{"_id":"e9c330aa-7feb-11e2-9052-d4ae52bc57c2","slug":"stories-will-be-also-available-in-kashmiri-language","type":"story","status":"publish","title_hn":"कश्मीरी जुबान में भी पढ़ने को मिलेंगी कहानियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कश्मीरी जुबान में भी पढ़ने को मिलेंगी कहानियां
जम्मू/ब्यूरो
Updated Tue, 26 Feb 2013 01:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धूर्त जादूगरनियों, दयावान परियों, रंग-बिरंगी तितलियों, बड़े-बड़े भालू आदि पर आधारित देश भर की काल्पनिक कहानियां अब कश्मीरी बच्चों को अपनी जुबान में पढ़ने को मिलेंगी। देश के विभिन्न हिस्सों की ऐसी काल्पनिक और रोचक कहानियों का नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) की ओर से कश्मीरी भाषा में अनुवाद किया जा रहा है।
विज्ञापन
केवल यही नहीं, ट्रस्ट कश्मीर घाटी में बच्चों के लिए वर्कशॉप्स का भी आयोजन करने जा रही है। एनबीटी के निदेशक एमए सिकंदर का कहना है कि घाटी के बच्चे देश के विभिन्न हिस्सों के लेखकों की कहानियों के बारे में पढ़ सकेंगे। वह जान सकेंगे कि दक्षिण में केरल या आंध्र का बच्चा क्या पढ़ रहा है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि कश्मीरी भाषा में किताबों को प्रकाशित करने की दिशा में पहल की कमी है। इसी कारण एनबीटी रियासती सरकार के साथ मिल कर इस दिशा में नई पहल करने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना था कि घाटी का युवा उर्दू, हिंदी या अंग्रेजी पढ़ सकता है और ऐसी कोशिश की जा रही है कि अन्य भाषाओं की किताबों का अनुवाद कर उसे उपलब्ध करवाया जाए।
विज्ञापन
हाल ही में गठित कश्मीरी एडवाइजरी पैनेल, जिसमें श्रीनगर, जम्मू और दिल्ली के विशेषज्ञ शामिल थे, ने स्थानीय लेखकों से भी काल्पनिक कहानियों को लेने का काम शुरू कर दिया है।