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कोरोना कवच: करीब दो लाख बच्चों को दी जाएगी जायडस कैडिला की वैक्सीन

Thu, 26 Aug 2021 07:22 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 26 Aug 2021 07:22 AM IST
सार

कंपनी के ही अनुसार इस परीक्षण को सार्वजनिक होने में करीब छह माह तक का वक्त लग सकता है। ऐसे में विशेषज्ञ डीएनए वैक्सीन पर भरोसा करने में भी हिचकिचा रहे हैं।

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Zydus Cadila vaccine will be given to two lakh children
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

जायडस कैडिला की डीएनए आधारित वैक्सीन को लेकर सबसे अधिक चर्चाएं हो रही हैं। एक तरफ राष्ट्रीय तकनीकी सलाह समिति ने वैक्सीन को आपात इस्तेमाल की अनुमति मिलने के बाद दिशा निर्देश तैयार करना शुरू कर दिया है। यह टीका अधिकतम दो लाख बच्चों को दिया जा सकता है।

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इन बच्चों की आयु 12 से 18 वर्ष के बीच होनी चाहिए। वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पहले कोवाक्सिन और अब जायडस कैडिला कंपनी की इस डीएनए वैक्सीन का अंतिम परीक्षण परिणाम सार्वजनिक नहीं हुआ, लेकिन सरकार ने अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर ही इसे अनुमति दे दी।
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अप्रैल 2021 में भारत सरकार के ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (सीडीएससीओ) ने जायडस कैडिला कंपनी को विराफिन नामक इंजेक्शन का इस्तेमाल कोविड मरीजों में करने की अनुमति दी थी। उस दौरान भी तीसरे चरण का परीक्षण पूरा नहीं हुआ था और कंपनी ने इसे असरदार मिलने का दावा किया था।

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  •  यह 12 हजार रुपये की कीमत में उपलब्ध होता है। अनुमति मिलने के कुछ समय बाद बीते 20 अगस्त को जब तीसरे चरण के परीक्षण परिणाम सार्वजनिक हुए तो विराफिन कोई बड़ा असर मरीजों में दिखाई नहीं दिया।

भारत में वैक्सीन परीक्षण किसी दौड़ से कम नहीं 
स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. स्वप्निल पारेख का कहना है कि भारत में वैक्सीन का परीक्षण किसी दौड़ से कम नहीं है। फॉर्मा कंपनियों में एक तरह की प्रतियोगिता सी देखने को मिल रही हैै। उन्होंने व्यंग्य में कहा कि कंपनियों के बीच दौड़ है कि कौन सबसे खराब परीक्षण आक्रामक तेजी से कर सकता है और जनता के विश्वास पर बुरा प्रभाव डाल सकता है।

करीब दो लाख हैं गंभीर बीमारियों से ग्रसित बच्चे
टीकाकरण को लेकर गठित तकनीकी समिति ने बुधवार से दिशा-निर्देश बनाना शुरू कर दिया है। वयस्कों के साथ ही यह वैक्सीन 12 से 18 वर्ष की आयु वाले उन बच्चों को मिलेगी जिन्हें पहले से कोई न कोई बीमारी है। ऐसे बच्चों की संख्या देश में अधिकतम दो लाख है। इसमें असाध्य और जन्मजात रोगों से ग्रस्त बच्चे भी शामिल हैं।

हालांकि समिति के सदस्यों का मानना है कि यह अनुमानित संख्या है जिसमें बदलाव भी हो सकता है। फिलहाल समिति ने यह दिशा निर्देश तैयार करना शुरू कर दिया है कि टीकाकरण केंद्र पर बच्चों की पहचान किस तरह होनी चाहिए?



सदस्यों का कहना है कि इसी सप्ताह के आखिर में इन पर फैसला हो जाएगा। हालांकि समिति के सदस्यों ने तीसरे परीक्षण को लेकर उठ रहे सवालों पर टिप्पणी से इनकार कर दिया।

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