फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   women turns entrepreneur-cum-farmer in maharashtra village no male farmer commite suicide here

किसानों की आत्महत्याओं से बदनाम हुए महाराष्ट्र में आगे आईं महिलाएं, उठाया ये बड़ा कदम

Tue, 31 Oct 2017 04:12 PM IST
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा Updated Tue, 31 Oct 2017 04:12 PM IST
विज्ञापन
women turns entrepreneur-cum-farmer in maharashtra village no male farmer commite suicide here
file photo
महाराष्ट्र का हिंगलाजवाडी गांव की महिलाओं ने अपने गांव को 'नो सुसाइड जोन' में बदल देने का संकल्प लिया है। 3000 की जनसंख्या वाले इस छोटे से गांव में दोपहर के समय घर का काम करते हुए पुरुष दिखाई देते हैं। विष्णु कुंभर जहां पॉलट्री फार्म साफ करते दिखाई दे रहे हैं वहीं अच्युत कटकटे सोयाबीन को चुनते- बीनते दिख रहे हैं, जबकि गांव के दूसरे पुरुष बच्चों की देख-रेख में जुटे हैं। इन महिलाओं का दबदबा इतना है कि इनकी अनुपस्थिति में भी स्थिति बिगड़ती नहीं है, यह किसी साधारण गांव का सीन नहीं लगता है।
विज्ञापन


 घर के कामकाज में जुटे पुरुषों के बारे में कटकटे बताते हैं कि गांव की महिलाएं सेल्फ हेल्फ ग्रुप का इंस्टॉलमेंट जमा करने शहर गई हैं। वहां से गांव की महिलाएं बाजार भी जाएंगी और अपने बिजनेस और दुकानों के लिए सामान खरीदती हुई वापस आएंगी।
विज्ञापन


हिंगलावाडी गांव की महिलाओं ने बीड़ा उठाया है कि उनके गांव का कोई भी किसान अब आत्महत्या नहीं करेगा। कोमलताई सहित गांव की महिलाओं ने न केवल घर के खर्चों का बीड़ा उठाया है बल्कि खेती किसानी में भी हर दिन नए एक्सपेरिमेंट कर रही हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


पढ़ें: UPSC एग्जाम में नकल कर रहा था IPS अधिकारी, पत्नी भी गिरफ्तार

महाराष्ट्र का मराठवाड़ा इलाका सूखा और फसल बरबाद की समस्या से जूझ रहा है। लगातार पड़ता सूखा और फसल बरबाद होने पर अब गांव के किसान आत्महत्या नहीं करें इसलिए खेती किसानी से लेकर घर खर्च तक का बीड़ा महिलाओं ने उठा लिया है। सूदखोरों का व्यवसाय खत्म हो गया है। 

कसम खाई की अब किसानों को मरने नहीं देंगे

women turns entrepreneur-cum-farmer in maharashtra village no male farmer commite suicide here
file photo
गांव की किसान रेखा शिंदे कहती हैं कि हरबार हमारे यहां कम वर्षा होती है, सूखा भी हमारे गांव या क्षेत्र की बड़ी समस्या है। गांव के किसान लगातार आत्महत्या कर रहे थे,  फिर हमलोंगो ने ठाना कि अब हम ऐसा नहीं होने देंगे और हमने अपने घरों की जिम्मेदारी अपने ऊपर ली और कसम खाई की अब किसानों को मरने नहीं देंगे।

 गांव की महिलाओं ने ठाना कि अगर कोई किसान ऐसा कोई कदम उठा लेता है तो उसका परिवार और बच्चा भूखा नहीं सोएगा।  हमने अपने घरवालों से किसानी के लिए थोड़ी सी जमीन मांगी, शुरू- शुरू में उनलोगों ने हमें कहा कि महिलाएं सिर्फ घर की देखभाल के लिए होती हैं खेतों के लिए नहीं..

लेकिन हम गांव की महिलाओं ने हार नहीं मानी और अपनी बात हर दिन रिपीट करते रहे और धीरे धीरे हमने खेतों के छोटे से टुकड़े पर सब्जी उगानी शुरू की। कम पानी, रिसोर्सेज और बिना किसी मदद से खेती शुरू की। खेती से फायदा हुआ, परिवार के भरणपोषण में तो मदद मिली ही कमाई भी बढ़ गई। और बढ़ी कमाई ने न केवल हमें आत्मविश्वास से भर दिया बल्कि हमारे परिवार वालों का विश्वास भी हम पर बढ़ गया है। 

अब इस गांव में करीब 200 सेल्फ हेल्प ग्रुप चल रहे हैं जिसमें गांव की करीब 265 महिलाएं  सदस्य हैं। सेल्फ-हेल्प ग्रुप की मदद से गांव की महिलाएं मुर्गा पालन केंद्र, बकरी पालन, डेयरी व्यवसाय, कपड़े की दुकान सहित कई व्यवसाय चला रही हैं। ऐसा ही एक व्यवसाय चला रही कमल कुंभर को सीआईआई फांउडेशन वुमन सम्मान 2017 और नीति आयोग सम्मान से सम्मानित किया गया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed