डेढ़ साल के मासूम को गोद में लिए लड़ रहीं सियासत की लड़ाई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दो-ढाई महीने पहले तक वे आम गृहिणी थीं। विधायक पति सत्यजित विश्वास और बेटे को संभालने में ही उनका दिन बीत जाता था। सरस्वती पूजा की रात उनकी जिंदगी की न भूलने वाली रात साबित हुई। घर के पास बने एक पंडाल में सरेआम गोली मार कर पति की हत्या कर दी गई थी। पति के गम में बहने वाले आंसू अभी सूखे भी नहीं थे कि मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने उनको लोकसभा चुनावों में नदिया जिले की रानाघाट सीट से उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसके साथ ही रूपाली विश्वास के जीवन में एक और लड़ाई शुरू हो गई। इस सीट पर चौथे चरण में 29 अप्रैल को मतदान होना है।
पिछले महीने ही 25 वर्ष की हुईं रूपाली अब अपने पति की विरासत को आगे बढ़ाते हुए उनके अधूरे कार्यों को पूरा करना चाहती हैं। वे इस लोकसभा चुनाव में बंगाल की सबसे युवा उम्मीदवार हैं। भले ही सत्यजित नहीं हैं, लेकिन इन चुनावों में वे जिंदा हैं। पार्टी के नेता हर चुनावी रैली में सत्यजित का हवाला देते हैं। तमाम नेता अपने कार्यकर्ताओं को याद दिलाना नहीं भूलते कि सत्यजित ने कृष्णनगर इलाके से पार्टी के उम्मीदवार को 50 हजार से ज्यादा वोटों की लीड दिलाने का वादा किया था।
खुद रूपाली बेहद बहादुरी से इस मोर्चे पर डटी हुई हैं। डेढ़ साल का बेटा हर सभा में उनकी गोद में रहता है। वे कहती हैं कि पति के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए राजनीति में उतरी हैं।
स्थानीय लोग मानते हैं कि सत्यजित की मौत ही रूपाली को यहां विजयी बनाएगी। उनकी हर रैली में सहानुभूति का ज्वार उमड़ पड़ता है। रैलियों में वे ज्यादा बोल नहीं पातीं। कहती हैं कि अब तक आपने मेरे पति का समर्थन किया था, अब मेरा करें। रूपाली के छोटे बेटे को देख कर महिलाएं भावुक हो जाती हैं।