पांच महीने से मां के कंकाल के साथ रह रही थी बेटी, मिली उसकी भी लाश
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ताजनगरी के थाना शाहगंज के अर्जुन नगर में शनिवार दोपहर चाहर मार्केट के बीच बने एक जर्जर मकान के बंद कमरे में एक महिला का कंकाल तो दूसरे कमरे में उसकी बेटी की लाश मिलने सनसनी फैल गई। मां-बेटी इस मकान में 15 साल से किराए पर रह रही थीं। पिछले चार महीने से मां को मकान से बाहर आते किसी ने नहीं देखा था। पुलिस ने शव और कंकाल को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया दोनों की मौत स्वाभाविक होने की आशंका है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। दोनों की मौत पर रहस्य बना हुआ है।
अर्जुन नगर में मैन रोड पर अकोला निवासी योगेंद्र चाहर का मार्केट है। मार्केट के पिछले हिस्से में ही योगेंद्र के भाई वीरेंद्र का जर्जर मकान है। दोनों भाई भोपाल में रहते हैं। वीरेंद्र की पत्नी अैर बच्चे अकोला में रहते हैं। वह कभी-कभी आते थे। मकान में 15 साल से विमला अग्रवाल (70) अपनी बेटी वीना (55) के साथ ही रहती थीं। विमला एसएन मेडिकल कालेज की रिटायर्ड नर्स थीं।
चार महीने से विमला को घर से बाहर आते किसी ने नहीं देखा। वहीं वीना भी तकरीबन डेढ़ महीने से बाहर नहीं आई थी। पिछले कुछ दिन से मकान से दुर्गंध आ रहीं थी। इस पर पड़ोस के लोगों को अनहोनी की आशंका हुई।
मकान से दुर्गंध आने पर पड़ोसियों को हुई जानकारी
शनिवार को पूर्वाह्न 11 बजे एक दुकानदार ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस पहुंची तो देखा कि एक कमरे में फर्श पर वीना की लाश पड़ी हुई थी। वहीं उससे पांच फीट की दूरी पर दूसरे कमरे में ताला तोड़कर देखा तो वहां फर्श पर कंकाल मिला, जो विमला का बताया जा रहा है।
पुलिस का कहना है कि वीना की लाश तकरीबन 10 से 15 दिन पुरानी और कंकाल तीन से चार महीने पुराना हो सकता है। वीना अपनी मां के कंकाल के साथ ही रह रही होगी। मकान मालिक वीरेंद्र ने बताया कि वीना एक साल से किराया भी नहीं दे रही थीं।
पांच महीने पहले मां तो 10 दिन पहले हुई बेटी की मौत
उन्होंने बताया कि किसी की मौत होने के बाद लाश से 24 घंटे के अंदर दुर्गंध आना शुरू हो जाती है। 15 से 20 दिन में डी-कंपोज (सड़ने) की प्रक्रिया शुरू होने लगती है। विमला की मौत के मामले में भी ऐसा ही हुआ होगा। उसकी सिर्फ हड्डियां ही पुलिस को मिली हैं। कंकाल से किसी तरह की दुर्गंध भी नहीं आ रही है। कहीं हड्डी पर मांस भी नहीं मिला है। इससे उसकी मौत तकरीबन पांच महीने पहले होने का अनुमान है।
वहीं, उसकी बेटी वीना की लाश कई जगह से जली हुई प्रतीत हो रही है। डा. अग्रवाल बताते हैं कि लाश वैसीकल फार्मेशन में आ जाती है। इसके शरीर से गैस निकलने लगती है। इससे मांस पर छाले पड़ने लगते हैं, जिसे लोग जलना समझ जाते हैं। वीना के मामले में भी ऐसा ही हुआ होगा।
नेक्रोफीलिया की मरीज हो सकती है वीना
जिन हालात में उसकी मां विमला का कंकाल मिला है, साफ है कि वीना ने लाश के साथ समय बिताया। उन्होंने बताया कि ये बीमारी नेक्रोफीलिया कही जाती है। इसमें मरीज को शव से उतना ही लगाव रहता है, जैसे कि व्यक्ति के जीवित होने पर।
ऐसे मरीज प्रतिक्रिया (रोना, किसी को बताना) व्यक्त नहीं करते हैं। शव का अंतिम संस्कार करने का विचार भी दिमाग में नहीं आता। भारत में ऐसे मरीज बहुत ही कम पाए जाते हैं।