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नहीं रहे नरेंद्र कोहली : उपन्यास ‘दीक्षा’ से शुरू हुआ सांस्कृतिक पुनर्जागरण युग
Sun, 18 Apr 2021 03:24 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 18 Apr 2021 03:24 AM IST
सार
- महाभारत और रामायण की उपन्यास शृंखला से चर्चित हुए डॉ. नरेंद्र कोहली
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स्वर्गीय डॉ. नरेंद्र कोहली
- फोटो : facebook
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विस्तार
साहित्यकार डॉ. नरेंद्र कोहली के उपन्यास दीक्षा के साथ ही हिंदी साहित्य में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का युग शुरू हुआ, जिसे हिंदी साहित्य में नरेंद्र कोहली युग का नाम देने की चर्चा जोर पकड़ रही है।
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उपन्यास, व्यंग्य, नाटक, कहानी के अलावा संस्मरण, निबंध जैसी सभी विधाओं में लगभग सौ पुस्तकें लिखीं। उन्होंने महाभारत की कथा को अपने उपन्यास महासमर के आठ खंडों में समाहित किया।
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पौराणिक एवं ऐतिहासिक चरित्रों की गुत्थियां सुलझाते हुए उन्होंने आधुनिक समाज की बुनियाद रखने में अहम भूमिका निभाई। दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी में स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट पूरा करने के बाद डॉ. कोहली ने कुछ दिन अध्यापन कार्य किया।
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इसके बाद उन्होंने आदि के लेखन से साहित्य में नया मुकाम हासिल किया। कोहली को शलाका सम्मान, साहित्य भूषण, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान पुरस्कार, साहित्य सम्मान तथा पद्मश्री सहित दर्जनों पुरस्कार मिले।
कोहीली अपने विचारों में बेहद स्पष्ट, भाषा में शुद्धतावादी और स्वभाव से सरल लेकिन सिद्धांतों में बेहद कठोर थे। उनके चर्चित उपन्यासों में पुनरारंभ, आतंक, आश्रितों का विद्रोह, साथ सहा गया दुख, मेरा अपना संसार, दीक्षा, अवसर, जंगल की कहानी, संघर्ष की ओर, युद्ध, अभिज्ञान, आत्मदान, प्रीतिकथा, कैदी, निचले फ्लैट में, संचित भूख आदि हैं। संपूर्ण रामकथा को उन्होंने चार खंडों में 1800 पन्नों के वृहद उपन्यास में पेश किया।
कोहली ने ऐसे दौर में लेखन कार्य चुना जब लोग कुशवाहाकांत, मैक्सिम गोर्की, प्रेमचंद, आचार्य चतुरसेन, रमाकांत रथ, अमृता प्रीतम और तोलस्तोय को पढ़ना पसंद करते थे।
ऐसे दौर में उन्होंने पाठकों को भारतीयता की जड़ों तक खींचने की कोशिश की और पौराणिक कथाओं को प्रयोगशीलता, विविधता और प्रखरता के साथ नए कलेवर में पेश किया। संपूर्ण रामकथा के जरिये उन्होंने भारत की सांस्कृतिक परंपरा, समकालीन मूल्यों और आधुनिक संस्कारों का अहसास कराया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा, सुप्रसिद्ध साहित्यकार नरेंद्र कोहली जी के निधन से अत्यंत दुख पहुंचा है, साहित्य में पौराणिक और ऐतिहासिक चरित्रों के जीवंत चित्रण के लिए वे हमेशा याद किए जाएंगे, शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं, ओम शांति!
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शोक जताते हुए ट्वीट किया, डॉ कोहली के निधन से बहुत दुख हुआ। हिंदी साहित्य जगत में उनका विशेष योगदान रहा है। उन्होंने हमारे पौराणिक आख्यानों को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में विश्व के समक्ष प्रस्तुत किया। पद्मश्री सम्मानित साहित्यकार के परिवार और पाठकों के प्रति मेरी शोक संवेदना।