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स्पेशल नाइट में दर्शकों की भीड़
ब्यूूराे/अमर उजाला, जम्मूू
Updated Sun, 05 Oct 2014 01:30 AM IST
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पुराने शहर के बिल्लू मंदिर में शनिवार को दर्शकों की मांग पर रामलीला की स्पेशल नाइट का आयोजन किया गया।
इसमें वेदवति-रावण, प्रभु श्रीराम की विदाई और शबरी के दृश्यों ने दर्शकों को घंटों तक बांधे रखा। रामलीला की परंपरा और संस्कृति के साथ बच्चों से लेकर हर कोई जुड़ा। मंच पर कलाकारों ने शानदार अभिनय से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
मंदिर के मंच पर वेदवती-रावण के दृश्य में दिखाया गया कि किस तरह रावण वेदवती के सौंदर्य पर मोहित होकर उससे शादी करने की इच्छा जाहिर करता है। इस पर वेदवती आग में सती होते हुए श्राप देती है कि रावण के अंत का कारण स्त्री ही होगी और आखिर में माता सीता रावण का काल बनती हैं।
रावण महा बलि होता है लेकिन उसका घमंड और विपरीत बुद्धि उसे एक नारी के हाथों काल का ग्रास बनाती है। इसके अलावा भगवान श्रीराम की विदाई के दृश्य से हर किसी की अपने प्रभु के प्रति आंखें नम हुईं। इस दृश्य में ऐसा लगा मानो सच में भगवान श्रीराम अपने भक्तों से जुदा हो रहे हों।
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इसमें दिखाया गया कि जब श्रीराम चौदह वर्ष के वनवास के लिए अयोध्या से जा रहे होते हैं तो वह माता कैकेयी के पास जाकर आशीर्वाद लेते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें वनवास देकर उन्होंने सौभाग्य दिया है कि वह अपने पिता श्री के बचन को पूरा कर सकें।
इस पर कैकेयी भावुक हो जाती हैं और उन्हें अपनी नजरों के सामने से दूर चले जाने को कहती है। इसी तरह शबरी दृश्य में दिखाया गया कि किस प्रकार से शबरी के प्रेम वश भगवान श्री राम उसके झूठे बैर भी खाते हैं।
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इसमें वेदवति-रावण, प्रभु श्रीराम की विदाई और शबरी के दृश्यों ने दर्शकों को घंटों तक बांधे रखा। रामलीला की परंपरा और संस्कृति के साथ बच्चों से लेकर हर कोई जुड़ा। मंच पर कलाकारों ने शानदार अभिनय से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
मंदिर के मंच पर वेदवती-रावण के दृश्य में दिखाया गया कि किस तरह रावण वेदवती के सौंदर्य पर मोहित होकर उससे शादी करने की इच्छा जाहिर करता है। इस पर वेदवती आग में सती होते हुए श्राप देती है कि रावण के अंत का कारण स्त्री ही होगी और आखिर में माता सीता रावण का काल बनती हैं।
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रावण महा बलि होता है लेकिन उसका घमंड और विपरीत बुद्धि उसे एक नारी के हाथों काल का ग्रास बनाती है। इसके अलावा भगवान श्रीराम की विदाई के दृश्य से हर किसी की अपने प्रभु के प्रति आंखें नम हुईं। इस दृश्य में ऐसा लगा मानो सच में भगवान श्रीराम अपने भक्तों से जुदा हो रहे हों।
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इसमें दिखाया गया कि जब श्रीराम चौदह वर्ष के वनवास के लिए अयोध्या से जा रहे होते हैं तो वह माता कैकेयी के पास जाकर आशीर्वाद लेते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें वनवास देकर उन्होंने सौभाग्य दिया है कि वह अपने पिता श्री के बचन को पूरा कर सकें।
इस पर कैकेयी भावुक हो जाती हैं और उन्हें अपनी नजरों के सामने से दूर चले जाने को कहती है। इसी तरह शबरी दृश्य में दिखाया गया कि किस प्रकार से शबरी के प्रेम वश भगवान श्री राम उसके झूठे बैर भी खाते हैं।