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'बढ़ती असहिष्णुता' को वजह बताते हुए एक और लेखक ने ठुकराया कर्नाटक साहित्य अकादमी अवॉर्ड

Thu, 12 Jan 2017 01:23 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 12 Jan 2017 01:23 PM IST
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Writer G. Rajashekhar rejects Karnataka Sahitya Academy award citing ‘increasing intolerance’
बहुवचन भारत के लेखक जी. राजशेखर - फोटो : The Hindu
देश और कर्नाटक में बढ़ती असहिष्णुता के माहौल को देखते हुए लेखक और आलोचक जी. राजशेखर ने कर्नाटक साहित्य अकादमी अवॉर्ड ठुकरा दिया है। राजशेखर के लिए इस पुरस्कार की घोषणा मंगलवार को हुई। 
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खराब स्वास्थ्य से उबर रहे राजशेखर ने 'द हिंदू' से  बात करते हुए कहा कि साल 2015 में कई लेखकों ने देश में बढ़ती असहिष्णुता और हिंसा के चलते पुरस्कार वापस लौटा दिए। तथ्य ये है कि स्थिति सुधरी नहीं है, बल्कि लगातार खराब होती गई है। उन्होंने कहा, 'पुरस्कार लौटाने वाले लेखकों के प्रति समर्थन जताने के लिए मैंने कर्नाटक साहित्य अकादमी अवॉर्ड स्वीकार न करने का फैसला किया है।' 
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बता दें कि कर्नाटक साहित्य अकादमी के लिए जी. राजशेखर की किताब 'बहुवचन भारत' को चुना गया है। इस किताब में समकालीन राजनीतिक मुद्दों और साहित्य पर लेख शामिल हैं। 
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राजशेखर ने कहा, 'दक्षिणपंथी ताकतें असहमति की आवाजों को केवल दबा रही हैं, बल्कि उनकी कोशिश है कि असहमति की कोई भी आवाज न उठे। देश में पहले से ही असहिष्णुता के मुद्दे पर बहस चल रही है। उत्तर प्रदेश के दादरी में मोहम्मद अखलाक के घर पर हमले से लेकर कर्नाटक के तटीय जिले में अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति पर हमला बताता है कि स्थिति बदली नहीं है।'

हतोत्साहित और आशाहीन बनाती है मौजूदा स्थिति

Writer G. Rajashekhar rejects Karnataka Sahitya Academy award citing ‘increasing intolerance’
फाइलः मोहम्मद अखलाक
राजशेखर ने कहा कि अखलाक की मौत के बाद उसके परिवार के सदस्यों खिलाफ ही एफआईआर दर्ज हुई। दक्षिणपंथी ताकतें 'गौ हत्या पर राजनीति' को लेकर आगे बढ़ रही हैं। इस मामले में साल 2016, साल 2015 से भी बुरा रहा है।

उन्होंने कहा, 'देश में दक्षिणपंथी ताकतें लगातार मजबूत होती जा रही हैं। मेरी चिंता ये है कि हर गुजरते दिन के साथ ये ताकतें मजबूत होती जा रही हैं। मैं खुद को हताश और निराश महसूस कर रहा हूं। सेक्युलर आवाजों को कोई सुन नहीं रहा, मैं महसूस करता हूं कि इन आवाजों को एक कोने में धकेल दिया गया है। ऐसी स्थिति मुझे हतोत्साहित और आशाहीन बनाती है। ऐसी स्थिति में मैं महसूस करता हूं कि पुरस्कार स्वीकार करना उपहासपूर्ण होगा। मैं ऐसा नहीं कर सकता।'

बता दें कि दिल्ली से कुछ किलोमीटर की दूरी पर यूपी के दादरी में गौ मांस की अफवाह पर मोहम्मद अखलाक के घर हुए सामूहिक हमले के बाद देश भर में साहित्यकारों ने असहिष्णुता के विरोध में अपने पुरस्कार वापस कर दिए। साहित्यकारों के साथ अन्य पेशे के लोगों ने भी विरोधस्वरुप अपने पुरस्कार वापस किए। 
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