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चिंताजनक: सदी के अंत तक आधे रह जाएंगे खेत, बढ़ती आबादी और जलवायु संकट के कारण खाद्य सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा

Mon, 11 Aug 2025 05:12 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Mon, 11 Aug 2025 05:12 AM IST
सार

भारत में कृषि भूमि का दायरा लगातार घट रहा है। कृषि मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 1970-71 में भारत में लगभग 18.2 करोड़ हेक्टेयर भूमि खेती के लिए उपयोग होती थी, जो 2020-21 में घटकर 14 करोड़ हेक्टेयर से भी कम रह गई। खेतों का औसत आकार 1970-71 में 2.28 हेक्टेयर था, जो 2018-19 में घटकर 1.08 हेक्टेयर रह गया।

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Worrying: food security is under threat due to increasing population and climate crisis
बारिश के बाद धान के खेत में लगा पानी

विस्तार

दुनिया में खेत सिकुड़ रहे हैं, किसान कम हो रहे हैं और खेती से युवा पीढ़ी का मोहभंग हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय अध्ययन चेतावनी देते हैं कि 2100 तक खेतों की संख्या आधी रह जाएगी जबकि वैश्विक जनसंख्या और खाद्य मांग तेजी से बढ़ेगी।

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भारत के लिए यह चेतावनी और भी गंभीर है क्योंकि यहां हर दिन हजारों किसान खेती छोड़ रहे हैं और कृषि भूमि घट रही है। वैश्विक कृषि संकट के संकेत अब धीरे-धीरे और स्पष्ट होते जा रहे हैं। किसानों की औसत आयु 55 वर्ष है जो कई देशों में नौकरी करने वालों की सेवानिवृत्ति आयु के बराबर है। सीमित कृषि भूमि और तेजी से हो रहा जलवायु परिवर्तन इस पेशे को दोहरी चुनौती दे रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के अनुसार 1991 में वैश्विक रोजगार में कृषि का हिस्सा 43% था जो 2023 में घटकर सिर्फ 26% रह गया।  औसतन हर दिन करीब 2,000 किसान खेती छोड़ रहे हैं। वर्ल्ड फार्मर्स ऑर्गनाइजेशन के अध्यक्ष अर्नोल्ड प्यूश पेस ड एलिसैक का कहना है, अगर यही रुझान जारी रहा तो रोजगार और खाद्य आपूर्ति दोनों पर गंभीर असर पड़ेगा। खेती की नींव भूमि है, जो तेजी के साथ औद्योगिकरण, शहरीकरण और बुनियादी ढांचे के लिए भी इस्तेमाल हो रही है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन फसल चक्र को अस्थिर कर रहा है, जिससे पैदावार पर दबाव बढ़ा है।
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भारत में संकेत और भी गंभीर
भारत में कृषि भूमि का दायरा लगातार घट रहा है। कृषि मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 1970-71 में भारत में लगभग 18.2 करोड़ हेक्टेयर भूमि खेती के लिए उपयोग होती थी, जो 2020-21 में घटकर 14 करोड़ हेक्टेयर से भी कम रह गई। खेतों का औसत आकार 1970-71 में 2.28 हेक्टेयर था, जो 2018-19 में घटकर 1.08 हेक्टेयर रह गया। छोटे और सीमांत किसान (2 हेक्टेयर से कम भूमि वाले) अब कुल किसानों का 86% हिस्सा बनाते हैं, लेकिन इनके पास केवल 47% कृषि भूमि है। नीति आयोग की एक रिपोर्ट चेतावनी देती है कि 2030 तक भारत में प्रति व्यक्ति उपलब्ध कृषि भूमि 0.12 हेक्टेयर से भी कम रह जाएगी जबकि 1960 में यह 0.34 हेक्टेयर थी।
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पंजाब, हरियाणा व पश्चिमी यूपी के किसान ज्यादा छोड़ रहे खेती
भारत में खेती छोड़ने की दर राज्यों के बीच काफी भिन्न है, और यह मुख्य रूप से भूमि उपलब्धता, सिंचाई सुविधाओं, शहरीकरण और वैकल्पिक रोजगार के अवसरों पर निर्भर करती है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (एनएसएस) और कृषि मंत्रालय के आकलनों के मुताबिक महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में खेती छोड़ने की दर अपेक्षाकृत अधिक है, जहां तेजी से शहरी विस्तार, औद्योगिक परियोजनाएं और पानी की कमी किसानों को वैकल्पिक व्यवसाय की ओर धकेल रही है। पूर्वी भारत के राज्यों जैसे बिहार, झारखंड और ओडिशा में यह दर अपेक्षाकृत कम है, लेकिन यहां भी युवाओं का कृषि से मोहभंग बढ़ रहा है और बड़ी संख्या में वे प्रवासी मजदूर के रूप में बाहर जा रहे हैं।

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