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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   With the new MP CM Mohan Yadav, BJP has solved many political equations simultaneously

Mohan Yadav: मोहन यादव से एमपी ही नहीं यूपी और बिहार भी साधा, कुछ इस तरह भाजपा ने मारा 'पॉलिटिकल शॉट'

Mon, 11 Dec 2023 08:26 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Mon, 11 Dec 2023 08:26 PM IST
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सार
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का नाम घोषित करके भाजपा ने उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव और बिहार में नीतीश और लालू यादव की सियासत को बड़ा झटका दिया है। सियासी जानकार भी मानते हैं कि मोहन यादव के नाम से भाजपा का यह बड़ा सियासी दांव है...
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With the new MP CM Mohan Yadav, BJP has solved many political equations simultaneously
Mohan Yadav - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ भाजपा ने एक साथ कई राजनीतिक समीकरणों को साध लिया है। खास तौर से उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे यादव बाहुल्य इलाकों में भाजपा ने कई स्थानीय पार्टियों के सियासी समीकरण बिगाड़ दिए। सियासी जानकार मानते हैं कि मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री का नाम आने वाले लोकसभा के चुनाव के लिहाज से भाजपा के लिए एक बड़ा पॉलिटिकल शॉट माना जाएगा। खास तौर से तब जब जातीय जनगणना कराए जाने की लगातार मांग हो रही है। बिहार में जातीय जनगणना के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था भी लागू कर दी गई है। ऐसे माहौल में एक बार फिर से पिछड़े समुदाय के मुख्यमंत्री को रिप्लेस कर यादव और पिछड़े समुदाय के ही व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाने का सियासी मकसद भी साफ है।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का नाम घोषित करके भाजपा ने उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव और बिहार में नीतीश और लालू यादव की सियासत को बड़ा झटका दिया है। सियासी जानकार भी मानते हैं कि मोहन यादव के नाम से भाजपा का यह बड़ा सियासी दांव है। राजनीतिक विश्लेषक अमित सोनी कहते हैं कि प्रदेश में भी पिछड़ों की आबादी में यादवों की संख्या बहुतायत है। जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार में तो सियासी समीकरणों के नजरिए से यादव समुदाय मजबूती से प्रभावशाली माना जाता है। ऐसे हालात में मोहन यादव के नाम से उत्तर प्रदेश और बिहार की सियासत में भाजपा ने बड़ी सेंधमारी करने की कोशिश तो की ही है।

वरिष्ठ पत्रकार और सियासी विश्लेषक देवेंद्र भवरा कहते हैं कि सीएम का नाम घोषित करने में देरी भले की हो, लेकिन जो नाम सामने आया है वह पार्टी के सियासी नजरिये से फिट बैठता है। उनका कहना है कि मोहन यादव मुख्यमंत्री तो मध्यप्रदेश के ही रहेंगे लेकिन जो सियासी संदेश जातीयता के समीकरणों के आधार पर भाजपा ने देश के अलग-अलग हिस्सों में देना चाहती है, वह दे चुकी है। इसलिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री का चयन जितना मध्यप्रदेश के लिए महत्वपूर्ण है, उतना ही आने वाले लोकसभा के चुनावी नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पिछड़ा और यादव महासंघ से ताल्लुक रखने वाले अमरनाथ यादव कहते हैं कि भाजपा ने मोहन यादव के साथ उत्तर प्रदेश और बिहार में यादवों के बीच में बड़ी उम्मीद जगाई है। अमरनाथ कहते हैं कि आने वाले लोकसभा चुनाव में यह संदेश स्पष्ट रूप से जनता के बीच में जाएगा कि भाजपा ने एक यादव समाज के व्यक्ति को सम्मानजनक पद पर पहुंचाया है। उनका कहना है वैसे तो मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर भी यादव ही थे। लेकिन जिस तरीके से अखिलेश यादव और लालू यादव उत्तर प्रदेश और बिहार समेत अलग-अलग राज्यों में यादवों पर अपना आधिपत्य जमाते हैं, वह नैरेटिव अब टूटेगा। पिछड़ा यादव महासंघ के अमरनाथ यादव कहते हैं कि निश्चित तौर पर इसका फायदा भी भाजपा को आने वाले चुनावों में मिलेगा।

वरिष्ठ पत्रकार हरिओम सिंह कहते हैं कि मोहन यादव का नाम तब सामने आया है, जब पूरे देश में जातीय जनगणना की चर्चा हो रही है। कहा जा रहा है कि आने वाले लोकसभा चुनाव में यह मुद्दा मजबूती के साथ काम करेगा। इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के मुख्य अखिलेश यादव से लेकर लालू, नीतीश और कांग्रेस पार्टी भी फ्रंट फुट पर खेल रही है। ऐसे दौर में भाजपा ने मोहन यादव के नाम के साथ विपक्ष की सियासत में बड़ी हलचल पैदा कर दी है। वह कहते हैं कि बिहार में तो नीतीश कुमार ने जातीय जनगणना के जरिए उसके आधार पर आरक्षण की व्यवस्था भी कर दी। ऐसे में माना जा रहा है कि यह विपक्ष का बड़ा सियासी दांव साबित हो सकता है। भाजपा ने जिस तरीके से चुपचाप नए मुख्यमंत्री का नाम घोषित किया, उससे न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि कई राज्यों में सियासी बड़े समीकरण साध लिए।

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