दसवीं की परीक्षा रद्द होने पर विद्यार्थियों की मिली-जुली प्रतिक्रिया, जानिए किसने क्या कहा
कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने बुधवार को सीबीएसई की दसवीं कक्षा की परीक्षा को रद्द कर दिया है। यह परीक्षा चार मई से शुरू होनी थी। परीक्षा रद्द होने पर छात्रों और शिक्षकों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। इस फैसले से कुछ छात्र खुश है, जबकि अन्य का कहना है कि 12वीं की तरह फिलहाल 10वीं की परीक्षा को भी टाल देना चाहिए था। शिक्षकों ने बताया कि प्रदेश के सभी सीबीएसई स्कूलों में वर्ष स्कूल नहीं चले हैं। ऑनलाइन पढ़ाई नाममात्र की हुई, ऐसे में इंटरनल के तहत अंक के दिए जाएंगे यह भी कठिन कार्य होगा।
केसी इंटरनेशनल स्कूल में रसायन शास्त्र के शिक्षक सुमित वर्मा ने बताया कि दसवीं कक्षा की परीक्षा होनी चाहिए। दसवीं ही उच्च शिक्षा की तरफ जाने का पहला द्वार होता है। ऐसे में बच्चों को प्रमोट कर अगली कक्षा भेजना उनके भविष्य के लिए अच्छा नहीं हैं। उन्होंने कहा कि 12वीं की तरह ही 10वीं की परीक्षा को फिलहाल हालात ठीक होने तक टाल देना चाहिए था।
इससे बच्चों को इससे तैयारियां का अतिरिक्त समय मिलता। हालात सामान्य होने पर सरकार परीक्षा को कम से कम समय में पूरा करवा सकती थी। उन्होंने कहा कि अगर इंटरनल के आधार पर रिजल्ट बनता है तो स्कूल किसी आधार पर नंबर देगा।
साल भर ऑफलाइल कक्षाएं लगी और ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड में प्री- बोर्ड परीक्षा भी हुई। उन्होंने कहा कि अधिकांश बच्चे दसवीं की परीक्षा में नंबरों के आधार पर ही 11वीं में सब्जेक्ट सिलेक्शन का आधार बनाते हैं।
ये भी पढ़ें- कश्मीर: चार साल की बच्ची की प्रतिभा ने सेना को बनाया मुरीद, एक पल में बदल गई जिंदगीमेरे हिसाब से यह उचित फैसला है, इसके कई कारण है। कोरोना के कारण पिछले साल स्कूल बंद रहे। ऑनलाइन क्लासेज में उतनी पढ़ाई नहीं हुई थी। परीक्षा की तारीख आने पर तैयारी तो की थी, लेकिन उतनी नहीं कि अच्चे अंक आ जाते। मुझे संकाय में चुनने में परेशानी नहीं होगी। मैने पहले से अपना गोल निर्धारित किया है कि संकाय में आगे की पढ़ाई करनी है। मैरे लिए तो यह फैसला काफी अच्छा है। - दिव्य, एयरफोर्स स्कूल जम्मू की दसवीं की छात्रा
ये भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: सरकार का बड़ा फैसला, कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच दरबार मूव स्थगित, ये निर्देश जारी