फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jharkhand ›   a message rescued 107 people's life

एक एसएमएस, जिसने बचाई 107 लोगों की जान

Sun, 07 Jun 2015 12:30 PM IST
Updated Sun, 07 Jun 2015 12:30 PM IST
विज्ञापन
a message rescued 107 people's life

विज्ञापन

कई बार छोटी सी समझदारी बड़ी-बड़ी मुश्किलों को हल आसानी से ढूंढ निकालती है। रांची के दुर्गा स्वांसी की एक ऐसी ही समझदारी उसके और उसके 107 साथियों के लिए वरदान बन गई।

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार रांची निवासी दुर्गा स्वांसी ने बताया कि कैसे उन लोगों से बंगलुरू की बालाजी अगरबत्ती फैक्ट्री में जानवरों की तहर काम कराया जाता था। 20 साल के दुर्गा ने जो कहानी बताई उसे सुनकर अच्छे-अच्छों के होश फाख्ता हो सकते हैं।

विज्ञापन


रांची निवासी दुर्गा ने बताया कि इंटर की पढ़ाई पास करने के बाद घर की खस्ता हालत और गरीबी के कारण उसे रोजगार की तलाश थी। उसके दोस्तों ने उसे कोई नौकरी करने की सलाह दी। दोस्तों ने दुर्गा को एक एजेंट से मिलवाया जिसने उसे बंगलुरू में एक फैक्ट्री के बारे में बताया।
विज्ञापन
विज्ञापन

बालाजी अगरबत्ती फैक्ट्री में लिया जाता था मजदूरों की तरह काम

a message rescued 107 people's life

उसने वादा किया कि उसे वहां काम करने पर 7 हजार रुपए तनख्वाह के अलावा भोजन, कपड़े और रहने की व्यवस्‍था मिलेगी। दिनभर में उसे आठ घंटे काम करना होगा और रविवार को छुट्टी भी मिलेगी। उस पर विश्वास कर दुर्गा गत 21 अप्रैल को बंगलुरू की उस फैक्ट्री में पहुंच गया।

वहां पहुंचते ही उसे पहला झटका तब लगा जब फैक्ट्री प्रबंधन ने सभी कर्मचारियों के मोबाइल फोन और अन्य सामान अपने कब्जे में ले‌ लिया। लेकिन दुर्गा ने अपना फोन नहीं दिया और उसे छुपा लिया। हालांकि उसके फोन में मात्र एक रुपए का बैलेंस ही बचा था, जिसे उसने खर्च नहीं किया।


दुर्गा और उसके साथ के अन्य मजदूरों को ये एहसास हो चुका था कि वो इस शहर की भूल भुलैया में खो चुके हैं। उसने बताया कि हमे नाश्ते के बाद सुबह 9 बजे काम शुरू करने के बाद दोपहर दो बजे के करीब भोजन करने के लिए 10 मिनट का ही समय मिलता।

बीमार पड़ने पर की जाती थी मारपीट

a message rescued 107 people's life

इसके बाद फिर काम शुरू किया जाता जो रात दो बजे तक जारी रहता। अगर हम बीच में काम बंद करते तो हमें पीटा जाता। कोई बीमार पड़ जाता तो उसकी भी बुरी तरह पिटाई की जाती। मेरे कई साथियों की काम नहीं कर पाने पर बुरी तरह पिटाई की गई।

लगभग डेढ़ महीने तक अत्याचार झेलने के बाद दुर्गा स्वांसी ने खूंटी में रहने वाली अपनी बड़ी बहन हरियाली देवी को 27 मई को अपने मोबाइल से मैसेज भेजते हुए इस नर्क से बचाने की गुहार लगाई। लेकिन इसकी भनक फैक्ट्री प्रबंधन को लग गई जिसके बाद दुर्गा को बुरी तरह पीटा गया।

बंगलुरू की बालाजी अगरबत्ती फैक्ट्री में मजदूरों की दुर्दशा की जानकारी मिलते ही दुर्गा की बहन हरियाली देवी ने रांची के डिप्टी कमिश्नर को इसकी जानकारी दी।

मैसेज ने खोल दिया पूरा मामला

a message rescued 107 people's life

डिप्टी कमिश्नर तक यह मामला पहुंचने के बाद उन्होंने बंगलुरू के डिप्टी‌ कमिश्नर से इस संबंध में बात की, जिसके बाद सभी मजदूरों को फैक्ट्री से छुड़ाने का काम शुरू किया गया।

बंगलुरू की फैक्ट्री से 107 मजदूरों को मुक्त करवाने वाली एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की इंचार्ज अराधना सिंह बताती हैं कि अपने मैसेज में दुर्गा स्वांसी ने फैक्ट्री में मजदूरों पर हो रहे अत्याचार को बयां किया था जिसके बाद बचाव अभियान की रूपरेखा तैयार की गई।

उसकी बहन ने भी इसमें प्रभावी भूमिका निभाई जिन्होंने सीधे इस मामले को डिप्टी पुलिस कमिश्नर के सामने उठाया। पुलिस ने उस एजेंट प्रदीप बोस को भी गिरफ्तार कर लिया जो अभी तक सैकडों युवाओं को इस दलदल में फंसा चुका था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed