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मानव तस्करी विरोधी विधेयक की ख़ास बातें

Tue, 31 May 2016 08:34 PM IST
ज़ुबैर अहमद /बीबीसी संवाददाता
ज़ुबैर अहमद /बीबीसी संवाददाता Updated Tue, 31 May 2016 08:34 PM IST
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special things of Anti -human trafficking bill
women 's - फोटो : BBC

केंद्रीय सरकार का कहना है कि मानव तस्करी भारत में तीसरा सब से बड़ा और गंभीर अपराध है।

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मानव तस्करी और इस तरह के दूसरे अपराधों की रोक थाम के लिए भारत सरकार ने मानव तस्करी (सुरक्षा, बचाव और पुनर्वास) बिल 2016 का मसौदा जारी किया है। ये बिल सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर तैयार किया गया है लंबे समय से इसकी जरूरत महसूस की जा रही थी।

दरअसल मौजूदा कानून इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट 1956 के अंतर्गत देह व्यापर तक सीमित था। लेकिन इस बिल में इसके दायरे को बढ़ाया गया है और इसमें कई ऐसे अपराधों को शामिल किया गया है जो मौजूदा कानून में शामिल नहीं थे।

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1- बंधुआ मजदूरी और बाल मजदूरी से लेकर वेतन कम देने जैसे अपराध इस बिल में शामिल है। उदाहरण के तौर पर वो परिवार जो छोटी बच्चियों को नौकरानी की तरह रखते है और उन्हें पर्याप्त वेतन नहीं देते उनका शोषण करते है। तो ऐसे परिवार के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। 2- पीड़ितों और गवाहों की पहचान बाहर करने पर रोक मीडिया या कोई व्यक्ति पीड़ितों और गवाहों के नाम या पहचान सार्वजनिक करे तो इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी 3- विशेष जांच एजेंसी बिल में केंद्रीय सरकार को एक विशेष जांच एजेंसी के गठन का सुझाव दिया गया है। इस एजेंसी का काम होगा मानव तस्करी के मामलों की नए कानून के अंतर्गत जांच करना 4- विशेष अदालत पीड़ितों के आघात को कम करने और अधिक से अधिक केसेज में सजा दिलाने के लिए इस बिल में जिला स्तर पर विशेष अदालतों के गठन का प्रावधान है। इन में सरकारी वकीलों और जजों की नियुक्ति की कोशिशों का प्रस्ताव भी है

1- बंधुआ मजदूरी और बाल मजदूरी से लेकर वेतन कम देने जैसे अपराध इस बिल में शामिल है। उदाहरण के तौर पर वो परिवार जो छोटी बच्चियों को नौकरानी की तरह रखते है और उन्हें पर्याप्त वेतन नहीं देते उनका शोषण करते है। तो ऐसे परिवार के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

2- पीड़ितों और गवाहों की पहचान बाहर करने पर रोक मीडिया या कोई व्यक्ति पीड़ितों और गवाहों के नाम या पहचान सार्वजनिक करे तो इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी

3- विशेष जांच एजेंसी बिल में केंद्रीय सरकार को एक विशेष जांच एजेंसी के गठन का सुझाव दिया गया है। इस एजेंसी का काम होगा मानव तस्करी के मामलों की नए कानून के अंतर्गत जांच करना।

4- विशेष अदालत पीड़ितों के आघात को कम करने और अधिक से अधिक केसेज में सजा दिलाने के लिए इस बिल में जिला स्तर पर विशेष अदालतों के गठन का प्रावधान है। इन में सरकारी वकीलों और जजों की नियुक्ति की कोशिशों का प्रस्ताव भी है


                                                          

पुनर्वास बिल के अनुसार तस्करी की शिकार लड़कियों के लिए लम्बे अर्से तक के लिए सरकारी रिहाइश का इंतेजाम हो

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women 's - फोटो : BBC


5- पुनर्वास बिल के अनुसार तस्करी की शिकार लड़कियों के लिए लम्बे अर्से तक के लिए सरकारी रिहाइश का इंतेजाम हो जहाँ उनके पुनर्वास पर जोर दिया जाये। उन्हें नए हुनर सिखाए जाएँ ताकि वो मुलाजमत कर सकें।

6- अंतर-देश की तस्करी मानव तस्करी भारत से पडोसी देशों में आम है। इसकी रोक थाम के लिए बिल में पड़ोसी देशों से इस सम्बन्ध ताल मेल बढ़ाने का सुझाव है।

7- इस विधेयक में जिला और राज्य स्तर पर अंतर-मंत्रालयी तस्करी विरोधी समितियों के गठन का सुझाव है

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