डिप्रेशन के लिए रामबाण इलाज है योग और ध्यान, 58 मरीजों पर किए अध्ययन में एम्स का खुलासा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
योग और ध्यान के जरिए डिप्रेशन (अवसाद) की गंभीर स्थिति से मरीज को न सिर्फ बाहर निकाला जा सकता है बल्कि उसके मस्तिष्क को फिर से पुरानी ताकत लौटाई जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से एक दिन पहले देश के सबसे बड़े अस्पताल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के चिकित्सीय अध्ययन में यह खुलासा हुआ है। प्रमुख अवसादग्रस्तता विकार (एमडीडी) से पीड़ित 58 मरीजों पर हुए अध्ययन में दो अलग अलग समूह बनाए गए थे, जिनमें से एक समूह को सप्ताह में पांच दिन 120 मिनट का रोजाना योग और ध्यान सत्र में शामिल किया जाता था। जबकि दूसरे समूह को दवाएं दी जा रही थीं। 12 सप्ताह बाद योग और ध्यान की बदौलत मरीजों में एक बड़ा सुधार देखने को मिला है।
हालांकि, आयुर्वेद में योग और ध्यान के जरिये अवसाद से छुटकारा मिलने की प्रमाणिकता पहले ही दी जा चुकी हैं। एम्स के मनोरोग विभाग की डॉक्टर रीमा दादा ने बताया, अध्ययन के लिए 84 मरीजों को चयनित किया था, लेकिन 26 मरीजों को पंजीकृत नहीं किया जा सका। इसके कई कारण थे। 58 मरीजों को दो अलग अलग समूह में 29-29 मरीजों में बांटा गया था। एम्स के केंद्रों पर योग और ध्यान के विशेषज्ञों की निगरानी में एक समूह को रोजाना 120-120 मिनट तक सत्र रखा गया था। इसमें आसान, सूर्य नमस्कार, प्राणायाम, ध्यान और शांति मंत्र इत्यादि को शामिल किया था। 12 सप्ताह के अध्ययन के बाद अवसाद की गंभीर स्थिति से पीड़ित मरीजों में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला। इनमें अवसाद के लक्षणों में लगातार कमी आ रही थी।
एमडीडी अवसाद का गंभीर प्रकार
डॉ. रीमा दादा ने बताया कि प्रमुख अवसादतता विकार (एमडीडी) डिप्रेशन का सबसे गंभीर प्रकार है। इसमें लगातार उदासी, निराशा, नाकाबिल होने की होने की भावनाएं मन में घर कर जाती हैं। ये भावनाएं कभी भी अपने आप से दूर नहीं होती हैं। ऐसे मरीज दिन में ज्यादातर वक्त अवसाद से घिरे रहते हैं। इस स्थिति को एमडीडी के रूप में देखते हैं और अब इस अध्ययन से यह साबित हो सकता है कि इस अवसाद के उपचार प्रबंधन में योग व ध्यान को शामिल किया जा सकता है।