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कोरोना पॉजिटिव मां करा सकती हैं बच्चे को स्तनपान, हाथ धोना और मास्क पहनना जरूरी
Sat, 01 Aug 2020 08:28 AM IST
Tanuja Yadav
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Tanuja Yadav
Updated Sat, 01 Aug 2020 08:28 AM IST
सार
- विश्व स्तनपान दिवस आज, मां के दूध से नहीं फैलता कोविड-19
- कोरोना पॉजिटिव मां करा सकती है शिशु को स्तनपान
- नवजात को छूने से पहले हाथ धोना, मास्क पहनना जरूरी
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विस्तार
अब कोरोना पॉजिटिव होने पर भी मां अपने नवजात बच्ते को दूध पिला सकती है। मां के दूध से नवजात को कोरोना संक्रमण नहीं हो सकता। हालांकि कुछ जरूरी नियमों का पालन करते हुए स्तनपान कराना होगा। यूनिसेफ की पोषण विशेषज्ञ रिचा सिंह पांडेय ने विश्व स्तनपान दिवस की पूर्व संध्या पर यह जानकारी दी।
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'संक्रमण के समय स्तनपान' थीम पर आयोजित मीडिया समिट में रिचा सिंह ने बताया कि कोरोना संक्रमित मां अपने नवजात बच्चे को दूध पिला सकती है। उसे सिर्फ ध्यान रखना होगा कि वह नवजात को छूने से पहले अपने हाथ साबुन से 20 सेकंड तक जरूर धोए, दूध पिलाते समय मास्क जरूर पहने, मां जिस भी वस्तु या जगह को छुए, उसे विसंक्रमित किया जाए। इससे शिशु के संक्रमित होने की संभावना कम रहती है।
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उन्होंने बताया कि ब्रेस्ट फीडिंग प्रोमोशन नेटवर्क ऑफ इंडिया (बीपीएनआई) के अनुसार डब्लूएचओ ने स्पष्ट किया है कि मां के दूध से कोविड-19 नहीं फैलता है। जन्म के बाद मां और बच्चे का त्वचा से त्वचा छूने की भी अनुमति है। कोई भी कोविड-19 संक्रमित या संदिग्ध मां अपने शिशु को जन्म देने के पहले घंटे के अंदर स्तनपान करा सकती है।
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ऐसा करने से शिशु के अंदर एंटीबॉडी और जरूरी पोषक तत्व पहुंच जाते हैं जो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। अगर मां ज्यादा बीमार है और शिशु को सीधे स्तनपान नहीं करा सकती तो उसके दूध को कप में निकालकर शिशु को पिलाया जा सकता है। अगर मां आईसीयू में है और स्तनपान की स्थिति में नहीं हो तो ऐसे में किसी स्वस्थ मां का दूध शिशु को दिया जा सकता है।
मां का दूध है सबसे बेहतर
रिचा सिंह बताती है कि मां का दूध और गाय-बकरी के दूध को लेकर बहुत सारी भ्रांतियां हैं। लोग गाय का दूध पचने में आसान बताते हैं, लेकिन शोध से पता चला है कि मां का दूध ही शिशु के लिए सबसे बेहतर है। पहले छह माह तक मां का दूध बच्चे को पूरी तरह से पोषण देता है।
उसे ऊपरी किसी भी तरह का पोषण देने की जरूरत नहीं है। छह माह के बाद बच्चे को पूरक आहार देना चाहिए। मां के दूध में लैक्टोज सबसे अधिक होता है और यह बच्चे को तुरंत ताकत देता है। मां के दूध में एंटी इन्फेक्शन प्रोटीन अधिक होता है। उसमें मौजूद लाइपेज एंजाइम अधिक आसानी से पच जाता है।
बच्चा गाय के दूध में मौजूद आयरन से जल्दी मां के दूध में मौजूद आयरन को पचा लेता है। एक स्वस्थ बच्चा का प्रतिमाह 500 ग्राम वजन बढ़ता है।
डिब्बाबंद दूध के फ्री सैंपल बांटने पर रोक
यूनिसेफ के विशेषज्ञ रवीश शर्मा ने बताया कि कोरोना काल में भ्रांतियों के चलते डिब्बाबंद दूध और कृत्रिम दूध का सहारा लिया जा रहा है। कई जगह कंपनियों ने डिब्बाबंद दूध का सैंपल फ्री बांटने की कोशिश की है जिससे उनकी बिक्री बढ़ जाए। इसका पता चलने पर उत्तर प्रदेश शासन ने आईएमएस एक्ट के तहत डिब्बाबंद दूध के फ्री सैंपल, दूध की बोतल और कृत्रिम आहार देने पर रोक लगा दी है। मुख्य सचिव ने इसके लिए दिशानिर्देश जारी किया है।