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एफआईआर रद करने की अपील से कोर्ट का इनकार
Jammu
Updated Sun, 07 Oct 2012 12:00 PM IST
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जम्मू। जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के जम्मू विंग ने फारेस्ट गार्ड खेमराज के खिलाफ रिश्वत लेने के आरोप में दर्ज एफआईआर को रद करने से इंकार कर दिया। विजिलेेंस नेे 18 मई, 2010 को फारेेस्टर शमसदीन को रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ा था।
विजिलेंस केस के अनुसार शिकायतकर्ता ने शिकायत दर्ज कराई कि दोनों आरोपियों ने जंगल में आग लगा दी है। जिससे राज्य खजाने को नुकसान पहुंचा है और शिकायतकर्ता के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया, जबकि शिकायतकर्ता ने आरोपी लोेगों के बारे में बताया कि वह इस आग में शामिल नहीं है। उसे कहा गया कि कानूनी कार्रवाई की जा रही है। फारेस्ट गार्ड ने याची को घर जाने की अनुमति दी। शिकायत के अनुसार शिकायतकर्ता ने इस केस को दबाने के लिए दो हजार रुपये दिए। एडवोेकेट हरी चंद जलमेरिया और एडिशनल एडवोकेट जनरल गगन बसोत्रा के अनुसार 561 सीआरपीसी 561-ए के तहत कार्रवाई की गई है। याची का केस किसी भी पारामीटर के अंदर नहीं आता है। कानून के दायरे से बाहर कोई भी नहीं जा सकता है और हर किसी को जांच के समक्ष खड़ा होना पड़ेगा।
कोर्ट ने पूरे केस की जांच के बाद पाया कि याची 561-ए सीआरपीसी के तहत जवाबदेह है। अब तक चार्जशीट भी पेश नहीं की गई है। अभी कोई बयान भी दर्ज नहीं हुए हैं और केस की जांच जारी है। इसलिए याची की एफआईआर दर्ज करने की अपील को रद करने के आदेश दिए। आदेश न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर ने दिए और याचिका को रद कर दिया। जेएनएफ
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विजिलेंस केस के अनुसार शिकायतकर्ता ने शिकायत दर्ज कराई कि दोनों आरोपियों ने जंगल में आग लगा दी है। जिससे राज्य खजाने को नुकसान पहुंचा है और शिकायतकर्ता के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया, जबकि शिकायतकर्ता ने आरोपी लोेगों के बारे में बताया कि वह इस आग में शामिल नहीं है। उसे कहा गया कि कानूनी कार्रवाई की जा रही है। फारेस्ट गार्ड ने याची को घर जाने की अनुमति दी। शिकायत के अनुसार शिकायतकर्ता ने इस केस को दबाने के लिए दो हजार रुपये दिए। एडवोेकेट हरी चंद जलमेरिया और एडिशनल एडवोकेट जनरल गगन बसोत्रा के अनुसार 561 सीआरपीसी 561-ए के तहत कार्रवाई की गई है। याची का केस किसी भी पारामीटर के अंदर नहीं आता है। कानून के दायरे से बाहर कोई भी नहीं जा सकता है और हर किसी को जांच के समक्ष खड़ा होना पड़ेगा।
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कोर्ट ने पूरे केस की जांच के बाद पाया कि याची 561-ए सीआरपीसी के तहत जवाबदेह है। अब तक चार्जशीट भी पेश नहीं की गई है। अभी कोई बयान भी दर्ज नहीं हुए हैं और केस की जांच जारी है। इसलिए याची की एफआईआर दर्ज करने की अपील को रद करने के आदेश दिए। आदेश न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर ने दिए और याचिका को रद कर दिया। जेएनएफ
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