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महिला आरक्षण विधेयक गिरने पर रार: थरूर बोले- हम महिलाओं के खिलाफ नहीं; परिसीमन मुद्दे पर गंभीर चर्चा की मांग

Sat, 18 Apr 2026 12:21 PM IST
Shivam Garg न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shivam Garg Updated Sat, 18 Apr 2026 12:21 PM IST
सार

लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) महिला आरक्षण बिल पारित नहीं हो सका, जिससे सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए और दोनों तरफ से तीखे आरोप-प्रत्यारोप के साथ बहस का माहौल और गर्म हो गया। जानिए किसने क्या कहा...

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Women Reservation Bill Fails in Lok Sabha, Sparks Fierce Political Clash Between Government and Opposition
सरकार–विपक्ष में तीखी बहस - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

संसद में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने वाले अहम विधेयक को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। लोकसभा में शुक्रवार शाम संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पर मतदान हुआ था, जिसमें कुल 528 सदस्यों ने हिस्सा लिया। इनमें 298 सांसदों ने विधेयक के पक्ष में और 230 ने विरोध में मतदान किया। हालांकि, ओम बिरला ने स्पष्ट किया था कि यह विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका, जिसके चलते इसे पारित नहीं माना गया। जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली।

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पार्टी महिलाओं के आरक्षण के खिलाफ नहीं- शशि थरूर
वहीं, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं के आरक्षण के खिलाफ नहीं है और वह इसे तुरंत लागू करने के पक्ष में है। लेकिन उनका आरोप है कि सरकार ने इसे परिसीमन (Delimitation) के मुद्दे से जोड़कर जटिल बना दिया है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने दोनों मुद्दों को जानबूझकर जोड़कर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की। थरूर ने कहा कि कांग्रेस 33% महिला आरक्षण लागू करने के लिए तैयार है, लेकिन परिसीमन एक गंभीर मुद्दा है जिस पर सभी दलों और राज्यों के साथ व्यापक चर्चा जरूरी है।


ये भी पढ़ें:- महिला आरक्षण: पहली बार संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं करा पाई मोदी सरकार; चाहिए थे 352 वोट, मिले 298

देश के लिए काला दिन- किरेन रिजिजू
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि इस फैसले का जवाब देश की महिलाओं के गुस्से के रूप में सामने आएगा। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक बिल था, जिसका उद्देश्य संसद और विधानसभा में महिलाओं को आरक्षण देना था। रिजिजू ने कहा कि इस बिल का विरोध करने का कोई ठोस कारण समझ नहीं आता और यह देश के लिए काला दिन है।

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