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पत्नी के हत्यारे को उम्रकैद की सजा
Jammu
Updated Wed, 30 Jul 2014 05:31 AM IST
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जम्मू। अपनी पत्नी की हत्या करने के आरोप में पिछले सात साल से ट्रायल का सामना कर रहे तारा चंद (पटोली, जम्मू) को प्रिंसिपल सेशन जज राकेश सागर जैन की अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।
पुलिस केस के अनुसार 13 फरवरी, 2007 को शाम राजकुमारी ने अपने पति से घर का सामान लाने के लिए रुपये मांगे। इससे उनके बीच झगड़ा हो गया। अगले दिन सुबह पांच बजे महिला रसोई घर में खाना बनाने के लिए आटा निकाल रही थी। इसी दौरान उसके पति ने उसके ऊपर केरोसिन तेल डालकर आग लगा दी। आरोपी ने किचन के दरवाजे को बाहर से बंद कर दिया। महिला ने किसी तरह कुंडी खोली और बाहर जमीन पर आ गिरी। उसके बाद पति ने उसके ऊपर कंबल डाला और तब आग बुझी। उसके देवर ने एक आटो बुलाया और उसे अस्पताल पहुंचाया गया। आटो ड्राइवर ने उसे भर्ती करवाया। उसका पति और सास उसका हाल जानने के लिए अस्पताल भी नहीं पहुंचे। राजकुमारी ने पुलिस को होश हवास में प्रताड़ित करने के बयान दर्ज करवाए और उस पर अंग्रेजी में हस्ताक्षर भी किए। उसी के आधार पर बख्शी नगर पुलिस ने आरपीसी की धारा 307 के तहत मामला दर्ज किया। 18 फरवरी, 2007 को उसकी मौत हो गई। पुलिस ने तारा चंद के खिलाफ हत्या के प्रयास का दर्ज मामला हत्या में तब्दील कर दिया। आरोपी के वकील की दलीलें सुनने के बाद प्रिंसिपल सेशन जज ने कहा कि अदालत सजा सुनाते वक्त अपराध की परिस्थितियों और उसका समाज पर प्रभाव को ध्यान में रखती है। साथ ही आरोपी की उम्र को भी ध्यान में रखा जाता है। तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए अदालत दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाती है। साथ ही उस पर छह हजार जुर्माना लगाती है। जेएनएफ
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पुलिस केस के अनुसार 13 फरवरी, 2007 को शाम राजकुमारी ने अपने पति से घर का सामान लाने के लिए रुपये मांगे। इससे उनके बीच झगड़ा हो गया। अगले दिन सुबह पांच बजे महिला रसोई घर में खाना बनाने के लिए आटा निकाल रही थी। इसी दौरान उसके पति ने उसके ऊपर केरोसिन तेल डालकर आग लगा दी। आरोपी ने किचन के दरवाजे को बाहर से बंद कर दिया। महिला ने किसी तरह कुंडी खोली और बाहर जमीन पर आ गिरी। उसके बाद पति ने उसके ऊपर कंबल डाला और तब आग बुझी। उसके देवर ने एक आटो बुलाया और उसे अस्पताल पहुंचाया गया। आटो ड्राइवर ने उसे भर्ती करवाया। उसका पति और सास उसका हाल जानने के लिए अस्पताल भी नहीं पहुंचे। राजकुमारी ने पुलिस को होश हवास में प्रताड़ित करने के बयान दर्ज करवाए और उस पर अंग्रेजी में हस्ताक्षर भी किए। उसी के आधार पर बख्शी नगर पुलिस ने आरपीसी की धारा 307 के तहत मामला दर्ज किया। 18 फरवरी, 2007 को उसकी मौत हो गई। पुलिस ने तारा चंद के खिलाफ हत्या के प्रयास का दर्ज मामला हत्या में तब्दील कर दिया। आरोपी के वकील की दलीलें सुनने के बाद प्रिंसिपल सेशन जज ने कहा कि अदालत सजा सुनाते वक्त अपराध की परिस्थितियों और उसका समाज पर प्रभाव को ध्यान में रखती है। साथ ही आरोपी की उम्र को भी ध्यान में रखा जाता है। तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए अदालत दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाती है। साथ ही उस पर छह हजार जुर्माना लगाती है। जेएनएफ
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