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गृह मंत्रालय पहुंचा बीएसएफ में महिला भर्ती का मामला, घोषित हो चुकी रिजल्ट सूची में होगा सुधार!

Thu, 15 Oct 2020 02:15 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 15 Oct 2020 02:15 PM IST
सार

  • केवल एक महिला आवेदक का नाम रिजल्ट सूची में आना, मतलब केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेशों की अवहेलना
  • कमांडेंट ने कहा, यह भर्ती प्रक्रिया सिपाही जीडी के लिए नहीं, बल्कि सिपाही टेक्निकल के लिए थी

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Women recruitment issue in BSF reached at Home Ministry, results list announced will improve
Women in BSF - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

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सीमा सुरक्षा बल में तकनीकी पदों पर महिलाओं की भर्ती न किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने इस मामले को केंद्रीय गृह मंत्रालय तक पहुंचा दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा है कि बीएसएफ में 2018-19 के दौरान सिपाही 'टेक्नीकल एसएमटी वर्कशॉप' के 207 पदों को भरने के लिए आवेदन मांगे थे। पिछले दिनों जब इस परीक्षा का रिजल्ट आया तो उसमें केवल एक महिला आवेदक का चयन किया गया था। एसोसिएशन ने केंद्रीय गृहमंत्री से मांग की है कि इस भर्ती में महिला आवेदकों को 15 प्रतिशत आरक्षण देकर दोबारा से रिज़ल्ट सूची जारी कराई जाए।

केंद्रीय सुरक्षा बलों में महिलाओं की स्थिति (1 जनवरी 2020 के अनुसार) 

बल                   स्वीकृत संख्या (पुरुष एवं महिला)    तैनात महिलाएं
सीआरपीएफ        324340                                     8194
बीएसएफ            265173                                     5215
सीआईएसएफ      162541                                     8630
आईटीबीपी          89567                                      2078
एसएसबी             97244                                      2097
असम राइफल      66408                                        952

इस रिपोर्ट के तहत मिलता है महिलाओं को आरक्षण 

रणबीर सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार में महिला सशक्तीकरण पर बनी समिति की छठी रिपोर्ट में आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा 2016 में महिला सिपाहियों के पदों को लेकर एक ऑफिस मेमोरेंडम जारी किया गया था। इसमें यह प्रावधान था कि सीआरपीएफ व सीआईएसएफ में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिया जाए। सीमा सुरक्षा बल, आईटीबीपी और एसएसबी में महिलाओं की 15 फीसदी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था। जिस वक्त यह महत्वपूर्ण घोषणा की गई, उस समय राजनाथ सिंह केंद्रीय गृह मंत्रालय की कमान संभाल रहे थे।

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रणबीर सिंह के अनुसार, इस मामले में जब बीएसएफ कमांडेंट (रिक्रूटमेंट) से बातचीत की गई, तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। जो पूछा था, उसका जवाब ही नहीं दिया गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय का आदेश था कि सिपाहियों की भर्ती में महिलाओं की निर्धारित भागीदारी सुनिश्चित की जाए। महिलाओं को 15 फीसदी आरक्षण दिया जाना था। इसके बावजूद केवल एक महिला आवेदक का नाम रिजल्ट सूची में आना, मतलब केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेशों की अवहेलना हुई है।

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सीमा सुरक्षा बल के कमांडेंट ने दिया जवाब

रणबीर सिंह बताते हैं कि कमांडेंट (रिक्रूटमेंट) ने जो जवाब दिया है, वह बड़ा अजीब है। कमांडेंट ने कहा, यह भर्ती प्रक्रिया सिपाही जीडी के लिए नहीं, बल्कि सिपाही टेक्निकल के लिए थी। इसके चलते महिला आवेदकों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल सका। उन्होंने पदों को गैर-तकनीकी बताकर पल्ला झाड़ लिया है। तकनीकी पदों पर तो महिला आवेदकों का और ज्यादा हक बनता है।



सीमा सुरक्षा बल ने अब सिपाही के पद को भी दो-फाड़ कर दिया है। इसका नुकसान महिला आवेदकों को उठाना पड़ा है। अमित शाह को लिखे अपने पत्र में एसोसिएशन ने आग्रह किया है कि इस भर्ती प्रक्रिया में महिलाओं को 15 फीसदी पदों पर आरक्षण देकर दोबारा से रिजल्ट सूची जारी की जाए। इतना ही नहीं, बीएसएफ के अलावा दूसरे सुरक्षा बलों को भी महिला सिपाहियों के आरक्षण देने के मामले में स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किए जाएं।

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