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World Aids Days: देश की 70 फीसदी आबादी को एड्स की जानकारी नहीं, बचाव-रोकथाम के लिए लोगों का जागरूक होना जरूरी
Fri, 01 Dec 2023 06:16 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Fri, 01 Dec 2023 06:16 AM IST
सार
सबसे बड़ी हैरानी वाली बात यह है कि 24 लाख एड्स मरीजों में से करीब 5.5 लाख ऐसे हैं, जिन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं है कि वे इस घातक बीमारी से ग्रसित हैं। उल्लेखनीय है कि पहली बार वर्ल्ड एड्स दिवस 01 दिसंबर, 1988 को मनाया गया था।
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एचआईवी एड्स
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
‘एड्स...जानकारी ही बचाव है...’ यह नारा खुद को मुंह चिढ़ा रहा है। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) की संकलक : स्टेटस ऑफ नेशनल एड्स रेस्पांस 2022 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 24.01 लाख लोग एचआईवी/एड्स संक्रमित हैं। हर साल एचआईवी संक्रमण के 62,967 नए मामले दर्ज होते हैं और हर साल 41,968 लोगों की मौत होती है। बावजूद इसके 15 साल से चल रहे जागरूक अभियान की हकीकत यह है कि देश में 69 फीसद पुरुषों और 78 फीसदी महिलाओं को एचआईवी/एड्स के बारे में व्यापक जानकारी ही नहीं है।
सबसे बड़ी हैरानी वाली बात यह है कि 24 लाख एड्स मरीजों में से करीब 5.5 लाख ऐसे हैं, जिन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं है कि वे इस घातक बीमारी से ग्रसित हैं। उल्लेखनीय है कि पहली बार वर्ल्ड एड्स दिवस 01 दिसंबर, 1988 को मनाया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2022 के डाटा के मुताबिक, दुनियाभर में लगभग 3.6 करोड़ लोग एचआईवी पॉजिटिव हैं। इससे बचाव और इसकी रोकथाम के लिए लोगों का जागरूक होना जरूरी है। इस मकसद के साथ वर्ल्ड एड्स दिवस मनाने की शुरुआत की गई थी।
90-90-90 का लक्ष्य मीलों दूर
2015 में संयुक्त राष्ट्र ने 2030 तक इस बीमारी को समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। इसके लिए यूएनएड्स ने 90–90–90 लक्ष्य निर्धारित किया। लक्ष्य के अनुसार, 2030 तक यह सुनिश्चित किया जाना है कि 90 फीसदी लोग अपनी एचआईवी स्थिति के बारे में जान सकें। एचआईवी पॉजिटिव वाले 90 फीसदी लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच सकें और 90 फीसदी लोग जिन्हें इलाज मिल रहा है उनमें एचआईवी वायरस के प्रसार को कम किया जा सके।
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सितंबर 2018 में लागू हुआ अधिनियम
भारत में एचआईवी व एड्स अधिनियम, सितंबर 2018 में लागू हुआ। यह कानून देश में एचआईवी और एड्स के प्रसार को रोकने और नियंत्रित करने का प्रयास करता है। साथ ही संक्रमित व्यक्तियों के खिलाफ भेदभाव को समाप्त करने का कार्य भी करता है।
निपटने के साझेदारी मजबूत करें सदस्य देश- डब्ल्यूएचओ
डब्ल्यूएचओ ने कहा कि साल 2030 तक एचआईवी के उन्मूलन में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए साझेदारी मजबूत करते रहें और समुदायों को सशक्त बनाएं। दुनियाभर में करीब 3.9 करोड़ लोग एचआईवी के साथ रह रहे हैं।
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सबसे बड़ी हैरानी वाली बात यह है कि 24 लाख एड्स मरीजों में से करीब 5.5 लाख ऐसे हैं, जिन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं है कि वे इस घातक बीमारी से ग्रसित हैं। उल्लेखनीय है कि पहली बार वर्ल्ड एड्स दिवस 01 दिसंबर, 1988 को मनाया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2022 के डाटा के मुताबिक, दुनियाभर में लगभग 3.6 करोड़ लोग एचआईवी पॉजिटिव हैं। इससे बचाव और इसकी रोकथाम के लिए लोगों का जागरूक होना जरूरी है। इस मकसद के साथ वर्ल्ड एड्स दिवस मनाने की शुरुआत की गई थी।
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90-90-90 का लक्ष्य मीलों दूर
2015 में संयुक्त राष्ट्र ने 2030 तक इस बीमारी को समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। इसके लिए यूएनएड्स ने 90–90–90 लक्ष्य निर्धारित किया। लक्ष्य के अनुसार, 2030 तक यह सुनिश्चित किया जाना है कि 90 फीसदी लोग अपनी एचआईवी स्थिति के बारे में जान सकें। एचआईवी पॉजिटिव वाले 90 फीसदी लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच सकें और 90 फीसदी लोग जिन्हें इलाज मिल रहा है उनमें एचआईवी वायरस के प्रसार को कम किया जा सके।
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सितंबर 2018 में लागू हुआ अधिनियम
भारत में एचआईवी व एड्स अधिनियम, सितंबर 2018 में लागू हुआ। यह कानून देश में एचआईवी और एड्स के प्रसार को रोकने और नियंत्रित करने का प्रयास करता है। साथ ही संक्रमित व्यक्तियों के खिलाफ भेदभाव को समाप्त करने का कार्य भी करता है।
निपटने के साझेदारी मजबूत करें सदस्य देश- डब्ल्यूएचओ
डब्ल्यूएचओ ने कहा कि साल 2030 तक एचआईवी के उन्मूलन में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए साझेदारी मजबूत करते रहें और समुदायों को सशक्त बनाएं। दुनियाभर में करीब 3.9 करोड़ लोग एचआईवी के साथ रह रहे हैं।