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असम में जापानी एयरफोर्स की चूक: आसमान से पैम्फ्लेट गिरा कर जताया खेद, चाय बागान पर गिराए थे पांच बम

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 09 Oct 2021 04:45 PM IST
सार

डीएम ग्रुप ऑफ कंपनी के डायरेक्टर कमलेश सिंह, जिनके उस इलाके में चाय के बागान थे, उन्होंने बताया, जापान और ब्रिटिश आर्मी के बीच जमकर लड़ाई हो रही थी। सिलचर रेलवे स्टेशन पर भाप के इंजन वाली रेलगाड़ी चलती थी। जब वह इंजन चलता था तो बहुत तेजी से धुआं निकलता था। वैसा ही धुआं चाय बागान की फैक्ट्री में लगी चिमनी से बाहर आ रहा था। जापानी एयरफोर्स ने उस चिमनी को रेलगाड़ी समझ लिया...

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world war 2: japan air force and Azad hind fauj fought together against british army, read connection with assam derby tea estate
जापानी लड़ाकू जहाज - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

आजादी से पहले सात अप्रैल 1944 के दिन, जापानी एयरफोर्स ने असम में पांच बम गिराए थे। उन दिनों ब्रिटिश आर्मी के खिलाफ जापान की सेना और आजाद हिंद फौज मिल कर लड़ रहे थे। जापानी एयरफोर्स ने बंगाल रेलवे स्टेशन उड़ाने का टारगेट तय किया था। सिलचर रेलवे स्टेशन से भाप का इंजन चलता था। उसके करीब डर्बी 'टीई' गांव में चाय के बागान थे। बागान के भीतर फैक्ट्री थी। वहां से धुआं निकलते देख जापान की एयरफोर्स ने उसे स्टेशन समझ लिया। एकाएक वहां पांच बम गिरा दिए गए। चूंकि डर्बी गार्डन के मैनेजर के पास 'ग्राउंड टेलीकॉम सर्विस' थी, तो उन्होंने जापानी फौज तक यह संदेश भिजवाया कि उन्होंने चाय के बागान में बमबारी क्यों कर दी। जापानी की एयरफोर्स ने उस इलाके में दो दिन बाद आसमान से पैम्फ्लेट गिराए। उनमें लिखा था कि यह भूलवश हुआ है। वे इसके लिए माफी मांगते हैं, खेद व्यक्त करते हैं। सॉरी फॉर बॉम्बिंग, रिग्रेट।

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डीएम ग्रुप ऑफ कंपनी के डायरेक्टर कमलेश सिंह, जिनके उस इलाके में चाय के बागान थे, उन्होंने बताया, आजादी से पहले डर्बी में चाय का अच्छा कारोबार होता था। वह इलाका असम की बराक घाटी के कछार जिले में पड़ता है। उसके निकट सिलचर का रेलवे स्टेशन था। डर्बी में हमारे ही लोगों के बागान थे। जापान और ब्रिटिश आर्मी के बीच जमकर लड़ाई हो रही थी। सिलचर रेलवे स्टेशन पर भाप के इंजन वाली रेलगाड़ी चलती थी। जब वह इंजन चलता था तो बहुत तेजी से धुआं निकलता था। वैसा ही धुआं चाय बागान की फैक्ट्री में लगी चिमनी से बाहर आ रहा था। जापानी एयरफोर्स ने उस चिमनी को रेलगाड़ी समझ लिया।

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बमबारी से बना तालाब

बतौर कमलेश सिंह, फैक्ट्री में चारों तरफ लाइटें लगी हुई थीं। इससे जापानी हवाई जहाजों के पायलटों को पक्का यकीन हो गया कि ये वही रेलवे स्टेशन है। उन्होंने वहीं पर बमबारी कर दी। ये सब बातें रिपोर्ट हुई हैं। हालांकि कारखाना उस बमबारी में बच गया। बम के टुकड़े पड़े हुए थे, जिन्हें बहुत दिनों बाद कबाड़ में बेच दिया गया। बमबारी में बंगला भी सुरक्षित बच गया। बाद में जब एयरफोर्स ने सर्वे किया तो उन्होंने मालूम हुआ कि रेलवे स्टेशन तो सुरक्षित है। उस वक्त डर्बी गार्डन के मैनेजर के पास जिले के सभी चाय बागानों का नियंत्रण होता था, इसलिए उसे 'ग्राउंड टेलीकॉम सर्विस' मुहैया कराई गई थी। उसके द्वारा जापान को संदेश भेजा गया कि आपने बिना किसी वजह के बागानों पर बमबारी कर दी।

घटना के तीसरे दिन जापान के हवाई जहाजों ने कारखाने के ऊपर पैम्फ्लेट बरसाए। इन पर लिखा था कि वे इस घटना के लिए माफी मांगते हैं, खेद जताते हैं। वे पैम्फ्लेट बहुत से लोगों ने पढ़े थे। घटना की रिपोर्टिंग में उनका जिक्र हुआ है। कारखाने पर जो बम गिराए गए थे, वहां पोखर यानी तालाब बन गया था। दो बम कारखाने के निकट रह रहे स्थानीय नागरिक राजेश के घर के पास गिरे थे। वहां दलदल बन गया था। कमलेश सिंह के मुताबिक, ये दोनों स्थल आज भी वैसे ही हैं। उन्हें बहुत से लोग देखने आते हैं। चूंकि ये घटना इतिहास में अपनी खास जगह नहीं बना सकी, इसलिए अधिक लोग इससे अनभिज्ञ हैं।

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