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डरे ग्रामीणों के कदम खेतों की ओर नहीं बढ़ते
ब्यूरो/अमर उजाला, सांबा/रामगढ़
Updated Mon, 06 Oct 2014 01:53 AM IST
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पाकिस्तानी रेंजरों द्वारा ग्रामीण इलाकों को निशाना बनाए जाने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। किसानों के अनुसार अब उन्हें खेतों की ओर जाने से डर लगता है। जिले के सीमावर्ती नंगा, कदराल, जस्सो चक, अवताल, जेरड़ा, दग, नथवाल आदि गांवों के लोगों का कहना है कि पाकिस्तान ऐसे समय पर गोलाबारी करता है, जब या तो फसलों की बुआई हो रही होती है या इसकी कटाई का वक्त होता है।
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किसान किसी तरह फसल को पकने की स्थिति तक पहुंचा भी लेते हैं। उसकी कटाई पर बंदूकों का साया रहता है। किसान पृथ्वी सिंह, सूरत सिंह, बलवान सिंह, राज कुमार आदि ने बताया कि उनके गांव चचवाल, चलेआरी और मंगू चक सीमा से सटे हुए हैं। खेत तारबंदी के पास हैं।
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खेतों में फसल खड़ी है। उन्हें वहां जाने से डर लगता है। पाकिस्तान पर भरोसा नहीं कि वह कब गोले दाग दे। सीमावर्ती ग्रामीण पूर्व कैप्टन दर्शन चौधरी, अशोक चौधरी समेत नरेंद्र सिंह, प्रेमपाल आदि ने कहा कि इसी साल जुलाई और अगस्त में पाकिस्तान ने गोलाबारी की थी, तब धान की रोपाई का काम चल रहा था।
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उस समय रोपाई में भी खलल पड़ा। अब बचीखुची फसल काटने को है तो उस पर भी संकट के बादल हैं। कई ग्रामीणों ने पाकिस्तानी गोलाबारी के चलते धान की रोपाई ही नहीं की थी। ग्रामीणों का कहना है कि अब पाकिस्तान से बातचीत और फ्लैग मीटिंग का वक्त नहीं है। अब वक्त जवाबी कार्रवाई का है। ग्रामीणों ने लंबे समय से अपना नुकसान उठाया है। यह कब तक बर्दाश्त किया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि कब तक सीमावर्ती ग्रामीणों को पाकिस्तान की गोलियों का निशाना बनना पड़ेगा। न तो किसान खेतीबाड़ी कर पा रहे हैं और न ही मवेशी पाल पा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब देने की मांग की है।