{"_id":"5b9b7eae867a557ecf605ed8","slug":"will-noida-learn-swachh-lessons-from-indore","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"क्या इंदौर से सफाई का सबक सीखेगा नोएडा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
क्या इंदौर से सफाई का सबक सीखेगा नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 14 Sep 2018 02:56 PM IST
विज्ञापन
Indore cleanest city
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिछले दो सालों से लगातार देश का सबसे खूबसूरत और साफ सुथरा शहर का खिताब जीतने वाला इंदौर एक दिन में साफ शहर नहीं बना है। इसे साफ-सुथरा बनाने में न केवल इंदौर प्रशासन का बहुत अहम योगदान रहा है बल्कि प्रदेश की 25 लाख की जनसंख्या के साथ-साथ 76 आरडब्ल्यूए, इंदौर नगर निगम और उनके अधिकारियों सहित प्रदेश के मेयर की दिन-रात की मेहनत का नतीजा है।
तीन सालों में कैसे बदला इंदौर
महज तीन साल पहले तक इंदौर की गली-कूचों में गंदगी का अंबार लगा होता था। शहर के चौक-चौराहों पर गंदगी ही गंदगी नजर आती थी। लेकिन शुरुआती 20 स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत आते ही शहर और उसकी सड़कों को सौ फीसदी गंदगी मुक्त बनाने के लक्ष्य को नगर निगम आगे आया और आज देश नतीजा देख रहा है।
क्या नोएडा बन पाएगा स्वच्छ
क्या नोएडा अगले साल के स्वच्छ रैंकिंग में यह स्थान पा सकेगा? बता दें कि नोएडा की जनसंख्या महज 14 लाख है जबकि रजिस्टर्ड आरडब्ल्यू ए की संख्या लगभग 75 है।
विज्ञापन
घनी आबादी वाले इंदौर में देश के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षक संस्थान आईआईटी और आईआईएम मौजूद हैं। इंदौर के साफ सुथरा होने में एक वजह और भी है, क्योंकि वहां की सड़कों को दिन में तीन बार साफ किया जाता है, जबकि व्यवसायिक इलाकों से दो बार और आवासीय क्षेत्रों से एक बार कचरा उठाने का काम किया जाता है।
मेयर की निगरानी में शहर बना स्वच्छ
अतिरिक्त नगर निगम आयुक्त रोहन सक्सेना ने बताया कि झुग्गी झोपड़ी वाले इलाकों से लेकर निम्न आय समूह वालों को भी कचरा निस्तारण करना सिखाया गया। इंदौर को साफ करने में इंदौर 311 एप ने भी अहम भूमिका निभाई है, जिसने घर-घर में अपनी पैठ बनाई और 24 घंटे के भीतर नागरिकों की समस्या का समाधान भी किया।
कॉल सेंटर आईएमसी द्वारा मैनेज किया गया, इसमें शहर की मेयर मालिनी लक्ष्मीसिंह गौर सीधे तौर पर जुड़ी रहीं और उनकी निगरानी में इंदौर को साफ करने का काम किया गया। मालिनी शहर की साफ सफाई देखने के लिए कभी भी निकल पड़ती थीं।
विज्ञापन
तीन सालों में कैसे बदला इंदौर
महज तीन साल पहले तक इंदौर की गली-कूचों में गंदगी का अंबार लगा होता था। शहर के चौक-चौराहों पर गंदगी ही गंदगी नजर आती थी। लेकिन शुरुआती 20 स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत आते ही शहर और उसकी सड़कों को सौ फीसदी गंदगी मुक्त बनाने के लक्ष्य को नगर निगम आगे आया और आज देश नतीजा देख रहा है।
विज्ञापन
क्या नोएडा बन पाएगा स्वच्छ
क्या नोएडा अगले साल के स्वच्छ रैंकिंग में यह स्थान पा सकेगा? बता दें कि नोएडा की जनसंख्या महज 14 लाख है जबकि रजिस्टर्ड आरडब्ल्यू ए की संख्या लगभग 75 है।
विज्ञापन
घनी आबादी वाले इंदौर में देश के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षक संस्थान आईआईटी और आईआईएम मौजूद हैं। इंदौर के साफ सुथरा होने में एक वजह और भी है, क्योंकि वहां की सड़कों को दिन में तीन बार साफ किया जाता है, जबकि व्यवसायिक इलाकों से दो बार और आवासीय क्षेत्रों से एक बार कचरा उठाने का काम किया जाता है।
मेयर की निगरानी में शहर बना स्वच्छ
अतिरिक्त नगर निगम आयुक्त रोहन सक्सेना ने बताया कि झुग्गी झोपड़ी वाले इलाकों से लेकर निम्न आय समूह वालों को भी कचरा निस्तारण करना सिखाया गया। इंदौर को साफ करने में इंदौर 311 एप ने भी अहम भूमिका निभाई है, जिसने घर-घर में अपनी पैठ बनाई और 24 घंटे के भीतर नागरिकों की समस्या का समाधान भी किया।
कॉल सेंटर आईएमसी द्वारा मैनेज किया गया, इसमें शहर की मेयर मालिनी लक्ष्मीसिंह गौर सीधे तौर पर जुड़ी रहीं और उनकी निगरानी में इंदौर को साफ करने का काम किया गया। मालिनी शहर की साफ सफाई देखने के लिए कभी भी निकल पड़ती थीं।
स्वच्छ इंदौर में एनजीओ की है अहम भागीदारी
इस पूरे अभियान में शहर के कई एनजीओ ने भी अहम भूमिका निभाई, जिसमें खुले में शौच करने वाले लोगों का नामकरण कर शर्मिंदा किया। यही नहीं खुले में शौच करने वालों को डब्बा गैंग कहकर बुलाया जाने लगा।
यही नहीं पकड़े जाने वाले लोगों पर 500 से लाख रुपये तक जुर्माना भी लगाया गया। किसी को नहीं छोड़ा गया, चाहे वो राजनीति से जुड़ा हो या फिर बड़ा व्यवसायी। शहर में करीब 12,343 घरों में बाथरुम बनाए गए। 128 सामुदायिक जगहों पर और 201 पब्लिक साइट्स पर टॉयलेट बनाया गया, जो कमाई का साधन बना।
कूड़े का निस्तारण है बड़ी समस्या
बता दें कि इंदौर में 1115 मिट्रिक टन कूड़ा हर दिन निकलता है, जबकि नोएडा में 600 मिट्रिक टन कूड़ा निकलता है। बता दें कि 650 एमटी गीला कूड़ा होता है जबकि 465 एमटी कूड़ा सूखा होता है। इन सभी कूड़े को न केवल जमा किया जाता है बल्कि उसका निस्तारण भी किया जाता है।
इंदौर को साफ सुथरा बनाने में करीब 7,500 नगर निगम के कर्मचारी दिन रात लगे रहते हैं। यही नहीं इन कर्मचारियों की निगरानी के लिए उन सभी को आधार कार्ड के साथ बायोमेट्रिक से जोड़ा गया है जिससे उनकी नजरअंदाजी और कामचोरी पर नजर रखी जाती है।
इस पूरे अभियान में शहर के कई एनजीओ ने भी अहम भूमिका निभाई, जिसमें खुले में शौच करने वाले लोगों का नामकरण कर शर्मिंदा किया। यही नहीं खुले में शौच करने वालों को डब्बा गैंग कहकर बुलाया जाने लगा।
यही नहीं पकड़े जाने वाले लोगों पर 500 से लाख रुपये तक जुर्माना भी लगाया गया। किसी को नहीं छोड़ा गया, चाहे वो राजनीति से जुड़ा हो या फिर बड़ा व्यवसायी। शहर में करीब 12,343 घरों में बाथरुम बनाए गए। 128 सामुदायिक जगहों पर और 201 पब्लिक साइट्स पर टॉयलेट बनाया गया, जो कमाई का साधन बना।
कूड़े का निस्तारण है बड़ी समस्या
बता दें कि इंदौर में 1115 मिट्रिक टन कूड़ा हर दिन निकलता है, जबकि नोएडा में 600 मिट्रिक टन कूड़ा निकलता है। बता दें कि 650 एमटी गीला कूड़ा होता है जबकि 465 एमटी कूड़ा सूखा होता है। इन सभी कूड़े को न केवल जमा किया जाता है बल्कि उसका निस्तारण भी किया जाता है।
इंदौर को साफ सुथरा बनाने में करीब 7,500 नगर निगम के कर्मचारी दिन रात लगे रहते हैं। यही नहीं इन कर्मचारियों की निगरानी के लिए उन सभी को आधार कार्ड के साथ बायोमेट्रिक से जोड़ा गया है जिससे उनकी नजरअंदाजी और कामचोरी पर नजर रखी जाती है।