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टैक्स अदा न करना ‘शर्मनाक’: सुप्रीम कोर्ट

Thu, 27 Apr 2017 03:33 AM IST
amarujala.com- Presented by: संदीप भ्ाट्ट
amarujala.com- Presented by: संदीप भ्ाट्ट Updated Thu, 27 Apr 2017 03:33 AM IST
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you Do not pay taxes its 'shameful' said supreme court

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को शर्मनाक बताया है कि भारतीय लोग टैक्स नहीं देना चाहते। हालांकि शीर्ष अदालत ने कहा कि वह संसद को कानून बनाने से नहीं रोक सकती है। वहीं केंद्र सरकार ने टैक्स चोरी रोकने के लिए आधार को पैन कार्ड और इनकम टैक्स रिटर्न के साथ लिंक करने के कानूनी प्रावधान को सही बताया है।

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न्यायमूर्ति एके सिकरी की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने कहा, ‘हम नागरिक टैक्स अदा नहीं करना चाहते। हमारा इस तरह का समाज है जहां हम कर की चोरी करना चाहते हैं।’ वास्तव में पीठ को जानकारी दी गई कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जनसंख्या का महज एक फीसदी हिस्सा ही कर अदा करता है।
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अपनी टिप्पणी में पीठ ने यह भी कहा कि उस समय सांसदों ने कोई आपत्ति क्यों नहीं जताई जब सरकार ने पैन कार्ड बनाने के लिए आधार को अनिवार्य करने का फैसला किया। पीठ ने कहा, ‘संसद में 542 लोग हैं, उन्होंने इसका विरोध क्यों नहीं किया।
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अगर वे इसका विरोध नहीं कर रहे हैं, तो हम इस मामले में क्यों जाएं?’ शीर्ष अदालत उन दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है जिनमें पैन कार्ड बनवाने और इनकम टैक्स रिटर्न भरने के लिए आधार को जरूरी करने के कानूनी प्रावधान को चुनौती दी गई है।

याचिकाकर्ता सीपीआई नेता बिनॉय विश्वम की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अरविंद दत्तार ने कहा कि आधार अधिनियम में कहीं भी यह जिक्र नहीं है कि यह काले धन या फर्जी पैन कार्ड पर लगाम लगाने के लिए किया गया है।

बावजूद इसके अटॉर्नी जनरल नए कानून के बचाव में यह दलील दे रहे हैं। जिस पर पीठ ने कहा कि आधार अधिनियम का उद्देश्य अलग है। इसका उद्देश्य हाशिये पर रह रहे लोगों तक सरकारी लाभ पहुंचाना है। ऐसे में अधिनियम में कालेधन या पैन कार्ड का जिक्र करना जरूरी नहीं है। जवाब में दत्तार ने कहा कि आधार को अनिवार्य बनाना सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है।

संविधान पीठ ने कह रखा है कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार को जरूरी नहीं बनाया जा सकता। इसके जवाब में अटॉर्नी जनरल ने कहा, अदालत ने यह आदेश तब दिया था जब सरकार ने कानून नहीं बनाया था।


सुनवाई के दौरान पीठ ने बताया कि देश की 99 फीसदी जनसंख्या के पास आधार कार्ड है। जिस पर पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि 99 फीसदी लोगों के लिए आधार कोई मुद्दा नहीं है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सिकरी ने कहा कि उनके पास भी आधार है। सुनवाई बृहस्पतिवार को भी जारी रहेगी।

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