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Sikkim: उत्तरी सिक्किम से संपर्क बहाली के लिए युद्धस्तर पर काम जारी; तीस्ता नदी पर दो बेली पुल में से एक तैयार
Sun, 22 Oct 2023 06:50 PM IST
एन अर्जुन
अमर उजाला ब्यूरो, गंगटोक/कोलकाता
अमर उजाला ब्यूरो, गंगटोक/कोलकाता
Published by: एन अर्जुन
Updated Sun, 22 Oct 2023 06:50 PM IST
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सिक्किम में आए बाढ़ के बाद उत्तरी सिक्किम को एक बार फिर से जोड़ने के लिए भारतीय सेना बीआरओ, प्रशासन और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर युद्ध स्तर पर प्रयास कर रही है। चुंगथांग को वैकल्पिक मार्ग से जोड़ने के प्रयास में मंगन में पहला बेली ब्रिज स्थापित किया है।
कोलकाता में रक्षा विभाग के प्रवक्ता विंग कमांडर हिमांशु तिवारी ने बताया कि भारतीय सेना के जवान बीआरओ के साथ-साथ नागरिक प्रशासन और स्थानीय लोगों की सहायता से उत्तरी सिक्किम को फिर से जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चला रहे हैं। जहां बीआरओ मुख्य मार्ग मंगन-तुंग-चुंगथांग को फिर से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।
वहीं, भारतीय सेना बीआरओ के साथ मिलकर और स्थानीय लोगों और नागरिक प्रशासन की सहायता से वैकल्पिक मार्ग मंगन-संकलांग-थेंग-चुंगथांग को खोलने का प्रयास कर रही है। इसके लिए मंगन-संकलांग क्रॉसिंग पर तीस्ता नदी पर दो बेली ब्रिज के बनाए जाने की जरूरत है। चौबीसों घंटे काम करते हुए रविवार सुबह 11 बजे पहला पुल बनकर तैयार हो गया है।
उन्होंने बताया कि मंगन से आगे उत्तरी सिक्किम का क्षेत्र 4 अक्तूबर से कटा हुआ है। तत्काल प्रतिक्रिया के रूप में, चुंगथांग और सांकलांग-मंगन क्रॉसिंग पर पैदल पुल और ज़िप लाइनों का निर्माण किया गया था। इनसे लोगों की पैदल आवाजाही और स्थापित ज़िप लाइनों के माध्यम से राहत सामग्री का प्रावधान संभव हो गया है। मुख्य सड़क मंगन-तुंग-चुंगथांग को बड़े पैमाने पर क्षति होने के कारण, टूंग में क्षतिग्रस्त पुल स्थल तक पहुंचने और एक नए पुल का बनाने से पहले नागा गांव की क्षतिग्रस्त सड़क को बनाना पड़ेगा, जिसमें अभी समय लगेगा।
तिवारी ने बताया कि वैकल्पिक मार्ग मंगन-संकलांग-थेंग-चुंगथांग के माध्यम से चुंगथांग तक कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए तत्काल राहत के रूप में, त्रिशक्ति कोर के सैनिक मंगन-संकलांग क्रॉसिंग पर बेली ब्रिज का निर्माण कर रहे हैं, जहां से 200 मीटर ऊपर की ओर एक बांस पुल और जिप लाइन का निर्माण किया गया था। हालांकि, नदी की चौड़ाई 600 फीट तक बढ़ गई है और बीच में 160 फीट के द्वीप के साथ दो चैनलों पर पानी बह रहा है। इसलिए दो अलग-अलग पुल बनाने का निर्णय लिया गया। सेना ने युद्ध स्तर पर काम करते हुए 150 फीट लंबे पहले पुल का निर्माण रविवार यानि 22 अक्टूबर को पूरा कर लिया। दूसरे पुल का निर्माण 27 तक पूरा होने की संभावना है।
तिवारी ने बताया कि त्रिशक्ति सैपर्स ने हमारे इस विश्वास को मजबूत किया है कि जब हम प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने के लिए एकजुट होते हैं तो कोई भी चुनौती दुर्गम नहीं होती। उनके असाधारण कौशल, अद्वितीय समर्पण और सेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने प्रभावित समुदायों के दिलों में आशा बहाल कर दी है कि सामान्य स्थिति जल्द ही बहाल हो जाएगी।