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WMO: अप्रैल 2024 तक जारी रहेगा अल-नीनो का प्रभाव, चुनौतियों का करना पड़ेगा सामना; इस महीने से कम होगा असर

Wed, 08 Nov 2023 06:47 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Wed, 08 Nov 2023 06:47 PM IST
सार

डब्ल्यूएमओ के महासचिव प्रोफेसर पेटेरी तालास ने बताया कि वैश्विक तापमान पर अल नीओ का प्रभाव आम तौर पर इसके बनने के अगले साल में होता है। इस मामले में 2024 में इस साल की तुलना में अगला साल और भी अधिक गर्म हो सकता है।

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World Meteorological Organisation says EL Nino to continue until April 2024
अल-नीनो - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

अगले साल भी अल-नीनो की स्थितियां जारी रहेंगी।  विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने अल-नीनो को लेकर नया अपडेट जारी किया है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने कहा है कि अल नीओ  की घटनाएं कम से कम अप्रैल 2024 तक जारी रहने की उम्मीद है। अल-नीनो मौसम के मिजाज को प्रभावित करेगी। इससे जमीन और समुद्र के तापमान में और बढ़ोतरी होगी। डब्ल्यूएमओ ने इस संदर्भ में जारी एक बयान में बताया कि इस साल जुलाई-अगस्त के दौरान अल नीओ की शुरुआत हुई थी। सितंबर तक इसका प्रभाव मध्यम तीव्रता तक पहुंच गया था। इसमें यह भी कहा गया है कि नवंबर 2023 से जनवरी 2024 के बीच इसके चरम पर पहुंचने की संभावना है। इतना ही नहीं, डब्ल्यूएमओ ने कहा कि 90 प्रतिशत संभावना इस बात की भी है कि आगामी उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों और दक्षिणी गोलार्ध में गर्मी के दौरान अल-नीनो की स्थितियां बनी रहेंगी। 

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विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने अपने बयान में कहा कि अल-नीनो के ऐतिहासिक पैटर्न और अभी के इसके प्रभाव के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि आगामी उत्तरी वसंत के दौरान अल नीओ का प्रभाव धीरे-धीरे कम हो जाएगी। 
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डब्ल्यूएमओ के महासचिव प्रोफेसर पेटेरी तालास ने बताया कि जून के बाद से जमीनी और समुद्री तापमान में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के परिणामस्वरूप साल 2023 अब  सबसे गर्म साल होने की राह पर है। उन्होंने कहा कि वैश्विक तापमान पर अल नीओ का प्रभाव आम तौर पर इसके बनने के अगले साल में होता है। इस मामले में 2024 में इस साल की तुलना में अगला साल और भी अधिक गर्म हो सकता है। इसके परिणामस्वरूप कुछ क्षेत्रों में गर्मी की लहरें, सूखा, जंगल की आग, भारी बारिश और बाढ़ जैसी चरम घटनाएं बढ़ेंगी।  
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इससे पहले, भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि अल-नीनो की स्थितियां अगले साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम को प्रभावित नहीं करेंगी। अल नीओ की तीव्र स्थिति के बीच, भारत में इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम के दौरान औसत से कम संचयी वर्षा दर्ज की गई। 

 क्या है अल नीनो? 
अल नीनो सदर्न ऑसिलेशन (ईएनएसओ) का एक हिस्सा है, जो मौसम और समुद्र से संबंधित एक प्राकृतिक जलवायु घटना को बताता है। ईएनएसओ के दो चरण होते हैं- अल नीनो और ला नीना। अल नीनो का अर्थ स्पेनिश भाषा में 'छोटा लड़का' है और यह एक गर्म चरण है। वहीं, ला नीना का मतलब 'छोटी लड़की' होता है जो ठंड का चरण है।

प्रशांत महासागर में पेरू के निकट समुद्री तट के गर्म होने की घटना अल-नीनो कहलाती है। आसान भाषा में समझे तो समुद्र का तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों में जो बदलाव आते हैं उस समुद्री घटना को अल नीनो का नाम दिया गया है। इस बदलाव के कारण समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 4-5 डिग्री ज्यादा हो जाता है।


अल नीनो भारत में मानसून को कैसे प्रभावित करता है?
वैश्विक परिदृश्य में देखें तो अल नीनो घटनाओं के दौरान, दक्षिण पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और मध्य अफ्रीका जैसी जगहों पर शुष्क मौसम का अनुभव होता है। वहीं भारत में यह देखा गया है कि अल नीनो वर्षों के दौरान मानसून कमजोर हो जाता है।  अल नीनो मौसम की घटनाएं पिछले 70 वर्षों में 15 बार हुई हैं, जिनमें से भारत में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश केवल छह बार हुई है। पिछले चार अल नीनो वर्षों में, भारत ने लगातार सूखे की स्थिति और वर्षा में भारी कमी का सामना किया है। मॉनसून की बारिश कमजोर, मध्यम या मजबूत अल नीनो घटनाओं के आधार पर भी अलग-अलग हो सकती है। 1997 में, एक मजबूत अल नीनो के कारण भारत में सामान्य वर्षा का 102 प्रतिशत रिकॉर्ड किया था।

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