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Hindi News ›   India News ›   World Population Day: If the rule of two children is implemented, we will deal with Corona, will also bring China-Pak on the way

विश्व जनसंख्या दिवस: 'दो बच्चे' का नियम लागू हो तो कोरोना से निपटे लेंगे, चीन-पाक को भी ले लाएंगे रास्ते पर

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sun, 11 Jul 2021 08:05 PM IST
सार

जनसंख्या वृद्धि के कारण हर वर्ष 6.30 करोड़ लोग गरीबी में चले जाते हैं। अगर इसे नहीं रोका गया तो भयावह स्थिति का अंदाजा लगा सकते हैं। 

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World Population Day: If the rule of two children is implemented, we will deal with Corona, will also bring China-Pak on the way
world population day 2020 quotes - फोटो : रोहित झा, अमर उजाला

विस्तार

देश में आज इस बहस का दायरा विस्तृत होता जा रहा है। परिवार को दो बच्चों तक सीमित रखने की बात गंभीरता से होने लगी है। कारण देश की बहुत सारी समस्याओं की मुख्य वजह जनसंख्या है। सरकारी कागजों में जनसंख्या का जो आंकड़ा दर्ज है, असल में तो उससे कहीं अधिक है। सीआरपीएफ के पूर्व एसआई तमाल सान्याल जो कि जनसंख्या कम करने को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ पत्राचार करते रहे हैं, का कहना है, अगर 'दो बच्चों' का नियम लागू हो जाए तो कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से भी निपटा जाएगा और चीन व पाकिस्तान, जो कि आए दिन सिर उठाते रहते हैं, को भी रास्ते पर लाया जा सकेगा। 

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पिछले दिनों मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय के कुलपति फिरोज बख्त अहमद ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रभावी, नियम, विधान व दिशानिर्देश बनाने की मांग की है। इस याचिका में देश की जनसंख्या 150 करोड़ से भी अधिक बताई गई है। तमाल सान्याल का कहना है, भारत में जनसंख्या अधिक होने के कारण सभी लोगों को सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। नतीजा, आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंस के चलते हर वर्ष 6.30 करोड़ लोग गरीबी में चले जाते हैं। अगर इसे नहीं रोका गया तो भयावह स्थिति का अंदाजा लगा सकते हैं। 

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50 फीसदी समस्याओं की जड़ जनसंख्या विस्फोट
जनसंख्या विस्फोट के कारण भारत विकास के सभी पैमानों पर पिछड़ता जा रहा है। भारत में 50 फीसदी समस्याओं की जड़ जनसंख्या विस्फोट ही है। जनसंख्या विस्फोट के कारण अनेक लोगों को स्वच्छ हवा व पेयजल के अधिकार से वंचित रहना पड़ता है। स्वास्थ्य और शिक्षा का अधिकार भी प्रभावित हो रहा है। 

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स्वामी जितेंद्रानंद ने की सुप्रीम कोर्ट से यह मांग

कुछ माह पहले स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की मांग की थी। अपनी याचिका में स्वामी जितेद्रानंद ने कहा, देश की आधी समस्याओं के लिए सीधे तौर पर अनियंत्रित गति से बढ़ रही आबादी जिम्मेदार है। इसके चलते सरकार, बढ़ती आबादी को न तो रोजगार उपलब्ध करा पा रही है और न ही सबके भोजन-आवास और पानी जैसी जरूरतें पूरी हो पा रही है। लोगों की मौलिक जरुरतों की पूर्ति के लिए जल्द से जल्द सख्त जनसंख्या नियंत्रण कानून लाया जाना चाहिए। उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण कानून न लाए जाने की स्थिति में देश के टूटने की भी आशंका जताई है। 

तमाल सान्याल बताते हैं कि उन्होंने 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह आग्रह किया था कि देश की तरक्की के लिए सख्त जनसंख्या नियंत्रण कानून बहुत जरूरी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने
जवाब में कहा, इस पर गंभीरता से काम हो रहा है। फिल्म स्टार अमिताभ बच्चन को इसके प्रचार प्रसार के लिए ब्रांड एम्बेडर बनाया गया है। अब उत्तर प्रदेश सरकार ने 'उत्तर प्रदेश पॉपुलेशन (कंट्रोल, स्टैबिलाइजेशन एंड वेलफेयर) बिल' का मसौदा तैयार किया है। 

जनसंख्या नियंत्रण के लिए अलग मंत्रालय की मांग  
प्रधानमंत्री मोदी को लिखी अपनी चिट्ठी में सान्याल ने यह सुझाव भी दिया था कि जनसंख्या नियंत्रण कानून को लागू करने के लिए केंद्र सरकार को एक अलग मंत्रालय का गठन करना चाहिए। उन्होंने अपने पत्र में जिन सुझावों का जिक्र किया था, कुछ वैसे ही सुझाव उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने ड्राफ्ट में शामिल किए हैं। इस तरह के कानून को अस्तित्व में आने के एक साल बाद लागू किया जाना चाहिए। साथ ही जिस धर्म में बहु विवाह प्रथा है, उसमें पूरे परिवार को एक ही 'फैमिली' माना जाए। 

स्वास्थ्य सुविधाएं सबकी पहुंच से बाहर

कोरोना में फैली अव्यवस्था का जिक्र करते हुए सान्याल कहते हैं कि सभी लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं नहीं पहुंच सकी। सरकार ने योजना तो बना दी है, लेकिन जनसंख्या इतनी ज्यादा है कि लोगों को निजी संस्थानों की मदद लेनी पड़ती है। सरकारी अस्पतालों में टेस्ट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में लोग निजी अस्पताल में पहुंच जाते हैं। ये उनकी जेब पर भारी पड़ता है। जो खर्च उनकी सूची में शामिल नहीं होता, उन्हें वह करना पड़ता है। इसी तरह की दिक्कतों के चलते हर साल करोड़ों लोग गरीबी में चले जाते हैं। 
 

इतनी बड़ी जनसंख्या के लिए स्वास्थ्य बजट जीडीपी का 1.4 प्रतिशत तक ही पहुंच सका है। इसमें राज्यों का शेयर 0.9 प्रतिशत और केंद्र का 0.5 प्रतिशत है। केंद्र सरकार ने इस प्रतिशत को 2025 तक ढाई फीसदी करने का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य तभी पूरा हो सकता है, जब राज्य अपने बजट का आठ प्रतिशत स्वास्थ्य पर खर्च करें। मौजूदा परिस्थितियों में यह संभव होता नहीं दिखता।   

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, देशों की जनसंख्या ग्रोथ को इस तरह समझें 

1960 में भारत की जनसंख्या 45.5 करोड़ थी। दस साल बाद वह 55.72 करोड़ हो गई। इसी अवधि में चीन की जनसंख्या 66.71 करोड़ से 81.83 करोड़ हो गई। अमेरिका की बात करें तो यह जनसंख्या 18.07 करोड़ से 20.51 करोड़ पर पहुंची। 

1990 में भारत की जनसंख्या 83.33 करोड़ थी। दस साल बाद वह 105.6 करोड़ हो गई। इसी अवधि में चीन की जनसंख्या 113.52 करोड़ से 126.26 करोड़ हो गई। अमेरिका में यह जनसंख्या 25.01 करोड़ से 28.22 करोड़ पर चली गई। 

2010 में भारत की जनसंख्या 123.43 करोड़ थी। साल 2019 में वह 136.64 करोड़ हो गई। इसी अवधि में चीन की जनसंख्या 133.77 करोड़ से 139.77 करोड़ हो गई। अमेरिका की बात करें तो यह जनसंख्या 2010 में 30.93 करोड़ से 2019 में 32.82 करोड़ पर पहुंची है। 

काश, 1950 में बन जाता यह नियम
तमाल सान्याल बताते हैं, 1950 में अगर भारत में दो बच्चों का नियम बन जाता तो आज जनसंख्या विस्फोट की स्थिति पैदा नहीं होती। आज देश की आबादी 50-60 करोड़ तक ही पहुंच पाती। केंद्र सरकार को जल्द से जल्द जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कानून बनाना होगा। कोरोनाकाल में लोगों ने जो भयानक मंजर देखा है, उसका एक बड़ा कारण अधिक आबादी ही रही है। आगे यूं ही चलता रहा तो लोगों को स्वास्थ्य के अलावा हवा, पानी, आवास, शिक्षा व रोजगार संकट से भी जूझना पड़ेगा। 
 

90 हजार पदों के लिए पौने तीन करोड़ आवेदन 

ये बढ़ती जनसंख्या का ही नतीजा है कि रेलवे में तीन साल पहले जब 90 हजार पदों के लिए भर्ती निकली तो उस वक्त 2 करोड़ 80 लाख आवेदकों ने फार्म अप्लाई किया था। एक जनवरी 2018 को दुनिया में 3 लाख 86 हजार बच्चे पैदा हुए थे। इनमें से भारत में 69070, चीन में 44760 और नाइजीरिया में 20210 बच्चे पैदा हुए थे। 

यूपी व महाराष्ट्र की साझा आबादी अमेरिका से ज्यादा
ब्राजील, जिसका नाम तेजी से बढ़ती जनसंख्या वाले देशों में शामिल है, उसकी आबादी यूपी से कम है। अगर यूपी और महाराष्ट्र को मिला दें तो वह जनसंख्या अमेरिका से अधिक हो जाती है। लैंसेट की रिपोर्ट बताती है, इस सदी के अंत तक में सबसे ज़्यादा आबादी वाले पांच देश हैं। इनमें भारत, नाइजीरिया, चीन, अमरीका और पाकिस्तान शामिल हैं। भारत की जनसंख्या वृद्धि दर में साल 2047 के बाद से कम हो सकेगी। तब तक भारत की जनसंख्या बढ़कर अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच जाएगी। उस वक़्त देश की जनसंख्या करीब 1.61 अरब होगी। मौजूदा रफ़्तार जारी रही तो 2027 में भारत, चीन को पछाड़ कर दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा। भारत तब दुनिया में सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश होगा। ऐसे में उसे किन तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, ये सोचकर डर पैदा होने लगता है।

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