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शीतसत्र: हंगामे के कारण राज्यसभा में तीसरे हफ्ते सबसे कम 37.6 फीसदी कामकाज, प्रश्नकाल सबसे ज्यादा प्रभावित

Mon, 20 Dec 2021 04:03 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 20 Dec 2021 04:03 AM IST
सार

आंकड़ों के मुताबिक, तीसरे सप्ताह में प्रश्नकाल के लिए उपलब्ध समय का सिर्फ 11.40 फीसदी ही इस्तेमाल हो सका। वहीं, 62.70 फीसदी समय सरकार के विधायी कामकाज पर खर्च हुआ। 

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Winter session, 37.6 percent working in Rajya Sabha lowest for third week due to ruckus
राज्यसभा। - फोटो : ANI

विस्तार

विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण संसद के शीतकालीन सत्र के तीसरे सप्ताह में राज्यसभा की उत्पादकता में भारी गिरावट देखने को मिली। 12 सदस्यों के निलंबन के मुद्दे पर व्यवधान और स्थगन से इस दौरान उच्च सदन में सबसे कम 37.60 फीसदी ही कामकाज हो सका। इस सत्र के पहले सप्ताह में 49.70 फीसदी और दूसरे सप्ताह में 52.50 फीसदी कामकाज हुआ था। इसत तरह तीन हफ्ते में महज 46.70 फीसदी कार्य ही हो सका। 

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राज्यसभा सचिवालय के मुताबिक, शीत सत्र के तीसरे हफ्ते के लिए कुल 27 घंटे 11 मिनट का समय निर्धारित था। लेकिन कार्य सिर्फ 10 घंटे 14 मिनट ही हो सका। लगातार हंगामे की वजह से उच्च सदन का 62.40 फीसदी समय बर्बाद हो गया।
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इस दौरान प्रश्नकाल सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जिसमें सरकार की जवाबदेही से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। प्रश्नकाल में संबंधित मंत्रियों से मौखिक रूप से 75 सूचीबद्ध तारांकित सवालों में महज चार के ही जवाब दिए गए।
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आंकड़ों के मुताबिक, तीसरे सप्ताह में प्रश्नकाल के लिए उपलब्ध समय का सिर्फ 11.40 फीसदी ही इस्तेमाल हो सका। वहीं, 62.70 फीसदी समय सरकार के विधायी कामकाज पर खर्च हुआ। 

ओमिक्रॉन पर चर्चा अधूरी
सचिवालय के मुताबिक, तीसरे हफ्ते 6 घंटे 25 मिनट की चर्चा में तीन विधेयक पारित किए गए। इसमें 33 सदस्यों ने हिस्सा लिया। इस दौरान कोविड-19 के नए स्वरूप ओमिक्रॉन वैरिएंट के बढ़ रहे मामलों से पैदा स्थिति पर एक छोटी अवधि की चर्चा हुई।

हालांकि, कोई फैसला नहीं निकला। यह मुद्दा सोमवार को फिर से चर्चा के लिए सूचीबद्ध है। इसके अलावा, हंगामे की वजह से राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने शुक्रवार को शून्यकाल के 17 मिनट बाद ही सदन को स्थगित कर दिया। सरकार और विपक्षी दलों से सदस्यों के निलंबन के मुद्दे पर गतिरोध खत्म करने का आग्रह किया।

217 सूचीबद्ध प्रश्नों में सिर्फ 56 के ही उत्तर 
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जारी मानसून सत्र के पहले तीन सप्ताहों में 15 बैठकें हुईं। इनमें छह बैठकों के लिए सदन ने प्रतिदिन एक घंटे से भी कम समय तक कार्य किया। अब तक कुल आठ विधेयकों को पारित करने के लिए सदन के कामकाज के समय का करीब 42 फीसदी सरकार के विधायी कामकाज पर खर्च हुआ। सिर्फ 18 फीसदी समय प्रश्नकाल में बिताया गया, जिसमें 217 सूचीबद्ध प्रश्नों में महज 56 का मौखिक उत्तर दिया गया। 

आज इन पर चर्चा संभव
-वाणिज्यिक सहित अन्य विवादों के समाधान को बढ़ावा देने के लिहाज से मध्यस्थता विधेयक-2021 को सोमवार को राज्यसभा में पेश करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

-लोकसभा से पारित नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक पदार्थ (संशोधन) विधेयक-2021 को भी सूचीबद्ध किया गया है। चर्चा होने के साथ इस विधेयक के पारित होने की संभावना है। 
-देशभर में कोरोना के नए स्वरूप ओमिक्रॉन से पैदा हालात पर चर्चा हो सकती है।

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