गया।
वहां पहुंचते ही उसे पहला झटका तब लगा जब फैक्ट्री प्रबंधन ने सभी कर्मचारियों के मोबाइल फोन और अन्य सामान अपने कब्जे में ले लिया। लेकिन दुर्गा ने अपना फोन नहीं दिया और उसे छुपा लिया। हालांकि उसके फोन में मात्र एक रुपए का बैलेंस ही बचा था, जिसे उसने खर्च नहीं किया।
दुर्गा और उसके साथ के अन्य मजदूरों को ये एहसास हो चुका था कि वो इस शहर की भूल भुलैया में खो चुके हैं। उसने बताया कि हमे नाश्ते के बाद सुबह 9 बजे काम शुरू करने के बाद दोपहर दो बजे के करीब भोजन करने के लिए 10 मिनट का ही समय मिलता।
बीमार पड़ने पर की जाती थी मारपीट
इसके बाद फिर काम शुरू किया जाता जो रात दो बजे तक जारी रहता। अगर हम बीच में काम बंद करते तो हमें पीटा जाता। कोई बीमार पड़ जाता तो उसकी भी बुरी तरह पिटाई की जाती। मेरे कई साथियों की काम नहीं कर पाने पर बुरी तरह पिटाई की गई।
लगभग डेढ़ महीने तक अत्याचार झेलने के बाद दुर्गा स्वांसी ने खूंटी में रहने वाली अपनी बड़ी बहन हरियाली देवी को 27 मई को अपने मोबाइल से मैसेज भेजते हुए इस नर्क से बचाने की गुहार लगाई। लेकिन इसकी भनक फैक्ट्री प्रबंधन को लग गई जिसके बाद दुर्गा को बुरी तरह पीटा गया।
बंगलुरू की बालाजी अगरबत्ती फैक्ट्री में मजदूरों की दुर्दशा की जानकारी मिलते ही दुर्गा की बहन हरियाली देवी ने रांची के डिप्टी कमिश्नर को इसकी जानकारी दी।
मैसेज ने खोल दिया पूरा मामला
डिप्टी कमिश्नर तक यह मामला पहुंचने के बाद उन्होंने बंगलुरू के डिप्टी कमिश्नर से इस संबंध में बात की, जिसके बाद सभी मजदूरों को फैक्ट्री से छुड़ाने का काम शुरू किया गया।
बंगलुरू की फैक्ट्री से 107 मजदूरों को मुक्त करवाने वाली एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की इंचार्ज अराधना सिंह बताती हैं कि अपने मैसेज में दुर्गा स्वांसी ने फैक्ट्री में मजदूरों पर हो रहे अत्याचार को बयां किया था जिसके बाद बचाव अभियान की रूपरेखा तैयार की गई।
उसकी बहन ने भी इसमें प्रभावी भूमिका निभाई जिन्होंने सीधे इस मामले को डिप्टी पुलिस कमिश्नर के सामने उठाया। पुलिस ने उस एजेंट प्रदीप बोस को भी गिरफ्तार कर लिया जो अभी तक सैकडों युवाओं को इस दलदल में फंसा चुका था।