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भोलानंद की जमानत की अर्जी रद्द
Jammu
Updated Mon, 20 Jan 2014 05:49 AM IST
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जम्मू। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश करतार सिंह ने आसाराम बापू पर आरोप लगाने वाले विनोद कुमार गुप्ता उर्फ भोलानंद निवासी न्यू म्हाड़ा मलाड वेस्ट मुंबई की जमानत की अर्जी को रद्द कर दिया। भोला नंद ने आसाराम बापू पर झूठे आरोप लगाए थे कि उनके भगवती नगर स्थित आश्रम में बच्चों को दफनाया गया है।
पुलिस केस के अनुसार विक्रांत शर्मा ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट जम्मू के समक्ष अर्जी पेश की और बताया कि शिकायतकर्ता भगवती नगर के निवासी हैं। भोला नंद 2008-2009 में भगवती नगर स्थित आश्रम का इंचार्ज था और वह उसके भक्त थे। शिकायतकर्ता से भोलानंद से काफी मधुर संबंध थे। सितंबर 2013 में आसाराम को हिरासत में ले लिया गया। तो आरोपी ने शिकायतकर्ता से संपर्क करना शुरू कर दिया। अपने और कई नंबरों से उसके मोबाइल फोन पर कॉल की। भोलानंद ने साजिश रची और उससे कहा कि वह आसाराम को एक अन्य केस में फंसाएंगे। इसकी सूचना नरेंद्र सिंह को दी गई। अन्य लोगों को भी सुनाया गया। बाद में आपस में लोगों ने सलाह की कि भोलानंद की साजिश को रिकार्ड किया जाए। पहले शिकायतकर्ता को कहा गया कि प्रजापति का नंबर दें। विक्रांत ने भोला के कहने पर काम करना शुरू कर दिया, ताकि भोला को लगे कि वह उसके कहने पर चल रहा है। भोला ने कहा कि शिकायतकर्ता कुछ लड़कियाें या महिलाओं का प्रबंध करे, जो आसाराम पर झूठे आरोप लगा सके। इन लड़कियों की पहचान नहीं बताई जाएगी। कुछ झूठे सबूत भी जमा करने के लिए कहा, ताकि आसाराम और उसके परिवार को फंसाकर जेल भेजा जा सके। अचानक भोलानंद न्यूज चैनल में आया और उसने कहा कि जम्मू के भगवती नगर स्थित आश्रम में तीन बच्चे दफनाए गए हैं। कुछ कंकाल का भी प्रबंध किया जाए। उसे आश्रम में दफनाएं। किसी मुस्लिम कब्रिस्तान से इन बच्चों के शव को लाया जा सकता है। मुस्लिम भी आसाराम के खिलाफ हैं और एक सांप्रदायिक हिंसा होगी, जिससे आसाराम लंबी जेल काटेंगे। इसके लिए वह काफी रुपया भी देगा। कोर्ट ने पाया कि अगर भोलानंद को जमानत दी गई तोे वह महाराष्ट्र फरार हो सकता है और उसकी अर्जी रद्द कर दी। जेएनएफ
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पुलिस केस के अनुसार विक्रांत शर्मा ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट जम्मू के समक्ष अर्जी पेश की और बताया कि शिकायतकर्ता भगवती नगर के निवासी हैं। भोला नंद 2008-2009 में भगवती नगर स्थित आश्रम का इंचार्ज था और वह उसके भक्त थे। शिकायतकर्ता से भोलानंद से काफी मधुर संबंध थे। सितंबर 2013 में आसाराम को हिरासत में ले लिया गया। तो आरोपी ने शिकायतकर्ता से संपर्क करना शुरू कर दिया। अपने और कई नंबरों से उसके मोबाइल फोन पर कॉल की। भोलानंद ने साजिश रची और उससे कहा कि वह आसाराम को एक अन्य केस में फंसाएंगे। इसकी सूचना नरेंद्र सिंह को दी गई। अन्य लोगों को भी सुनाया गया। बाद में आपस में लोगों ने सलाह की कि भोलानंद की साजिश को रिकार्ड किया जाए। पहले शिकायतकर्ता को कहा गया कि प्रजापति का नंबर दें। विक्रांत ने भोला के कहने पर काम करना शुरू कर दिया, ताकि भोला को लगे कि वह उसके कहने पर चल रहा है। भोला ने कहा कि शिकायतकर्ता कुछ लड़कियाें या महिलाओं का प्रबंध करे, जो आसाराम पर झूठे आरोप लगा सके। इन लड़कियों की पहचान नहीं बताई जाएगी। कुछ झूठे सबूत भी जमा करने के लिए कहा, ताकि आसाराम और उसके परिवार को फंसाकर जेल भेजा जा सके। अचानक भोलानंद न्यूज चैनल में आया और उसने कहा कि जम्मू के भगवती नगर स्थित आश्रम में तीन बच्चे दफनाए गए हैं। कुछ कंकाल का भी प्रबंध किया जाए। उसे आश्रम में दफनाएं। किसी मुस्लिम कब्रिस्तान से इन बच्चों के शव को लाया जा सकता है। मुस्लिम भी आसाराम के खिलाफ हैं और एक सांप्रदायिक हिंसा होगी, जिससे आसाराम लंबी जेल काटेंगे। इसके लिए वह काफी रुपया भी देगा। कोर्ट ने पाया कि अगर भोलानंद को जमानत दी गई तोे वह महाराष्ट्र फरार हो सकता है और उसकी अर्जी रद्द कर दी। जेएनएफ
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